PM मोदी को खरीखोटी सुनाने वाले राहुल गांधी भूल गए नेहरू की करनी, चीन को दी थी 37000 वर्ग KM जमीन

Webvarta Desk: राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एलएसी पर भारत और चीन के सैनिकों के पीछे हटने (India China Border Disengagement) को लेकर पीएम मोदी पर सीधे-सीधे चीन से डरने का आरोप लगाया है।

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने हिंदुस्तान की जमीन चीन को पकड़ाई है यह सच्चाई है। मोदी इसका जवाब दें। मोदी जी ने चीन के सामने सिर झुका दिया है। जो रणनीतिक क्षेत्र है जहां चीन अंदर आकर बैठा है उसके बारे में रक्षा मंत्री ने एक शब्द नहीं बोला। दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि चीन को भारत की एक इंच भी जमीन नहीं दी गई है।

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के आरोप पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि इस बारे में उन्हें जवाहर लाल नेहरू से पूछना चाहिए जिन्होंने भारत की जमीन चीन को दे दी थी। रेड्डी ने कहा कि कौन देशभक्त है और कौन नहीं जनता को सब पता है।

राहुल (Rahul Gandhi) ने पीएम मोदी (PM Narendra Modi) को तो इस मुद्दे पर सुना दिया पर वह ये भूल गए की चीन ने जब भारत की करीब 38 हजार वर्ग किलोमीटर की जमीन कब्जाई थी उस समय जवाहर लाल नेहरू ही देश के प्रधानमंत्री थे। चीन के कब्जे में भारत की कितनी जमीन है और भारत और चीन के बीच अक्साई चीन को लेकर विवाद का क्या इतिहास है।

43 हजार वर्ग किलोमीटर पर है चीन का अवैध कब्जा

चीन सेना के ग्राउंड सिचुएशन की जानकारी देते हुए राजनाथ ने कहा कि1962 के संघर्ष में चीन ने अनधिकृत तरीके से लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेश की करीब 38 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि कब्जाई थी। इसके अलावा पाकिस्तान ने अनधिकृत तरीके से पाक अधिकृत कश्मीर में भारत की 5180 वर्ग किलोमीटर भूमि को चीन को दे दिया है।

यह जमीन पाकिस्तान ने सीमा समझौते के तहत चीन को सौंपी थी। इस तरह चीन का 43 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक भारत की जमीन पर अवैध कब्जा है। चीन पूर्वी क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश में करीब 90 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि को अपना बताया है। भारत ने इस अवैध कब्जे को कभी भी स्वीकार नहीं किया है। 1962 में जब चीन ने भारत की 38 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन कब्जाई तो उस समय जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे।

जब नेहरू ने अक्साई चीन को बताया था निर्जन इलाका

अक्टूबर 1957 और फरवरी 1958 के बीच चीनी सैनिकों के टुकड़ी की अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की खबरें थीं। यह इलाका भारतीय सीमा के भीतर था। इनसब के बीच 28 अगस्त, 1959 को लोकसभा में एक बयान देते हुए नेहरू ने कहा कि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी लद्दाख में एक बड़ा क्षेत्र है जो व्यावहारिक रूप से निर्जन है। यह पहाड़ी है, और यहां तक कि घाटियां भी आमतौर पर 13,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर हैं। चरवाहे गर्मियों के महीनों में इसका इस्तेमाल पशुओं को चराने के लिए करते हैं। इस क्षेत्र में भारत की कुछ पुलिस चौकियां हैं।

क्या है मौजूदा समझौता

मौजूदा समझौते के मुताबिक दोनों देश पूर्वी लद्दाख में पैंगोग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर पर तैनात सैनिकों और युद्धक साजोसामान को फेज वाइज हटाएंगे। चीन अपने सैनिकों को फिंगर 8 से पीछे करेगा और भारत के सैनिक फिंगर 3 के पीछे अपने परमानेंट बेस धन सिंह थापा पोस्ट पर जाएंगे। फिंगर 4 से फिंगर 8 तक नो मैन्स लैंड है।

पहले यहां भारत और चीन दोनों देशों के सैनिक पट्रोलिंग करते थे। दोनों देश परंपरागत स्थानों की पट्रोलिंग अस्थाई तौर से स्थगित रखेंगे। पेट्रोलिंग तभी शुरू की जाएगी, जब सेना और राजनयिक स्तर पर आगे बातचीत करके समझौता होगा।