दिल्ली पुलिस की तानाशाही पत्रकारों को भी किया गिरफ्तार

नई दिल्ली, 19 दिसंबर (वेबवार्ता). नागरिकता संशोधन कानून का देश भर में आज भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा. इन विरोध प्रदर्शनों पर विफल रही दिल्ली पुलिस ने झुंझलाहट में प्रदर्शनकारियों सहित पत्रकारों को भी गिरफ्तार कर लिया. इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस ने मरीजों को भी नहीं बख्शा.

नागरिकता संशोधन कानून के तहत देश की राजधानी दिल्ली में भी प्रदर्शन निरंतर जारी है. इस तुगलकी क़ानून के विरोध में आज दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किये गए. दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कारियों पर अंकुश लगाने की पूरी तैयारी कर रखी थी. इसके बाद भी प्रदर्शन कारियों के इरादे इतने मजबूत थे की दिल्ली पुलिस की सारी तैयारी विफल हो गई. झुंझलाहट में दिल्ली पुलिस ने आम आदमियों को तंग करना शुरू कर दिया. जिनका इन प्रदर्शनों से कुछ लेना देना भी न था. हद तक की प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकार को भी नहीं बख्शा.

 दिल्ली के पुलिस हेड क्वार्टर के बाहर छात्र प्रदर्शन कर रहे थे. प्रदर्शन को कवर करने वेबवार्ता समाचार एजेंसी के ब्यूरों चीफ इरशान सईद को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इरशान सईद ने पुलिस को बतलाया कि वे पत्रकार है लेकिन पुलिस ने एक न सुनी और पुलिसिया रौब व निहत्थे के साथ मारपीट एवं बदसलूकी की.

इसके बाद जबरन पुलिस ने हिरासत में लेकर बवाना में राजीव गांधी स्टेडियम ले गई. इस बात की खबर जब संस्थान को मिली तो दिल्ली पुलिस के पीआरओ इन्स्पेक्टर गोपाल कृष्ण को बताया. उन्होंने थाना आई पी एस्टेट के प्रभारी को इत्तिला दी. उन्होंने कहा कि आप बवाना चले जाइए वहां से तुरंत रिहा कर दिया जाएगा. पत्रकारों की एक टीम बवाना पहुंची. वहां तैनात डीसीपी गौरव शर्मा बार-बार रिहा करने और हद तक रिहा कर दिया गया है कहकर झूठ बोलते रहे.

वेबवार्ता समाचार एजेंसी का कार्यालय भी आईटीओ पर स्थित है. कार्यालय की चाभी भी ब्यूरों चीफ के पास ही रहती है. इसलिए आज कार्यालय भी नहीं खुल सका. जिस कारण आज वेबवार्ता समाचार एजेंसी समाचार भी जारी नहीं कर सकी. वेबवार्ता समाचार एजेंसी के सभी सब्स्क्राइबरों को असुविधा के लिए वेबवार्ता टीम खेद व्यक्त करती है.

गौरतलब है कि दिल्ली में इस नए कानून के खिलाफ प्रदर्शनकारियों की बढ़ती तादाद को देखते हुए दिल्ली मेट्रो के करीब 20 स्टेशन बंद करने पड़े. उधर, देश भर में जारी प्रदर्शनों के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई है. सूत्रों ने बताया कि लखनऊ में हुई हिंसा को लेकर सरकार बहुत चिंतित है. वहीं, दिल्ली में लाल किला समेत कई इलाकों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. इसकी वजह से राजीव चौक, मंडी हाउस समेत करीब 20 मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े. कई इलाकों में फोन, SMS और इंटरनेट सेवाएं भी बंद करवा दी गईं.

दिल्ली में तमाम प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता सीताराम येचुरी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी नेता डी. राजा, पटियाला (पंजाब) के पूर्व सांसद धरमवीर गांधी, दिल्ली के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित, स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव, स्वराज इंडिया की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष कर्नल जयवीर सिंह, त्रिलोकपुरी विधानसभा अध्यक्ष हसनैन अहमद शामिल थे.

