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Diwali 2020: आज है दीवाली, जानिए शुभ मुहूर्त, लक्ष्‍मी पूजन का सही तरीका और आरती

New Delhi: Diwali Puja 2020: दीवाली (Diwali) हिन्‍दुओं के सबसे प्रमुख और बड़े त्‍योहारों में से एक है। यह खुशहाली, समृद्धि, शांति और सकारात्‍मक ऊर्जा का द्योतक है। रोशनी का यह त्‍योहार बताता है कि चाहे कुछ भी हो जाए असत्‍य पर सत्‍य की जीत अवश्‍य होती है।

मान्यता है कि रावण की लंका का दहन कर 14 वर्ष का वनवास काटकर भगवान राम अपने घर लौटे थे। इसी खुशी में पूरी प्रजा ने नगर में अपने राम का स्वागत घी के दीपक जलाकर किया। राम के भक्तों ने पूरी अयोध्या को दीयों की रोशनी से भर दिया था। दीवाली के दिन को मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) के जन्म दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

वहीं, यह भी माना जाता है कि दीवाली की रात को ही मां लक्ष्मी में भगवान विष्णु से शादी की थी। इस दिन श्री गणेश, मां लक्ष्‍मी और मां सरस्‍वती की पूजा (Diwali Puja) का विधान है। मान्‍यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि तथा बुद्धि का आगमन होता है। हिन्‍दुओं के अलावा सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोग भी दीवाली धूमधाम से मनाते हैं।

दीवाली कब है?

हिन्‍दू पंचांग के अनुसार दीवाली या दीपावली (Diwali Puja) कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की अमावस्‍या को मनाई जाती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार दीवाली हर साल अक्‍टूबर या नवंबर महीने में आती है। इस बार दीवाली 14 नवंबर को है।

दीवाली की तिथि और शुभ मुहूर्त
  • दीवाली / लक्ष्‍मी पूजन की तिथि: 14 नवंबर 2020
  • अमावस्‍या तिथि प्रारंभ: 14 नवंबर 2020 को दोपहर 02 बजकर 17 मिनट से
  • अमावस्‍या तिथि समाप्‍त: 15 नवंबर 2020 को सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक
  • लक्ष्‍मी पूजा मुहुर्त: 14 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 28 मिनट से शाम 07 बजकर 24 मिनट तक
  • कुल अवधि: 01 घंटे 56 मिनट
दीवाली पूजन की सामग्री

लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, लक्ष्मी जी को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, लाल कपड़ा, सप्तधान्य, गुलाल, लौंग, अगरबत्ती, हल्दी, अर्घ्य पात्र, फूलों की माला और खुले फूल, सुपारी, सिंदूर, इत्र, इलायची, कपूर, केसर, सीताफल, कमलगट्टे, कुशा, कुंकु, साबुत धनिया (जिसे धनतेरस पर खरीदा हो), खील-बताशे, गंगाजल, देसी घी, चंदन, चांदी का सिक्का, अक्षत, दही, दीपक, दूध, लौंग लगा पान, दूब घास, गेहूं, धूप बत्ती, मिठाई, पंचमेवा, पंच पल्लव (गूलर, गांव, आम, पाकर और बड़ के पत्ते), तेल, मौली, रूई, पांच यज्ञोपवीत (धागा), रोली, लाल कपड़ा, चीनी, शहद, नारियल और हल्दी की गांठ।

लक्ष्‍मी पूजन की विधि

धनतेरस के दिन माता लक्ष्‍मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति खरीदकर दिवाली की रात उसका पूजन (Diwali Puja) किया जाता है।

मूर्ति स्‍थापना

सबसे पहले एक चौकी पर लाल वस्‍त्र बिछाकर उस पर मां लक्ष्‍मी और भगवान गणेश की प्रतिमा रखें। अब जलपात्र या लोटे से चौकी के ऊपर पानी छिड़कते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें। ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्‍थां गतोपि वा । य: स्‍मरेत् पुण्‍डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि: ।।

इसके बाद गंगा जल से आचमन करें। मां लक्ष्‍मी का ध्‍यान करें। मां लक्ष्‍मी का आवाह्न करें। हाथ में पांच पुष्‍प अंजलि में लेकर अर्पित करें। मां लक्ष्‍मी का स्‍वागत करें। मां लक्ष्‍मी को अर्घ्‍य दें। मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा को जल से स्‍नान कराएं। फिर दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण यानी कि पंचामृत से स्‍नान कराएं। आखिर में शुद्ध जल से स्‍नान कराएं। मां लक्ष्‍मी को मोली के रूप में वस्‍त्र अर्पित करें। मां लक्ष्‍मी को आभूषण चढ़ाएं। मां लक्ष्‍मी को सिंदूर चढ़ाएं। कुमकुम समर्पित करें।अब अक्षत चढ़ाएं।

मां लक्ष्‍मी को चंदन समर्पित करें। पुष्‍प समर्पित करें। बाएं हाथ में फूल, चावल और चंदन लेकर दाहिने हाथ से मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा के आगे रखें। अब मां लक्ष्‍मी को धूप, दीपक और नैवेद्य (मिष्‍ठान) समर्पित करें। फिर उन्‍हें पानी देकर आचमन कराएं। इसके बाद ताम्‍बूल अर्पित करें और दक्षिणा दें। फिर मां लक्ष्‍मी की बाएं से दाएं प्रदक्षिणा करें। मां लक्ष्‍मी को साष्‍टांग प्रणाम कर उनसे पूजा के दौरान हुई ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए माफी मांगे। इसके बाद मां लक्ष्‍मी की आरती उतारें

मां लक्ष्‍मी की आरती

मां लक्ष्‍मी की आरती
मां लक्ष्‍मी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

दुर्गा रूप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्‍गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

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