मेहंदीपुर बालाजी: घर नहीं लाना चाहिए इस मंदिर का प्रसाद, जानें क्या कहते हैं यहां के नियम

New Delhi: Mehandipur Bala ji: कलयुग के अवतार कहे जाने वाले भगवान हनुमान (Lord Hanuman) के भारतवर्ष में वैसे तो कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन इनमें से कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जिनके चमत्कारों के बारे में विज्ञान भी नहीं जान पाया है।

हम बात कर रहे हैं हनुमानजी के विश्व प्रसिद्ध मंदिर मेहंदीपुर बालाजी (Mahandipur bala ji temple) की। राजस्थान के दौसा जिले में स्थित यह बुरी शक्तियों का नाश करने के लिए जाना है। मंदिर में स्थापित बालाजी की प्रतिमा के बायीं छाती में एक छोटा सा छेद है, जिससे लगातार जल निकलता है, जिसे श्रद्धालु हनुमानजी का पसीना मानते हैं। बालाजी के अलावा यहां प्रेतराज और भैरों महाराज भी विराजमान है। भैरों जी को कप्तान नाम से संबोधित किया जाता जाता है।

पहली बार मंदिर (Mahandipur bala ji temple) के दर्शन के लिए आए हुए श्रद्धालुओं के लिए बेहद डरावना होता है, क्योंकि यहां लोगों के ऊपर काली छाया और प्रेत बाधा का साया दूर करने के लिए लाया जाता है। मंदिर परिसर में पहुंचते ही व्यक्ति के अंदर मौजूद बुरी शक्तियां जैसे भूत, प्रेत, पिशाच कांपने लगते हैं, क्योंकि यहां प्रेतात्मा को शरीर से मुक्त करने के लिए कठोर दंड दिया जाता है।

मंदिर का प्रसाद नहीं ले जा सकते घऱ

आमतौर पर हम जब भी मंदिर जाते हैं तो पूजा के बाद मिला प्रसाद घर लेकर आते है। लेकिन हनुमानजी के इस मंदिर में प्रसाद को लेकर मान्यताएं बिलकुल उलट हैं। क्योंकि यहां मिलने वाले को घर लेकर जाने की सख्त मनाही है। यहां बालाजी को लड्डू, प्रेतराज को चावल और भैरों को उड़द का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

मान्यता है कि बालाजी के प्रसाद के दो लड्डू खाते ही पीड़ित व्यक्ति के अंदर मौजूद भूत प्रेत छटपटाने लगता है और अजब-गजब हरकतें करने लगता है। यहां पर चढ़ने वाले प्रसाद को दर्खावस्त और अर्जी कहा जाता है। मंदिर में दर्खावस्त का प्रसाद लगने के बाद वहां से तुरंत निकलना होता है। जबकि अर्जी का प्रसाद लेते समय उसे पीछे की ओर फेंकना होता है।

इस पूरी प्रक्रिया में प्रसाद फेंकते समय पीछे नहीं देखना चाहिए। मेंहदीपुर बालाजी मंदिर में चढ़ाया गया प्रसाद यहीं पूर्ण किया जाता है। इसे घर पर ले जाने का निषेध है। खासतौर से जो लोग प्रेतबाधा से परेशान हैं, उन्हें और उनके परिजनों को कोई भी मीठी चीज और प्रसाद आदि साथ लेकर नहीं जाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार सुगंधित वस्तुएं और मिठाई आदि नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करती हैं। इसलिए इनके संबंध में स्थान और समय आदि का निर्देश दिया गया है।

मेहंदीपुर बालाजी जाने से पहले जरुर रखें इन बातों का ध्यान

मेंहदीपुर बालाजी के दर्शन करने वालों के लिए कुछ कड़े नियम होते हैं। यहां आने से कम से कम एक सप्ताह पहले लहसुन, प्याज, अण्डा, मांस, शराब का सेवन बंद करना होता है। इसके अलावा जब भी बालाजी जाएं तो सुबह और शाम की आरती में शामिल होकर आरती के छीटें लेने चाहिए। यह रोग मुक्ति एवं ऊपरी चक्कर से रक्षा करने वाला होता है।

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