Modhera Sun Temple

Modhera Sun Temple: PM मोदी ने की विश्व प्रसिद्ध मोढेरा के सूर्य मंदिर की तारीफ, जानें खास बातें

New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बुधवार को अपने गृह राज्य गुजरात के मेहसाणा में स्थित मोढेरा के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर (Modhera Sun Temple) का एक वीडियो साझा किया और कहा कि बरसात के मौसम में यह मंदिर अद्भुत और भव्य छटा बिखेरता है।

पचपन सेकेंड के इस वीडियो में बारिश में नहाया सूर्य मंदिर (Modhera Sun Temple) अद्भुत नजर आ रहा है। यह मंदिर गुजरात के मेहसाणा जिले के मोढेरा गांव में पुष्पापति नदी के किनारे स्थित है, साथ ही वास्तुशिल्प का उत्कृष्ट नमूना भी है। यह गुजरात के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है और प्राचीन गुजरात की गौरवगाथा का भी प्रमाण भी है। आइए जानते हैं इस मंदिर की खास बातें…

1026ई में करवाया गया था मंदिर का निर्माण

मोढेरा सूर्य मंदिर (Modhera Sun Temple) सूर्यवंशी सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम द्वारा इस मंदिर का निर्माण 1026 ई. में करवाया गया था। यह मंदिर मोढेरा में एक पहाड़ी पर स्थित है। 11वीं शताब्दी के सूर्य मंदिर को इस तरह बनाया गया है कि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक सूरज की किरणें इस मंदिर पर रहती हैं। हालांकि अब यह मंदिर भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरेख में आता है। इसके रख-रखाव से मंदिर में काफी सुधार देखने को मिला है।

तीन भागों में विभाजित है मंदिर

मंदिर (Modhera Sun Temple) के गर्भगृह में कईं पौराणिक कथाओं का चित्रण दीवारों पर नक्काशी द्वारा किया गया है। अन्य प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों की तरह यह मंदिर भी तीन भागों में विभाजित किया गया है। इनमें सूर्य कुंड, सांब मंडप और गुडा मंडप शामिल हैं। कुंड में नीचे जाने पर सीढ़ियां बनी हुई हैं और कुछ छोटे-छोटे मंदिर भी बने हुए हैं।

मंदिर में नहीं किया चूने का प्रयोग

वास्तुशिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध (Modhera Sun Temple) है। मंदिर की खासियत यह है कि इस मंदिर के निर्माण में चूने का प्रयोग नहीं किया गया है। भीमदेव ने इस मंदिर को दो हिस्सों में बनवाया था। पहला हिस्सा गर्भगृह था और दूसरा सभामंडप। सभामंडप के आगे एक विशाल कुंड बना हुआ है, जिसे लोग सूर्यकूंड या रामकुंड के नाम से जानते हैं।

खजुराहो जैसी नक्काशी भी है मौजूद

मंदिर के अंदर कई स्तंभ देखने को मिलते हैं। जिन पर रामायण और महाभारत की चित्रकारी की गई है। जब इन स्तंभों को नीचे से देखा जाता है तब वह अष्टकोणाकार और ऊपर की ओर देखने से वह गोल नजर आते हैं। इस प्रसिद्ध मंदिर (Modhera Sun Temple) को गुजरात का खजुराहो भी कहा जाता है। क्योंकि मंदिर की शिलाओं पर खजुराहो जैसी नक्काशी भी मौजूद है।

यह है मंदिर का पौराणिक महत्व

सूर्य मंदिर (Modhera Sun Temple) के आसपास के क्षेत्र में पहले धर्मरन्य के नाम से जाना जाता था। बताया जाता है कि रावण का अंत करने के बाद भगवान राम ने ब्रह्महत्या से मुक्ति के लिए धर्मरन्य आए थे और यहीं पर व्रत, हवन और पूजा-पाठ किया था। यहां पर भगवान राम ने एक नगर भी बसाया था, जिसे मोढेरा के नाम से जानते हैं। साथ ही जहां भगवान राम ने हवन किया था, वहीं पर सूर्य मंदिर की स्थापना की गई थी।

मंदिर में नहीं की जाती पूजा

विश्व प्रसिद्ध इस सूर्य मंदिर (Modhera Sun Temple) में पूजा-अर्चना नहीं की जाती है क्योंकि अलाउद्दीन खिलजी ने इस मंदिर को खंडित कर दिया था। साथ ही गर्भगृह में रखी भगवान सूर्य की स्वर्ण प्रतिमा और खजाने को भी लूट लिया था। मंदिर के चारों तरह देवी-देवताओं और अप्सराओं की मूर्तिया प्रतिष्ठित हैं। यह मंदिर अपनी छवी के लिए देखते ही बनता है।

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