Rudram Missile: देश की पहली ऐंटी रेडिएशन मिसाइल रूद्रम-1 खासियत देख चीन-PAK हैरान

New Delhi: भारत ने पहली स्‍वदेशी ऐंटी-रेडिएशन मिसा’इल (Anti Radiation Missile), रूद्रम-1 (Rudram-1) का सफल टेस्‍ट किया है। डिफेंस रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की बनाई यह मिसा’इल सुखोई-30 से छोड़ी गई। यह मिसा’इल टेस्‍ट भारतीय वायुसेना के लिए था।

देश की पहली न्‍यू जेनेरेशन ऐंटी रेडिएशन मिसाइल (NGARM) का लॉन्‍च प्‍लेटफॉर्म फिलहाल सुखोई ही है। मगर इसे जगुआर, मिराज 2000 और तेजस के साथ लॉन्‍च करने लायक भी बनाया जा रहा है। यह मिसाइल (Rudram-1) बेहद खास है जिसे अपना निशाना खोजने में महारत हासिल है। आइए जानते हैं भारत की पहली NGARM रूद्रम-1 के बारे में।

क्‍या होती है ऐंटी रेडिएशन मिसा’इल?

ये वो मिसाइलें (Rudram-1) होती हैं जिन्‍हें बनाया ही दुश्‍मन के कम्‍युनिकेशन सिस्‍टम को ध्‍व’स्‍त करने के लिए है। ये दु’श्‍म’न के रडार, जैमर्स और यहां तक कि बातचीत के लिए इस्‍तेमाल होने वाले रेडियो के खिलाफ भी यूज हो सकती हैं। इन मिसाइलों का इस्‍तेमाल किसी सं’घर्ष के शुरुआती दौर में होता है।

इसके अलावा ये मिसा’इलें अचानक आने वाली जमीन से हवा में मा’र करने वाली मिसा’इलों के खिलाफ भी छोड़ी जा सकती हैं। इन मिसा’इल्‍स में सेंसर्स लगे होते हैं जो रेडिएशन का सोर्स ढूंढते हैं। उसके पास जाते ही मिसा’इल फट जाती है।

रूद्रम-1 में क्‍या है खास?
  • NGARM में प्राइमरी गाइडेंस सिस्‍टम के तौर पर ऑन-बोर्ड पैसिव होमिंग हेड (PHH) दिया है जो ब्रॉडबैंड क्षमता से लैस है। इससे मिसा’इलों को एमिटर्स में से अपना टारगेट चुनने की काबिलियित मिलती है। नई NGRAM D-J बैंड के बीच ऑपरेट करती है और 100 किलोमीटर की दूर से पता लगा सकती है कि रेडियो फ्रीक्‍वेंसी कहां से आ रही है।
  • रूद्रम-1 (Rudram-1) टारगेट को ढूंढने वाली मिसा’इल है। इसमें एक रडार डोम भी है। इसकी मदद से जमीन पर मौजूद दु’श्‍म’न के रडार को ध्‍व’स्‍त किया जा सकता है।
  • रूद्रम मिसा’इल (Rudram-1) 100 से 250 किलोमीटर की रेंज में किसी भी टारगेट को उड़ा सकती है।
  • इसे बनाया सुखोई Su-30MKI पर टेस्‍ट करने के लिए है। लेकिन भविष्‍य में इसे मिराज 2000, जगुआर, HAL तेजस और HAL तेजस मार्क 2 के साथ भी यूज किया जा सकता है।
  • मिसाइल की लंबाई करीब साढ़े पांच मीटर है और वजन 140 किलो है।
  • रूद्रम-1 से दु’श्‍म’न के एयर डिफेंस सिस्‍टम के साथ-साथ उन रडार स्‍टेशंस को भी उड़ाया जा सकता है जो डिटेक्‍शन से बचने के लिए खुद को शटडाउन कर लेते हैं।

3 अक्‍टूबर: शौर्य’ मिसा’इल का सफल टेस्‍ट हुआ। यह मिसा’इल पनडुब्‍बी से छोड़ी जाने वाली BA-05 मिसा’इल का जमीनी रूप है। मिसा’इल 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर मैच 7 या 2.4 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से चलती है। रफ्तार इतनी तेज है कि सीमा पार बैठे दुश्‍मन के रडार को इसे डिटेक्‍ट, ट्रैक करने और इंटरसेप्‍ट करने के लिए 400 सेकेंड्स से भी कम का वक्‍त मिलेगा।

23 सितंबर: MBT अर्जुन टैंक से लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (AGTM) का टेस्‍ट फा’यर किया गया। मिसा’इल ने 3 किलोमीटर दूर टारगेट पर एकदम सटीक वार किया और उसे ध्‍वस्‍त कर दिया।

7 सितंबर: हाइपरसोनिक स्‍क्रैमजेट टेक्‍नोलॉजी का प्रदर्शन किया गया। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा ऐसा देश बन गया जिसने खुद की हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी विकसित कर ली। बालासोर में हाइपरसोनिक टेक्‍नॉलजी डिमॉन्‍स्‍ट्रेटर वीइकल (HSTDV) टेस्‍ट को अंजाम दिया। यह हवा में आवाज की गति से छह गुना ज्‍यादा स्पीड से दूरी तय करता है। यानी दु’श्‍म’न देश के एयर डिफेंस सिस्‍टम को इसकी भनक तक नहीं लगेगी।

22 जुलाई: थर्ड जेनेरेशन ऐंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल ‘ध्रुवास्त्र’ का टेस्‍ट हुआ। यह ‘नाग हेलीना’ (HELINA) का हेलीकॉप्टर संस्करण है। इसके जरिए आसमान से सीधे दाग कर दु’श्म’न के बंकर, बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों को तबाह किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *