अंबाला में तैनात किए जाएंगे भारतीय वायुसेना के 5 राफेल लड़ाकू विमान

New Delhi: इंडियन एयरफोर्स के मुताबिक राफेल विमान (Rafale Jet) की पहली खेप जोकि पांच विमानों की होगी, जुलाई के आखिरी दिनों में भारत पहुंच सकती है।

29 जून को इन विमानों (Rafale Jet) को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में रखा जाएगा। इसके बाद आगे तय होगा कि इन विमानों को कहां तैनात करना है। फिलहाल 22 जुलाई से एयरफोर्स कमांडर्स की बैठक भी होने वाली है।

मौसम चाहे कोई हो…राफेल का निशाना अचूक है

भारत को हवा का ‘ब्रह्मास्‍त्र’ हासिल होने जा रहा है। फ्रांस के घातक लड़ाकू विमान राफेल (Rafale Jet) की पहली खेप इस हफ्ते भारत पहुंच रही है। खबर है कि चीन से तनातनी को देखते हुए राफेल को लद्दाख सेक्‍टर में तैनात किया जा सकता है।

पहले चार (Rafale Jet) विमान ही आने वाले थे मगर एयरफोर्स की रिक्‍वेस्‍ट पर फ्रांस ने पांच राफेल आखिरी जुलाई तक देने को कहा है। लद्दाख में भारत दिन हो या रात, सर्दी हो या बारिश, हर मौसम में हर वक्‍त हमला करने की क्षमता डेवलप कर रहा है। राफेल इसमें उसका बड़ा हथियार साबित होगा।

हवा से हवा में मार करने वाली बियांड विजुअल रेंज मिसाइल से लैस

भारत को मिलने वाला राफेल विमान (Rafale Jet) हवा से हवा में मार करने वाली बियांड विजुअल रेंज मिसाइल से लैस होगा। यह मिसाइल दुश्मन के प्लेन को बिना देखे सीधे फायर किया जा सकता है। इसमें एक्टिव रडार सीकर लगा होता है जिससे मिसाइल को किसी भी मौसम में फायर किया जा सकता है। वहीं, स्कैल्प मिसाइल या स्ट्रॉम शैडो किसी भी बंकर को आसानी से तबाह कर सकती है। इसकी रेंज लगभग 560 किमी होती है।

दुश्मन का खात्मा मिनटों में…धोखा दिया तो होगा उल्टा वार

राफेल (Rafale Jet) में बहुत ऊंचाई वाले एयरबेस से भी उड़ान भरने की क्षमता है। चीन और पाकिस्‍तान से लगी सीमा पर ठंडे मौसम में भी विमान तेजी से काम कर सकता है। मिसाइल अटैक का सामना करने के लिए विमान में खास तकनीक का प्रयोग किया गया है। राफेल एक साथ जमीन पर से दुश्मन के हमलों को ध्वस्त करने और आसमान में आक्रमण करने में सक्षम है। जरूरत पड़ने पर परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल कर सकता है।

हवा से बात करता है राफेल…कोई नहीं है टक्कर में

राफेल की अधितकम स्पीड 2222 किमी प्रति घंटा है। भारत आने वाल 6 राफेल विमान पूर्ण रूप से कॉम्बेट रेडी पोजिशन में होंगे। जिन्हें कुछ दिनों के अंदर ही किसी भी ऑपरेशन में लगाया जा सकेगा। विमानों की पहले खेप को हरियाणा के अंबाला में तैनात किया जाएगा। राफेल को भारतीय वायुसेना की जरूरतों के हिसाब से बदला गया है। इसमें कोल्‍ड इंजन स्‍टार्ट की क्षमता है यानी ठंड का इंजन पर कोई असर नहीं होगा। बफीर्ले पहाड़ों के बीच मौजूद बेस से यह जेट आसानी से ठंड के सीजन में भी उड़ान भर सकता है।

पहले अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में रखें जाएंगे पांचों विमान

इंडियन एयरफोर्स के मुताबिक राफेल विमान की पहली खेप जोकि पांच विमानों की होगी, जुलाई के आखिरी दिनों में भारत पहुंच सकती है। 29 जून को इन विमानों को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन में रखा जाएगा। इसके बाद आगे तय होगा कि इन विमानों को कहां तैनात करना है। फिलहाल 22 जुलाई से एयरफोर्स कमांडर्स की बैठक भी होने वाली है।

चीनी विमान इसके आगे कुछ नहीं…

राफेल और J-20, दोनों ही सिंगल सीटर, ट्विन इंजन एयरक्राफ्ट्स हैं। जहां चीनी J-20 का मेन रोल स्‍टील्‍थ फाइटर का है, वहीं राफेल को कई कामों में लगाया जा सकता है। चीन J-20 का यूज दुश्‍मन पर नजर रखने के लिए करता है। राफेल को निगरानी के अलावा सोर्टीज और अटैक में भी आसानी से यूज किया जा सकता है। राफेल को भारत की जरूरतों के हिसाब से मॉडिफाई किया गया है जो इसे चीनी J-20 पर थोड़ी बढ़त देता है।

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