चीन पर गरजे रविशंकर प्रसाद, बोले- याद रखना.. यह 1962 का नहीं 2020 का भारत है

New Delhi: भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में लंबे समय से जारी तनातनी के बीच केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद (ravishankar prasad) ने कहा कि चीन को याद रखना चाहिए कि 2020 है, 1962 नहीं।

उन्होंने (ravishankar prasad) कहा कि आज के भारत की अगुआई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे साहसी नेता के हाथ में है। भारत की तरफ आंख उठाने वाले उरी और बालाकोट में अपना हश्र देख चुके हैं।

रविशंकर प्रसाद ने हिमाचल जन संवाद वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए कहा कि भारत शांतिपूर्ण तरीके से विवादों का हल चाहता है। लेकिन भारत की तरफ कोई आंख उठाकर नहीं देख सकता है। उन्होंने कहा, ‘आज का भारत 2020 का भारत है, 1962 का नहीं। आज भारत का नेतृत्व नरेंद्र मोदी जैसे साहसिक नेता के हाथ में है, काग्रेस के नेताओं के हाथ में नहीं।’

उल्लेखनीय है कि भारत को 1962 में चीन के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था। चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने पूर्वी लद्दाख में दोनों सेनाओं के बीच चल रही तनातनी के बीच भारत को 1962 के युद्ध की याद दिलाई थी। दोनों देशों के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर तनाव कम करने के लिए सैन्य स्तर पर कई बातचीत हो चुकी हैं। 6 जून को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता के बाद चीन के तेवर कुछ नरम पड़े हैं लेकिन अब भी वह पुरानी स्थिति में लौटने को तैयार नहीं है।

राहुल गांधी को जवाब

इससे पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार से चीन सीमा पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी वही व्यक्ति हैं जिन्होंने बालाकोट एयर स्ट्राइक के भी सबूत मांगे थे।

उन्होंने कहा कि चीन से मुद्दे पर ट्विटर पर सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि चीन जैसे अतंरराष्ट्रीय मसलों पर ट्विटर पर सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘ये वही राहुल गांधी हैं जिन्होंने बालाकोट एयरस्ट्राइक और 2016 में उड़ी हमले पर सवाल पूछे थे।’

लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह और मेजर जनरल एम श्रीवास्तव समेत 9 पूर्व आर्मी अफसरों ने भी एक बयान जारी कर राहुल गांधी के बयानों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। इसमें कहा गया, ‘हम सीनियर आर्म्ड फोर्सेज वेटरंस के समूह के तौर पर गलत सोच से प्रभावित और गलत वक्त में दिए गए राहुल गांधी के बयानों और उनके ट्वीट्स की कड़ी निंदा करते हैं जिनके जरिए राहुल ने भारत-चीन सीमा विवाद से निपटने को लेकर हमारी सेना और सरकार पर सवाल उठाए हैं

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