पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के बढ़ते दाम पर शिवसेना का तंज- ‘मुफ्त गैस देने का क्या फायदा’

Webvarta Desk: भारत में पेट्रोल (Petrol Price Hike), डीजल और गैस सिलेंडर (LPG Price Hiked) के दामों ने आम आदमी का ‘तेल निकाल’ दिया है। तेल के बढ़ते दामों से जहां आम आदमी परेशान है, वहीं इस पर सियासत चरम पर है। इसी कड़ी में शिवसेना (Shivsena) ने अपने मुखपत्र सामना (Saamna) के जरिए सरकार पर जोरदार हमला किया है।
शाब्दिक दिलासा भी नहीं दे रही सरकार

शिवसेना (Shivsena) के मुख पत्र सामना (Saamna) में प्रकाशित संपादकीय में लिखा है कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने रविवार को कहा कि पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस के दाम मार्च-अप्रैल में कम होंगे। लेकिन, सोमवार को घरेलू एलपीजी गैस की कीमत 25 रुपए बढ़ गई। जनता को शाब्दिक दिलासा भी न मिलने पाए, ऐसा केंद्र सरकार ने तय कर लिया है क्या?

सामना (Saamna) में आगे लिखा है कि अब सरकार कहती है, पेट्रोलियम उत्पादक देशों को उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा गया है। इससे हिंदुस्तानी जनता को दर वृद्धि से राहत मिल सकेगी। दर वृद्धि नियंत्रण के इस तरीके को क्या कहा जाए?

शिवसेना (Shivsena) ने तंज कसते हुए आगे लिखा, तुमने कहा और तेल उत्पादक देश तुरंत कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा देंगे, ऐसा है क्या? इसकी बजाय जो तुम कर सकते हो वो करो। पहले कहा गया, ‘ठंडी थी इसलिए र्इंधन दर वृद्धि हुई, अब ठंडी कम हो गई इसलिए दर वृद्धि कम होगी?

कोरोना काल में 65 प्रतिशत महंगा हुआ ईंधन

सरकार पर निशाना साधते हुए शिवसेना (Shivsena) ने अपने संपादकीय में आगे लिखा है कि कोरोना संकट से लेकर अब तक देश की र्इंधन दर में लगभग 65 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस दर वृद्धि से जो अप्रत्यक्ष महंगाई आई, उसका क्या? यातायात खर्च में 40 प्रतिशत, लॉजिस्टिक्स खर्च 23 प्रतिशत, यात्रा खर्च और जीवनावश्यक वस्तुओं की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस कारण से महंगाई आसमान छूने लगी है।

मुफ्त गैस देने का क्या फायदा

शिवसेना (Shivsena) ने सामना (Saamna) में आगे लिखा है कि अगले एक साल में दो करोड़ मुफ्त गैस देने की बात सरकार कह रही है। लेकिन, सिलेंडर के लिए अगर ग्राहक को हजार रुपए गिनने पड़ेंगे तो कैसे काम चलेगा? मतलब पहले कीमत 100 रुपए से 200 तक होने देना और फिर दर को थोड़ा-सा कम करके ‘सस्ताई’ का ताव मारना।

संपादकीय में आगे लिखा गया कि थोड़े में कहे तो जनता से ‘कुम्हड़ा’ लेकर फिर थोड़ी दर कटौती का ‘आंवला’ जनता के हाथ में देने का काम शुरू है। तुम र्इंधन-गैस की दर कम कर सकते हो, पहले वो करो। नहीं तो कल यह दर वृद्धि भड़क उठेगी और उसमें कुम्हड़ा, आंवला और सब कुछ भस्म हो जाएगा, ये बात ध्यान में रखो।