Tuesday, January 26, 2021
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Christmas 2020: एक अनाथ लड़का कैसे बना सेंटा क्‍लॉज? फिर शुरू हुआ खुशियां बांटने का सिलसिला

New Delhi: क्रिसमस (Christmas 2020) के बारे में चर्चा होते ही सबसे पहले दिमाग में जो छवि उभरकर आती है वह हैं सेंटा क्‍लॉज (Santa Claus)। क्रिसमस (Christmas Day 2020) पर खासकर बच्‍चों में सेंटा क्‍लॉज को लेकर खासा उत्‍साह रहता है।

उन्‍हें क्रिसमस (Christmas Day) के त्‍योहार का साल भर इंतजार रहता है कि सेंटा क्‍लॉज (Santa Claus)आएंगे और उन्‍हें उपहार देंगे। क्‍या आप जानते हैं कि कौन हैं यह सेंटा क्‍लॉज और कैसे शुरू हुई है गिफ्ट देने की परंपरा।

सेंट निकोलस हैं सेंटा क्‍लॉज

सेंटा क्‍लॉज की उत्‍पत्ति सेंट निकोलस से हुई है। सेंटा क्‍लॉज और जीसस के बीच कोई संबंध नहीं है। मगर फिर भी सेंटा क्‍लॉज क्रिसमस के सबसे जरूरी हिस्‍से में से एक हैं। सेंट निकोलस का जन्‍म तीसरी सदी (300 ईसा पूर्व) में तुर्किस्‍तान के मायरा नाम के शहर में हुआ था। जीसस की मृत्‍यु के करीब 280 साल बाद उनका जन्‍म हुआ था।

17 साल की उम्र में ही बन गए थे पादरी

सेंट निकोलस की जीसस में अटूट आस्‍था थी। माता-पिता की मृत्‍यु के बाद मॉनेस्‍ट्री में वह पले-बढ़े। 17 साल की उम्र ही उन्‍हें पादरी की उपाधि मिल गई। सेंट निकोलस स्‍वभाव से काफी दयालु थे। जरूरतमंदों की मदद करने के लिए वह सदैव आगे रहते थे। बच्‍चों को उपहार देते रहते थे। उनके इसी स्‍वभाव के कारण माना जाता है कि मृ’त्‍यु के बाद भी सेंटा क्‍लॉज क्रिसमस पर बच्‍चों को उपहार देंगे। तभी से यह परंपरा शुरू हो गई।

मृत्‍यु के बाद भी खत्‍म नहीं हुई परंपरा

सेंट निकोलस आधी रात को जब सब नींद में होते थे तब जाकर गरीबों के घर उपहार और उनके बच्‍चों के लिए खाने-पीने का सामान रख आया करते थे। उनकी मृ’त्‍यु के बाद भी लोगों ने इस परंपरा को खत्‍म नहीं होने दिया। तब से आम लोग उनकी तरह कपड़े पहनकर रात में बच्‍चों को उपहार देने लगे।

क्रिसमस पर ट्री सजाने की परंपरा

क्रिसमस पर ट्री सजाने की परंपरा जर्मनी में 8वीं शताब्‍दी से शुरू हुई। बोनिफेस नामक एक ईसाई धर्म के प्रचारक ने इसकी शुरुआत की थी। इसके बाद अमेरिका में 1912 में एक बच्‍चे के कहने पर उसके पिता ने क्रिसमस ट्री सजाया था। क्रिसमस ट्री से घर में पॉजिटिव एनर्जी आने के साथ ही वास्‍तु दोष भी दूर होता है।

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