गिरफ्तारी के दौरान योगेंद्र यादव ने अपनी एक तस्वीर के साथ ट्विटर पर एक पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, ”मुझे लाल किला से हिरासत में ले लिया गया. हजारों प्रदर्शनकारी पहले से ही हिरासत में है. अभी हजारों और भी बाकी है. हमें बताया जा रहा है कि हमें बवाना लेकर जाया जा रहा है. साझी विरासत, साझी शहादत, साझी नागरिकता.” हीं योगेन्द्र यादव के समर्थक बवाना स्थित राजीव गांधी स्टेडियम के बाहर मंजू लता यादव के नेत्रत्व में भारी संख्या में मौजूद थे. इस दौरान हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों ने योगेन्द्र यादव नेत्रत्व में राजीव गांधी स्टेडियम के अन्दर भी नागरिकता संशोधन कानून, पीएम मोदी, अमित शाह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

दिल्ली में आयसा एआईएसए के अध्यक्ष सुचेता डे, युवा छात्र नेता उमर खालिद, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के नेता नदीम खान तथा कांग्रेस नेता अजय माकन की पत्नी तथा बच्चों को भी हिरासत में लिया गया. उधर, बेंगलुरू में पुलिस ने इतिहासकार रामचंद्र गुहा सहित लगभग 30 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया.

इसके अतिरिक्त बिहार की राजधानी पटना में भी नागरिकता संशोधन कानून का विरोध हो रहा है, जबकि दरभंगा में कम्युनिस्ट संगठनों ने रेल रोक दी है. इसके अलावा बिहार के अन्य हिस्सों से भी इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की खबरें हैं.

गुजरात के अहमदाबाद में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विभिन्न वामदलों द्वारा बुलाए गए विरोध के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया. प्रदर्शनकारियों ने कथित रूप से पुलिस वाहन का रास्ता रोका था, और तब पुलिस को उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा.

देशभर में हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने एक आपात बैठक बुलाई है. इससे पहले, बुधवार शाम को प्रशासन ने दिल्ली, लखनऊ और बेंगलुरू में प्रदर्शन की इजाज़त देने से इंकार कर दिया था, जबकि मुंबई, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद, नागपुर, भुवनेश्वर, कोलकाता और भोपाल में प्रदर्शनों पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी.

वहीं, मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ होने जा रहे प्रदर्शन के चलते सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. दूसरी तरफ, किसी भी स्थिति से निपटने के लिए शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है.

लखनऊ में प्रदर्शन हिंसक हो गया. खासकर, पुराने लखनऊ में कई जगह आगजनी और तोड़फोड़ हुई है. पुलिस की गाड़ी समेत कई गाड़ियों में आग लगा दी गई. भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया है. संभल में भी हिंसक प्रदर्शन हुआ.

बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) लोकसभा में 9 दिसंबर, 2019 को पास होने के बाद 11 दिसंबर, 2019 को राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने पेश किया जहां एक लंबी बहस के बाद यह बिल पास हो गया. इस बिल के पास होने के बाद यह नागरिकता संशोधन कानून बन गया. इस कानून के विरोध में असम, बंगाल समेत देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए. 15 दिसंबर को इस कानून के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई. इस प्रदर्शन में कई छात्रों समेत पुलिस के कुछ जवान भी घायल हो गए.

जामिया की घटना के अगले दिन 16 दिसंबर, 2019 को नागरिकता संशोधन कानून को लेकर सीलमपुर में जमकर प्रदर्शन हुए. इस प्रदर्शन के दौरान पथराव की घटना हुई. स्‍कूली बस पर भी पत्‍थर फेंके गए. इस प्रदर्शन में कुछ प्रदर्शनकारियों समेत पुलिस वाले भी घायल हुए. एक पुलिस चौकी को प्रदर्शनकारियों ने जला दिया. पुलिस ने हालात को काबू में किया और वहां चौकसी बढ़ा दी गई. 17 दिसंबर को देश के दूसरे हिस्‍सों में भी प्रदर्शन शुरू हो गए.

जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों के समर्थन में देश के कई यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन हुए. कई यूनिवर्सिटी को 5 जनवरी, 2020 के लिए बंद कर दिया गया है और छात्रों से हॉस्‍टल खाली करा लिया गया. इस कानून के विरोध में दिल्‍ली के लाल किला पर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. उधर जामा मस्जिद के इमाम ने कहा है कि इस कानून से देश के मुसलमानों को कोई लेना देना नहीं है. उन्‍हें नहीं डरना चाहिए. विरोध प्रदर्शन को देखते हुए 19 दिसंबर, 2019 को देश के कई हिस्‍सों में धारा 144 लागू कर दी गई है.

उधर गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि चाहे जितना भी विरोध हो इस कानून को वापस नहीं लिया जाएगा. उनका कहना है कि यह कानून देश की जनता के लिए नहीं है, यह कानून उन अल्‍पसंख्‍यक लोगों के लिए है जो अफगानिस्‍तान, बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान में धार्मिक रूप से प्रताडि़त होकर भारत में शणार्थी के रूप में आए हैं.

 

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