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Thursday, December 8, 2022

नोटबंदी के खिलाफ याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा सप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। नोटबंदी मामले की सुनवाई बुधवार को होगी। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच को यह मामला रेफर किया गया था। केंद्र सरकार ने 500 और 1000 का नोट बंद कर दिया था जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 16 दिसंबर 2016 को संवैधानिक बेंच रेफर कर दिया था। अब जस्टिस एस अब्दुल नजीर, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एएश बोपन्ना, जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच मामले की सुनवाई बुधवार को करेगा।

उक्त संवैधानिक बेंच में पहला मामला नोटबंदी का मामला है। दूसरा मामला मिनिस्टर के अभिव्यक्ति के अधिकार और उसके अपवाद से संबंधित है। संवैधानिक बेंच के सामने तीन और मामले भी हैं। नोटबंदी के खिलाफ याचिका पहला मामला है जो संवैधानिक बेंच के सामने पेंडिंग है जिसकी सुनवाई कल हो सकती है।

क्या है यह मामला

नोटबंदी के बाद कई मामले देश भर की अदालतों में आ गए थे। तब तब सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की अदालतों में पेंडिंग तमाम नोटबंदी मामले की सुनवाई पर रोक लगा दी थी और मामले को पांच को रेफर कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की बेंच ने 9 सवाल तैयार किए थे जिन्हें पांच जजों की बेंच के सामने सुनवाई के लिए भेजा गया था।

क्या है याची की दलील
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से ये भी दलील दी गई थी कि सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करके प्रति हफ्ते 24 हजार रुपये निकाले जाने की इजाजत दी है लेकिन, ग्राउंड रियलिटी ये है कि ये भी नोट नहीं निकाले जा सकते क्योंकि नोट की कमी है। अटॉर्नी जनरल ने कहाथा कि 5 लाख करोड़ नई करंसी बैंकों के जरिये रिलीज की जा चुकी है और 50 दिनों तक मामला स्मूद हो जाएगा। सरकार की दलील थी कि टेरर फंडिंग और ब्लैक मनी पर लगाम के लिए ये कदम उठाए गए हैं। अब सिर्फ कुछ दिनों की बात है चीजें स्मूद हो जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संबंधित अथॉरिटी 24 हजार प्रति हफ्ते निकासी को सुनिश्चित कराए और समय-समय पर इस अमाउंट को रिव्यू करे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 9 सवाल तैयार किए थे जिन पर लार्जर बेंच सुनवाई करेगी। कोर्ट ने कहा कि ये मामला आम आदमी से जुड़ा है और ऐसे में लार्जर बेंच को मामला सौंपा जाता है।

सुप्रीम कोर्ट में जिन 9 सवालों पर होनी है सुनवाई

-क्या नोटबंदी का 8 नवंबर का नोटिफिकेशन और उसके बाद का नोटिफिकेशन असंवैधानिक है?

-क्या नोटबंदी संविधान के अनुच्छेद-300 (ए ) यानी संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है।

-नोटबंदी का फैसला क्या आरबीआई की धारा-26 (2) के तहत अधिकार से बाहर का फैसला है।

-क्या नोटबंदी मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। मसलन संविधानके अनुच्छेद-14 यानी समानता के अधिकार और अनुच्छेद-19 यानी आजादी के अधिकारों का उल्लंघन है?-

क्या नोटबंदी के फैसले को बिना तैयारी के लागू किया गया। करंसी का इंतजाम नहीं था और कैश लोगों तक पहुंचाने का इंतजाम नहीं है?

-क्या सरकार की इकोनॉमिक पॉलिसी के खिलाफ अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट दखल दे सकता है।

-बैंकों और एटीएम में पैसा निकासी का लिमिट तय करना लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है।

-डिस्ट्रिक्ट सहकारी बैंकों में पुराने नोट जमा करने और नए नोट निकालने पर रोक सही नहीं है?

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