चीन को सबक, पड़ोसियों से कैसे रिश्ते.. विजयादशमी पर PM मोदी को भागवत के 10 बड़े संदेश

New Delhi: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagawat) ने विजयादशमी (Vijayadashmi or Dussera 2020) के अवसर पर अपने संबोधन में समसामयिक मुद्दों का जिक्र किया।

नागपुर मुख्यालय के महर्षि व्यास ऑडिटोरियम में स्थापना दिवस के अवसर पर संघ प्रमुख (Mohan Bhagawat) ने देश के पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को कोरोना संक्रमण, चीन के साथ विवाद, किसान संबंधी नीति, CAA जैसे अहम मसलों को लेकर संदेश दिया।

कोरोना को लेकर सही समय पर फैसले

सरकार की तरफ से सही समय पर उठाए गए कदमों की वजह से भारत को कोरोना के मामले में अन्य देशों की तुलना में कम नुकसान हुआ। विश्व के अन्य देशों की तुलना में हमारा भारत संकट की इस परिस्थिति में अधिक अच्छे प्रकार से खड़ा हुआ दिखाई देता है। भारत में इस महामारी की विनाशकता का प्रभाव बाकी देशों से कम दिखाई दे रहा है, इसके कुछ कारण हैं।

पड़ोसियों के साथ सुधारें अपने संबंध

RSS प्रमुख भागवत (Mohan Bhagawat) ने कहा- पड़ोसी देश श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश ये हमारे पड़ोसी ही नहीं, हजारों सालों से हमसे संबंधित हमारे स्वभाव वाले देश हैं। इनके साथ हमें संबंध प्रगाढ़ करने होंगे। मनमुटाव दूर करने का प्रयास और तेजी से करना होगा। मतभेद तो होते रहते हैं।

चीन को सबक, लेकिन नजर बनाए रखना होगा

मोहन भागवत (Mohan Bhagawat) ने सेना के पराक्रम पर बोलते हुए कहा कि हमारी सेना की अटूट देशभक्ति और अदम्य वीरता, हमारे शासनकर्ताओं का स्वाभिमानी रवैया तथा हम सब भारत के लोगों के दुर्दम्य नीति-धैर्य का परिचय चीन को पहली बार मिला है। इस बार भारत ने उसको जो प्रतिक्रिया दी, उसके कारण वह सहम गया। उसको धक्का मिला क्योंकि भारत तन कर खड़ा हो गया। लेकिन ऐसा नहीं है कि इसके बाद हम लापरवाह हो जाएं। ऐसे खतरों पर नजर बनाए रखनी होगी।

CAA की आड़ में हिं’सा-विद्वे’ष की साजिश

सीएए पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा, ‘कुछ पड़ोसी देशों से सांप्रादायिक कारणों से प्रता’ड़ित होकर विस्थापित किए जाने वाले बंधु, जो भारत में आएंगे उनको मानवता के हित में शीघ्र नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान था। उन देशों में सांप्रदायिक प्रता’ड़ना का इतिहास है। भारत के इस नागरिकता संशोधन अधिनियम कानून में किसी संप्रदाय विशेष का विरोध नहीं है।’

भागवत ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को आधार बनाकर समाज में विद्वे’ष और हिं’सा फैलाने का षडयंत्र चल रहा है। इस कानून को संसद से पूरी प्रक्रिया से पास किया गया। इस षडयंत्र में शामिल लोग मुसलमान भाइयों के मन में यह बैठाने का प्रयास कर रहे हैं कि वे अब भारत में नहीं रहेंगे। आपकी संख्या न बढ़े इसके लिए कानून बनाई गई, यह बात फैलाया गया।

टुकड़े-टुकड़े गैंग कर रहा है षड्यंत्र

टुकड़े-टुकड़े गैंग का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा- भारत की विविधता के मूल में स्थित शाश्वत एकता को तोड़ने का घृणित प्रयास, हमारे तथाकथित अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को झूठे सपने तथा कपोलकल्पित द्वेष की बातें बता कर चल रहा है।’भारत तेरे टुकड़े होंगे’ ऐसी घोषणाएं देने वाले लोग इस षड्यंत्रकारी मंडली में शामिल हैं। राजनीतिक स्वार्थ, कट्टरपन और अलगाव की भावना, भारत के प्रति शत्रुता तथा जागतिक वर्चस्व की महत्वाकांक्षा, इनका एक अजीब सम्मिश्रण भारत की राष्ट्रीय एकात्मता के विरुद्ध काम कर रहा है।

राम मंदिर फैसले को सबने किया स्वीकार

राम मंदिर फैसले पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा, ‘9 नवंबर को रामजन्मभूमि के मामले में अपना निर्णय देकर सर्वोच्च न्यायालय ने इतिहास बनाया। भारतीय जनता ने इस निर्णय को संयम और समझदारी का परिचय देते हुए स्वीकार किया।’

स्वदेशी कृषि नीति की जरूरत

हमारा कृषि का अनुभव गहरा व्यापक और सबसे लंबा है। इसलिये उसमें से कालसुसंगत, अनुभवसिद्ध, परंपरागत ज्ञान तथा आधुनिक कृषि विज्ञान से देश के लिए उपयुक्त और सुपरीक्षित अंश, हमारे किसान को अवगत कराने वाली नीति हो। कृषि नीति का हम निर्धारण करते हैं, तो उस नीति से हमारा किसान अपने बीज स्वयं बनाने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। हमारा किसान अपने को आवश्यक खाद, रोगप्रतिकारक दवाइयां और कीटनाशक स्वयं बना सके या अपने गांव के आस-पास पा सके यह होना चाहिए।

वोकल फॉर लोकल पर ध्यान जरूरी

वोकल फॉर लोकल अच्छी पहल है। लेकिन सका क्रियान्वयन पूरा करना पड़ेगा। बारीकी से ध्यान रखना पड़ेगा। यह स्वदेशी संभावनाओं वाला उत्तम प्रारंभ है। परन्तु इन सबका यशस्वी क्रियान्वयन पूर्ण होने तक बारीकी से ध्यान देना पड़ेगा। इसलिए ‘स्व’ या ‘आत्मतत्त्व’ का विचार इस व्यापक परिप्रेक्ष्य में सबको आत्मसात करना होगा। तभी उचित दिशा में चलकर यह यात्रा यशस्वी होगी।

नई शिक्षा नीति का स्वागत किया

विजयादशमी पर अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा, ‘अर्थ, कृषि, श्रम, उद्योग तथा शिक्षा नीति में स्व को लाने की इच्छा रख कर कुछ आशा जगाने वाले कदम अवश्य उठाए गए हैं। व्यापक संवाद के आधार पर एक नई शिक्षा नीति घोषित हुई है। उसका संपूर्ण शिक्षा जगत से स्वागत हुआ है, हमने भी उसका स्वागत किया है।’

रोजगार के अवसर पैदा करना चुनौती

आरएसएस प्रमुख ने रोजगार के मामले पर कहा- महामारी के कारण रोजगार के नए कौशल और रोजगार के अवसर पैदा करना एक चुनौती है।

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