Kargil Vijay Diwas: करगिल के ‘परमवीर’ योगेंद्र यादव, 17 गोली लगने के बाद भी लहराया तिरंगा

New Delhi: Yogendra Yadav the Hero of Kargil War: पूरा देश 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) के तौर पर मना रहा है। करगिल युद्ध में मरते दम तक लड़े भारतीय सैनिकों की वीरता की सैकड़ों कहानियां हैं, उन्हीं में से एक दास्तान योगेंद्र यादव की है।

योगेंद्र यादव को करगिल युद्ध में उनके पराक्रम के लिए युद्धकाल में देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार चक्र से सम्मानित किया गया था। योगेंद्र यादव उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर के औरंगाबाद अहीर गांव के हैं। आइए जानते हैं करगिल युद्ध की कहानी, खुद योगेंद्र यादव की जुबानी…

नवभारत टाइम्स मुताबिक, कारगिल युद्ध के हीरो और परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र यादव ने बताया कि युद्ध सैनिक ही नहीं बल्कि देश का हर शख्स लड़ता है। सीमा पर युद्ध जरूर जवान लड़ता है, लेकिन देश का नागरिक मानसिक और आर्थिक रूप से युद्ध लड़ते हैं।

बुलंदशहर के रहने वाले योगेंद्र यादव ने कारगिल युद्ध के मंजर को याद करते हुए बताया कि 18 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर दुश्मन घात लगाए बैठा था। दुश्मनों ने कभी नहीं सोचा था कि वह यहां से जिंदा बचकर वापस जा पाएंगे, लेकिन वे यह भूल गए कि भारत माता की धरती पर शेर और शेरनियां पैदा होती हैं।

‘दुश्मनों की आंख निकालने में सक्षम भारतीय सेना’

यादव ने कहा कि देश के जवान ऊंची पहाड़ियों को अपने खून से पावन कर ऊपर चढ़ते चले गए और दुश्मन का खात्मा किया। जवानों ने तोलोलिंग, टाइगर हिल, बटालिक चोटियों को फतह करते हुए विजय की गाथा लिखी।

योगेंद्र यादव कहते हैं कि आज देश की तीनों सेनाएं बहुत मजबूत स्थिति में हैं और दुश्मनों की आंख निकलने में पूरी तरह सक्षम हैं। अगर देश के सैनिक में एक भी सांस बाकी है तो वह मरते दम तक मातृभूमि को छोड़ता नहीं है।

टाइगर हिल का किस्सा

करगिल युद्ध के मंजर को याद करते हुए योगेंद्र यादव कहते हैं कि टाइगर हिल पर हम सात जवान दुश्मन से लोहा ले रहे थे। मैंने अपने 6 साथियों को अपने सामने खोया है। किसी के सिर में गोली लगी थी तो किसी के शरीर से खून की धार बह रही थी। मेरे शरीर में भी 17 गोलियां मारी गई थीं, लेकिन भारत माता को मुझे बचाना था।

चीन को लेकर योगेंद्र यादव ने कहा कि दुश्मन को हराने के लिए बुलेट के साथ वॉलेट की भी ताकत जरूरी होती है। हालांकि चीन को सबक सिखाने के लिए सरकार की ओर से भी कदम उठाने की जरूरत है।

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