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अवमानना केस: SC ने वकील प्रशांत भूषण को नोटिस जारी किया, 5 अगस्त को अगली सुनवाई

New Delhi: अदालत की अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) को नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल की भी राय मांगी है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने न्यायपालिका और जजों के खिलाफ भूषण (Prashant Bhushan) के आपत्तिजनक ट्वीट्स का स्वतः संज्ञान लेकर अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। इस मामले में अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भूषण के ट्वीट्स का स्वतः संज्ञान लेते हुए मंगलवार को उनके और ट्विटर इंडिया के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की। बुधवार को जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने इसकी सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) को नोटिस जारी कर उन्हें अपना पक्ष रखने को कहा है।

क्या होता है क्रिमिनल कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट?

कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट ऐक्ट, 1971 के मुताबिक अदालत की अवमानना तो तरह की हो सकती है- सिविल कंटेंप्ट या क्रिमिनल कंटेंप्ट। प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) के खिलाफ मौजूदा कार्यवाही आपराधिक अवमानना यानी क्रिमिनल कंटेंप्ट के तहत की जा रही है।

अगर कोई शख्स अदालत अदालत के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देता है या उसकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश करता है या उसके मान सम्मान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है या अदालती कार्यवाही में दखल देता है या खलल डालता है तो यह क्रिमिनल कंटेप्ट ऑफ कोर्ट का मामला होता है।

इस तरह की हरकत चाहे लिखकर की जाए या बोलकर या फिर अपने हाव-भाव से ऐसा किया जाए ये तमाम हरकतें कंटेप्ट ऑफ कोर्ट के दायरे में होंगी। ऐसे मामलों में अदालत स्वतः संज्ञान ले सकती है या जब उसकी जानकारी में यह मामला आए तो ऐसा करने वालों को अदालत नोटिस जारी कर सकती है।

न्यायपालिका के फैसलों पर काफी मुखर रहे हैं भूषण

प्रशांत भूषण न्यायपालिका पर लगातार टिप्पणियां कर रहे हैं। वह कोविड-19 महामारी में प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ काफी मुखर रहे और उनकी तीखी आलोचना करते रहे।

27 जून के एक ट्वीट में प्रशांत भूषण ने लिखा, ‘जब भविष्य में इतिहासकार यह देखने के लिए पिछले 6 साल पर नजर डालेंगे कि कैसे आपातकाल की औपचारिक घोषणा के बिना भारत में लोकतंत्र को कुचल दिया गया है तो वो इस बर्बादी में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका का विशेष जिक्र करेंगे और खासकर पिछले चार मुख्य न्यायाधीशों की भूमिका का।’

ट्वीट्स को लेकर घिरे मुश्किल में

उन्होंने जेल में बंद भीमा कोरेगांव की घटना के आरोपियों वर्वरा राव और सुधा भारद्वाज के इलाज को लेकर भी कड़े बयान दिए। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्रशांत भूषण के किस/किन ट्वीट/ट्विट्स को सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की अवमानना के दायरे में रखा। रिकॉर्ड्स में भी इसकी जानकारी नहीं दी गई है कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के खिलाफ यह कार्रवाई क्यों की है?

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