PAK के लिए जासूसी कर रहे थे 3 शख्स, मिलिट्री इंटेलीजेंस और राजस्थान पुलिस ने की साजिश नाकाम

New Delhi: देश के खिलाफ पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले तीन रक्षाकर्मी जासूसों को (pakastani spy) गिरफ्तार कर लिया गया है।

अधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राजस्थान में यह बड़ी कार्रवाई पुलिस ने लखनऊ स्थित मिलिट्री इंटेलीजेंस (एमआई) द्वारा दिए गए खुफिया इनपुट के आधार पर की है। मिलिट्री इंटेलीजेंस और राजस्थान पुलिस ने सोमवार को तीन रक्षा कर्मियों (pakastani spy) को पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई को रणनीतिक सैन्य प्रतिष्ठानों के बारे में जानकारी देने के आरोप में पकड़ा है।

महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान से पकड़े गए तीन आरोपी

मिली जानकारी के अनुसार खुफिया इनपुट के आधार पर आर्मी अम्युनिशन डिपार्टमेंट के एक नागरिक सुरक्षा कर्मचारी विकास कुमार (29) और सेना के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के एक संविदा कर्मचारी चिमन लाल (22) और एक अन्य को इस संबंध में गिरफ्तार किया गया है।

यह तीनों पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के जासूसों के रूप में काम कर रहे थे। आपको बता दें कि श्रीगंगानगर में अम्युनिशन डिपो और बीकानेर में एमएमएफआर दोनों ही रणनीतिक रूप से भारत के पश्चिमी क्षेत्र में महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान हैं।

किया गया था हनीट्रेप

मिली जानकारी के अनुसार इन भारतीयों में से एक को सोशल मीडिया पर आईएसआई द्वारा ऑपरेट पाकिस्तानी महिला द्वारा हनीट्रैप किया गया था। अगस्त 2019 में एमआई लखनऊ को ग्राहकों के माध्यम से जासूसी एजेंट विकास कुमार के बारे में पता चला था, जो पाकिस्तान में अपने संचालकों को सैन्य जानकारी दे रहा था।

कुमार को मुल्तान की महिला पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (पीआईओ) ने फेसबुक के जरिए ट्रैप किया था। पीआईओ ने भारत की एक हिंदू महिला ‘अनुष्का चोपड़ा’ के नाम से फेसबुक अकाउंट चला ऱखा था।

गोला बारूद से लेकर हर महत्वपूर्ण जानकारी की जा रही थी लीक

एमआई यूनिट ने यह पता लगाया है कि कुमार ओरबेट (ऑर्डर ऑफ बैटल, कंपोजिशन एंड ऑर्डर ऑफ अ मिलिटरी फाइटिंग फॉर्मेशन), गोला-बारूद (फोटो, राज्य, मात्रा, प्रकार, आगमन, प्रस्थान) से संबंधित सैन्य जानकारी दे रहा था। इसके अलावा फायरिंग अभ्यास/मिलिट्री एक्सरसाइज के लिए आने वाली सैन्य इकाइयों के बारे में भी बताता था। इसके बदले उसने पैसे भी लिए थे।

भाई के नाम से हो रहा था पैसों को भुगतान

यह भी पाया गया कि कुमार को अपने तीन बैंक खातों और अपने भाई के बैंक खाते में भुगतान प्राप्त हो रहा था। एमआई की लखनऊ इकाई ने जनवरी, 2020 में उत्तर प्रदेश के आतंकवाद-रोधी दस्ते के साथ यह मामला साझा किया, जिसके बाद कुमार को ‘डेजर्ट चेज’ नामक ऑपरेशन कोड के तहत दोनों कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से निगरानी और विशलेषण में रखा जा रहा था।

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