बड़ी खबर! कृषि बिल पर नाराज चल रहे अकाली दल ने BJP को दिया बड़ा झटका, NDA से तोड़ा नाता

New Delhi: NDA हिमायती और पंजाब असेंबली में अपोज़ीशन का किरदार अदा कर रही शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने BJP का दामन छोड़ दिया है। SAD के सद्र सुखबीर सिंह बादल (Sukhbir Singh Badal) ने यह जानकारी दी है। दोनो पार्टियों में किसान बिल को लेकर अनबन चल रही थी।

सुखबीर सिंह बादल (Sukhbir Singh Badal) ने कहा है कि पंजाब मुखालिफ पार्टी के साथ हम इत्तेहाद नहीं रख सकते। इससे पहले अकाली दल (Shiromani Akali Dal) की लीडर हरसिमरत कौर (Harsimrat Kaur) ने भी इसी अनबन को लेकर मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। साथ ही पंजाब कांग्रेस भी SAD पर NDA से अलग होने का दबाव बना रही थी।

कांग्रेस का कहना था कि जब कैबिनेट मिनिस्टर के ओहदे से इस्तीफा दे दिया तो अकाली दल अभी भी NDA का हिस्सा क्यों है।

किसान बिल (Agriculture Bill 2020) को लेकर शिरोमणि अकाली दल की ओर से लगातार केंद्र से नाराजगी जताई जा रही थी। वहीं, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता सुखबीर सिंह (Sukhbir Singh Badal) ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में यह स्पष्ट कर दिया है कि अब उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा नहीं है।

सुखबीर सिंह बादल (Sukhbir Singh Badal) ने कहा कि यह पार्टी के कई सदस्यों की ओर से निर्णय लिया गया है। अब यह औपचारिक हो चुका है कि गठबंधन टूट चुका है।

शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) की ओर से कहा गया है कि ‘पार्टी ने एमएसपी पर किसानों की फसलों के सुनिश्चित विपणन की रक्षा के लिए वैधानिक विधायी गारंटी देने से मना करने के कारण भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन से अलग होने का फैसला किया है। पंजाबी और सिख मुद्दों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता भी इसकी एक वजह है।’

9 दिन पहले हरसिमरत कौर ने मोदी सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। अकाली दल ने लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल का विरोध किया था। भाजपा और अकाली दल पिछले 22 साल से साथ थे।

पार्टी में फूट से जूझ रहे अकाली दल के लिए मोदी सरकार के कृषि विधेयक गले की फांस बन गए थे, क्योंकि अगर पार्टी इनके लिए हामी भरती तो पंजाब के बड़े वोट बैंक यानी किसानों से उसे हाथ धोना पड़ता। पंजाब के कृषि प्रधान क्षेत्र मालवा में अकाली दल की पकड़ है।

अकाली दल को 2022 के विधानसभा चुनाव दिखाई दे रहे हैं। इस्तीफा देना मजबूरी भी बन गई थी। क्योंकि, चुनावों में अब लगभग डेढ़ साल ही बचा है। ऐसे में शिअद किसानों के एक बड़े वोट बैंक को अपने खिलाफ नहीं करना चाहती है।

इन 3 विधेयकों का विरोध हो रहा
  • फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फेसिलिटेशन) बिल
  • फार्मर्स (एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑफ प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज बिल
  • एसेंशियल कमोडिटीज (अमेंडमेंट) बिल

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