RLD प्रमुख Ajit Singh का कोविड-19 से निधन

Ajit Singh

नई दिल्ली, 06 मई (वेबवार्ता)। राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह (Ajit Singh) का बृहस्पतिवार को गुरुग्राम में कोरोना वायरस (Corona Virus) के संक्रमण की वजह से निधन हो गया। परिवार ने यह जानकारी दी। वह 82 साल के थे। परिवार ने एक बयान में बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजित सिंह 20 अप्रैल को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे।

उनके बेटे जयंत चौधरी ने ट्वीट कर बताया, ‘‘चौधरी अजित सिंह (Ajit Singh) 20 अप्रैल को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। उन्होंने आखिर तक इस महामारी से मुकाबला किया और आज सुबह, छह मई 2021 को आखिरी सांस ली।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अपने पूरे जीवनकाल में चौधरी साहब (Ajit Singh) को आपका भरपूर प्यार और सम्मान मिला। आप सभी के साथ यह संबंध उनके लिए प्रिय थे और उन्होंने आपके कल्याण के बारे में हमेशा सोचा और कोशिश की।’’

जयंत चौधरी ने कहा, ‘‘हमारा देश भयावह महामारी से गुजर रहा है। इसलिए मेरा उन सभी से अनुरोध है जो उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने को इच्छुक हैं, कृपया अपने घरों में रहें। हम सभी सुरक्षा नियमों का अनुपालन करें ताकि हम खुद और आसपास के सभी लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहें। यह चौधरी साहब (Ajit Singh) के प्रति बेहतरीन सम्मान होगा और साथ-साथ कोरोना योद्धाओं के लिए भी, जो दिन रात हमारी रक्षा के लिए काम कर रहे हैं।’’

परिवार की ओर से जारी बयान में जयंत चौधरी ने कहा, ‘‘हम उन सभी परिवारों को सांत्वना देने के लिए प्रार्थना करते हैं जो इस क्रूर बीमारी से प्रभावित हुए हैं।’’ चौधरी अजित सिंह (Ajit Singh) के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, समाजवादी पार्टी प्रमुख आखिलेश यादव और अन्य नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया है।

बता दें कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे चौधरी अजित सिंह (Ajit Singh) उत्तर प्रदेश के बागपत से सात बार सांसद रहे और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री भी रह चुके हैं। उनके निधन के बाद पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शोक की लहर है। अजित सिंह (Ajit Singh) और उनके परिवार की जाट समाज में काफी पैठ रही है। पिछले दो लोकसभा चुनाव और 2 विधानसभा चुनाव के दौरान रालोद का ग्राफ तेजी से गिरा। यही वजह है कि वे अपने गढ़ बागपत से भी लोकसभा चुनाव हार गए। हालांकि किसान आंदोलन के बाद से अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी एक बार फिर पश्चिमी यूपी में अपनी धाक जमाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।

दो दिन से आर्टिमिस में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे अजित सिंह
आरएलडी के मुखिया चौधरी अजित सिंह (Ajit Singh) बीते 22 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हुए थे। इसके बाद से ही धीरे-धीरे उनके फेफड़ों में संक्रमण बढ़ता चला गया। मंगलवार(4 मई) को जब उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई तो उन्हें गुरुग्राम के आर्टिमिस अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह बीते दो दिन से वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। गुरुवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे
वर्ष 1986 में राज्यसभा सदस्य के तौर पर अजित सिंह (Ajit Singh) ने संसद में प्रवेश किया था और सात बार लोकसभा सदस्य भी रहे। 1987 में उन्होंने पहला फैसला लिया था जब उन्होंने लोक दल (अजित) के नाम से लोक दल के अलग गुट का निर्माण किया था। उनके इस फैसले के बाद लोकदल का जनाधार बढ़ा और कई पार्टियों के विलय से बनाई गई जनता पार्टी का उनको अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

इसके बाद जनता पार्टी, लोक दल और जन मोर्चा के विलय के साथ जनता दल का गठन हुआ तब चौधरी अजित सिंह (Ajit Singh) ही इसके महासचिव चुने गए। विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में चौधरी अजित सिंह 1989-90 तक केंद्रीय उद्योग मंत्री रहे। चौधरी अजित सिंह का करिश्मा ऐसा था कि किसी बड़ी पार्टी के नेता न होकर भी वह पश्चिम यूपी की राजनीति में वजन रखते थे।

1999 में किया आरएलडी का गठन
1998 में अजित सिंह (Ajit Singh) को पहली बार बागपत लोकसभा सीट से बीजेपी नेता सोमपाल सिंह शास्त्री से हार मिली थी। 1999 में अजित सिंह ने राष्ट्रीय लोकदल का निर्माण किया। जुलाई 2001 के आम-चुनावों में इस दल का एनडीए में विलय हो गया। अजित सिंह को कैबिनेट मंत्री के तौर पर कृषि मंत्रालय का पदभार सौंपा गया लेकिन गठबंधन ज्यादा दिन नहीं चल सका। मुलायम सिंह यादव के सत्ता में आने के बाद अजित सिंह ने 2007 तक उन्हें अपना समर्थन दिया लेकिन किसान नीतियों में मतभेद के चलते उन्होंने अपना समर्थन वापस ले लिया।

मुजफ्फरनगर दंगों ने बदली पश्चिम यूपी की राजनीति
सत्त पक्ष में रहकर चौधरी अजित सिंह (Ajit Singh) हरित प्रदेश की लडाई लड़ते रहे। वह चाहते थे कि अगर पश्चिम को हरित प्रदेश बना दिया जाता है तो उनको सत्ता से कोई नहीं हटा सकता। एक तो यह क्षेत्र जाट बहुल क्षेत्र था, दूसरा इस क्षेत्र को आरएलडी का गढ़ कहा जाता था लेकिन मुजफ्फरनगर के दंगों ने यहां की राजनीति के समीकरण बदल दिए। 2014 लोकसभा चुनाव में बागपत से अजित सिंह को दूसरी बार हार झेलनी पड़ी। 2019 में उन्होंने मुजफ्फरनगर सीट चुनी लेकिन यहां भी उन्हें शिकस्त मिली।