Reasons to Celebrate Diwali

Diwali 2020: भगवान राम के लिए ही नहीं, इन पौराणिक कारणों से भी बढ़ता है दिवाली का महत्व

New Delhi: दीवाली (Diwali 2020) समूचे भारत के सबसे खास त्योहारों में से एक है। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। हिन्दुओं में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं।

‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ यानि ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ यह उपनिषदों की आज्ञा है। दीवाली (Diwali 2020) सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। वहीं जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है।

कब मनाई जाती है दीपावली

दीपावली (Diwali 2020) त्यौहार कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। दीपोत्सव का यह पर्व 5 दिनों(धनतेरस, नरक चतुदर्शी, अमावश्या, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, भाई दूज) का होता है इसलिए यह धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर खत्म होता है। इसमें सबसे प्रमुख तीसरा दिन माना जाता है, इस दिन मां लक्ष्मी व भगवान गणेश की मुख्य पूजा की जाती है। दीपावली त्यौहार की तारीख हिन्दू कलेंडर के अनुसार निर्धारित होती है, लेकिन यह त्योहार सामान्यत: अक्तूबर – नवंबर महीने मे आता है।

क्यों मनायी जाती है दीपावली

दीपावली हिन्दूओं और कुछ अन्य धर्म के लोगों द्वारा भी मुख्य त्यौहार के रुप में हर साल मनाई जाती है। हिन्दुओं की मान्यता के अनुसार, दिवाली का त्यौहार मनाने के कई कारण हैं और यह पर्व मनुष्यों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हिन्दू मान्यता के अनुसार, दिवाली मनाने के बहुत सारे पौराणिक और ऐतिहासिक कारण है।

भगवान राम की विजय और अयोध्या आगमन

हिन्दू महाकाव्य रामायण के अनुसार, भगवान राम राक्षस राजा रावण को मारकर और पत्नी सीता को उसके बंधन से छुड़ाने के बाद भगवान राम, माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ अपने राज्य, अयोध्या, बहुत लम्बे समय(14 वर्ष) के बाद वापस आये थे। अयोध्या के लोग अपने सबसे प्रिय और दयालु राजा राम, उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के आने से बहुत खुश थे। इसलिये उन्होनें भगवान राम का लौटने का दिन अपने घर और पूरे राज्य को सजाकर, मिट्टी से बने दिये और पटाखे जलाकर मनाया।

देवी लक्ष्मी का जन्मदिवस

देवी लक्ष्मी धन और समृद्धि की स्वामिनी मानी जाती हैं। यह माना जाता है कि राक्षस और देवताओं द्वारा समुद्र मंथन के समय देवी लक्ष्मी दूध के समुद्र (क्षीर सागर) से कार्तिक महीने की अमावस्या को ब्रह्माण्ड में आयी थी। यही कारण है कि यह दिन माता लक्ष्मी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में दीपावली के त्यौहार के रूप में मनाना शुरू कर दिया गया।

भगवान विष्णु ने लक्ष्मी को बचाया

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक महान दानव राजा बाली था, जो सभी तीनों लोक (पृथ्वी, आकाश और पाताल) का मालिक बनना चाहता था, उसे भगवान से असीमित शक्तियों का वरदान प्राप्त था। पूरे विश्व में केवल गरीबी थी क्योंकि पृथ्वी का सम्पूर्ण धन राजा बाली द्वारा रोका हुआ था। भगवान के बनाए ब्रह्मांण्ड के नियम जारी रखने के लिए भगवान विष्णु ने सभी तीनों लोकों को बचाया था (अपने वामन यानि 5वें अवतार में) और देवी लक्ष्मी को उसकी जेल से छुडाया था। तब से, यह दिन बुराई की सत्ता पर भगवान की जीत और धन की देवी को बचाने के रूप में मनाया जाना शुरू किया गया।

भगवान कृष्ण ने नरकासुर को मार डाला

मुख्य दीपावली यानि दिवाली पर्व के तीसरे दिन से एक दिन पहले का दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि बहुत समय पहले, नरकासुर नाम का राक्षस राजा(प्रदोषपुरम में राज्य करता था)था, जो लोगों पर अत्याचार करता था और उसने अपनी जेल में 16000 औरतों को बंधी बना रखा था। भगवान कृष्ण (भगवान विष्णु के 8वें अवतार) उसकी हत्या करके नरकासुर की हिरासत से उन सभी महिलाओं की जान बचाई थी। उस दिन से यह बुराई सत्ता पर सत्य की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

राज्य में पांडवों की वापसी

हिंदू महाकाव्य महाभारत के अनुसार, निष्कासन के लम्बे समय(12 वर्ष) के बाद कार्तिक महीने की अमावस्या को पांडव अपने ऱाज्य लौटे थे। कोरवों से जुएं में हारने के बाद उन्हें 12 वर्ष के लिये निष्कासित कर दिया गया था। पांडवों के राज्य के लोग पांडवों के राज्य में आने के लिए बहुत खुश थे और मिट्टी के दीपक जलाकर और पटाखे जलाकर पांडवों के लौटने दिन मनाना शुरू कर दिया।

विक्रमादित्य का राज्याभिषेक

राजा विक्रमादित्य एक महान हिन्दू राजा का विशेष दिन पर राज्यभिषेक हुआ, तब लोगों ने दिवाली को ऐतिहासिक रुप से मनाना शुरु कर दिया।

आर्य समाज के लिए विशेष दिन

महर्षि दयानंद महान हिन्दू सुधारक के साथ साथ आर्य समाज के संस्थापक थे और उन्होंने कार्तिक के महीने में नया चांद(अमावश्या) के दिन निर्वाण प्राप्त किया। उस दिन से इस खास दिन के उपलक्ष्य में दीवाली के रूप में मनाया जा रहा है।

जैनियों के लिए विशेष दिन

तीर्थंकर महावीर, जिन्होंने आधुनिक जैन धर्म की स्थापना की, उन्हें इस विशेष दिन दिवाली पर निर्वाण की प्राप्ति हुई जिसके उपलक्ष्य में जैनियों में यह दिन दीवाली के रूप में मनाया जाता है।

मारवाड़ी नया साल

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, मारवाड़ी अश्विन की कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन पर महान हिंदू त्यौहार दीवाली पर अपने नए साल का जश्न मनाते है।

गुजरातियों के लिए नया साल

चंद्र कैलेंडर के अनुसार, गुजराती भी कार्तिक के महीने में शुक्ल पक्ष के पहले दिन दीवाली के एक दिन बाद अपने नए साल का जश्न मनाते है।

सिखों के लिए विशेष दिन

अमर दास (तीसरे सिख गुरु) ने दिवाली को लाल-पत्र दिन के पारंम्परिक रुप में बदल दिया जिस पर सभी सिख अपने गुरुजनों का आशार्वाद पाने के लिये एक साथ मिलते है। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की स्थापना भी वर्ष 1577 में दीवाली के मौके पर की गयी थी। हरगोबिंद जी (6 सिख गुरु) को वर्ष 1619 में मुगल सम्राट जहांगीर की हिरासत से ग्वालियर किले से रिहा किया गया था।

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