पूर्व RBI गवर्नर उर्जित पटेल की किताब में कई खुलासे, पीयूष गोयल और सरकार की गिनाई गलतियां!

New Delhi: Urjit patel book shows diffrences with Piyush Goyal: भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा है कि तत्कालीन वित्त मंत्री के साथ उनका मतभेद दिवालिया मामलों को लेकर सरकार के फैसलों से शुरू हुआ, जिनमें काफी नरमी थी।

उर्जित पटेल (Urjit patel book shows diffrences with Piyush Goyal) ने ये बात अपनी नई किताब Overdraft — saving the Indian saver में लिखी है, जिसें उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिखा, लेकिन 2018 के मध्य के जिस वक्त की बात वह कर रहे हैं, वह वो दौर था जब पीयूष गोयल को कुछ वक्त के लिए वित्त मंत्री का कार्यभार सौंपा गया था। ये वक्त था मई 2018 से लेकर अगस्त 2018 के बीच का।

पीयूष गोयल पर उर्जित का निशाना!

पटेल ने अपनी किताब (Urjit patel book shows diffrences with Piyush Goyal) में लिखा है कि 2018 के मध्य में दिवालिया मामलों के लिए नरमी वाले फैसले लिए गए, जब अधिकतर कामों के लिए वित्त मंत्री और उर्जित पटेल मामलों से जुड़ी बातों को लेकर एक ही लेवल पर थे।

मई 2018 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली दिवालिया कानून का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन बीमारी की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल को वित्त मंत्री का कार्यभार सौंप दिया गया। 2018 में पीयूष गोयल ने मीडिया से बात करते हुए कहा सर्कुलर में नरमी लाने की बात कही और बोले कि किसी भी लोन को 90 दिनों के बाद एनपीए नहीं कहा जा सकता।

नोटबंदी पर नहीं कही कोई बात

उर्जित पटेल ने अपने पद से 8 महीने पहले ही इस्तीफा दे दिया था। उनकी किताब में कहीं थी भारतीय रिजर्व बैंक और इसके बोर्ड या वित्त मंत्रालय के बीच के रिश्तों को लेकर कोई बात नहीं कही गई है। वहीं 2016 में उर्जित पटेल के कार्यकाल के दौरान लागू की गई नोटबंदी का किताब में कहीं भी जिक्र नहीं किया गया है। उर्जित पटेल के कार्यकाल के दौरान करीब 10 लाख करोड़ रुपये के बैड लोन की रिकवरी की गई। पटेल ने अपनी किताब में लिखा है कि लगातार निगरानी होती रहनी चाहिए।

सरकार पर भी लगाए आरोप

उर्जित पटेल ने अपनी किताब में RBI के स्वामित्व में सरकार की प्रधानता और निर्देशों के आधार पर कर्ज देने को फाइनेंशियल सेक्टर की दिक्कतों में गिनाया है। उन्होंने सरकार और पब्लिक सेक्टर बैंकों के बीच के फासले को कम करने पर भी चेताया है और कहा है कि इससे सरकार का कर्ज और बढ़ सकता है।

उन्होंने रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को बेल आउट करने के लिए सरकार की ओर से शुरू किए गए SBI-LIC फंड को लाने पर भी चिंता जताई और कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मुद्रा क्रेडिट स्कीम ला देना पैसे ट्रांसफर करने जैसा ही है। बता दें कि वह LIC द्वारा IDBI बैंक के खरीदे जाने के खिलाफ थे, जिसकी घोषणा अगस्त 2018 में की गई थी।

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