इतिहास रचेगी नारी शक्ति, राफेल उड़ाएंगी महिला पायलट, IAF की गोल्‍डन ऐरोज स्वाड्रन में होंगी शामिल

New Delhi: राफेल विमान (Rafale Jet) भारत के दु’श्‍म’नों को मजा चखाने के लिए तैयार हैं। भारतीय वायुसेना (IAF) के पायलट्स को इसके लिए खास ट्रेनिंग मिली है। 10 सितंबर को जब राफेल जेट्स औपचारिक रूप से एयरफोर्स का हिस्‍सा बने, तब पायलट्स ने अपने जौहर दिखाए थे।

राफेल (Rafale Jet) को उड़ाने वाली गोल्‍डन ऐरोज स्‍क्‍वाड्रन में अबतक सिर्फ पुरुष पायलट ही थी। अब उसमें एक महिला पायलट की एंट्री हो गई है। एयरफोर्स (Rafale Jet Women Pilot) के पास फिलहाल 10 ऐक्टिव महिला फाइटर पायलट्स हैं। इनमें से एक की कनवर्जन ट्रेनिंग चल रही है और वह जल्‍द 17 स्‍क्‍वाड्रन का हिस्‍सा बन जाएंगी।

उन्‍होंने अबतक मिग-21 (MIG-21) जेट्स को बड़े शानदार ढंग से उड़ाया है। करगिल यु’द्ध में पहली बार एयरफोर्स ने महिला पायलट्स को ऐक्टिव ऑपरेशंस का हिस्‍सा बनाया था। साल 2016 में सरकार ने महिलाओं को फाइ;टर फ्लाइंग की अनुमति भी दे दी थी। तब से अबतक 10 महिला पायलट्स कमिशन की गई हैं।

कनर्वजन ट्रेनिंग की क्‍यों है जरूरत?

महिला फा;इटर पायलट्स की ट्रेनिंग एकदम पुरुषों जैसी ही होती है। एक बार पायलट किसी फाइ’टर टाइप को उड़ाने के लिए क्लियर हो जाएं तो उन्‍हें कनवर्जन ट्रेनिंग से गुजरना होता है। एक एयरक्राफ्ट से दूसरे एयरक्राफ्ट पर स्विच करने के लिए पायलट्स को इस ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती है। जिस पायलट की ट्रेनिंग चल रही है, वह मिग-21 बायसन उड़ाती रही हैं।

चार साल पहले मिली फाइ’टर प्‍लेन उड़ाने की परम‍िशन

IAF की 10 महिला फाइटर पायलट्स ने अब तक सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29 जैसे कई ल’ड़ा’कू विमान उड़ाए हैं। साल 2016 में केंद्र सरकार की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद जो पहली तीन महिला फाइटर पायलट्स बनी। वे हैं- फ्लाइट लेफ्टिनेंट अवनी चतुर्वेदी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कांत और फ्लाइट लेफ्टिनेंट मोहना सिंह।

अपनी सिग्‍नेचर फ्रीक्‍वेंसी बदल सकते हैं राफेल

भारत आ चुके राफेल विमानों (Rafale Jet) की प्रैक्टिस जारी है। मिलिट्री एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, लद्दाख में भी ट्रेनिंग के लिए राफेल यूज किया जा सकता है क्‍यों‍कि इसमें ऐसे सिग्‍नल प्रोसेसर्स लगे हैं कि जो जरूरत पड़ने पर सिग्‍नल फ्रीक्‍वेंसी बदल सकते हैं।

घातक हथि’यारों से लैस है हर एक राफेल जेट

भारत में जो राफेल (Rafale Jet) आए हैं, उनके साथ Meteor बियांड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल, MICA मल्‍टी मिशन एयर-टू-एयर मिसाइल और SCALP डीप-स्‍ट्राइक क्रूज मिसाइल्‍स लगी हैं। इससे भारतीय वायुसेना के जांबाजों को हवा और जमीन पर टारगेट्स को उड़ा’ने की जबर्दस्‍त क्षमता हासिल हो चुकी है।

Meteor मिसाइलें नो-एस्‍केप जोन के साथ आती हैं यानी इनसे बचा नहीं जा सकता। यह फिलहाल मौजूद मीडियम रेंज की एयर-टू-एयर मिसा;इलों से तीन गुना ज्‍यादा ताकतवर हैं। इस मिसा;इल सिस्‍टम के साथ एक खास रॉकेट मोटर लगा है जो इसे 120 किलोमीटर की रेंज देता है।

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