प्रणब मुखर्जी की आखिरी बुक ‘द प्रेसिडेंसियल ईयर्स’- ‘अपनी योग्यता से PM बने नरेंद्र मोदी’

Webvarta Desk: कांग्रेस के दिग्गज नेता और भारत के पूर्व दिवंगत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से रिश्ता बहुत ही सौहार्दपूर्ण रहा है। इस बात की झलक उनके संस्मरण ‘द प्रेसिडेंसियल ईयर्स’ (The Presidential Years) में भी दिखाई देती है, जहां पर उन्होंने पीएम मोदी का जिक्र किया है। दिवंगत राष्ट्रपति का यह भी मानना था कि मोदी ने देश के पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों के विपरीत प्रधानमंत्री का पद अर्जित और हासिल किया है।

प्रणब ने अपने संस्मरण में लिखा है कि ‘मैंने जिन दो प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया, उनके लिए प्रधान मंत्री बनने का मार्ग बहुत अलग था। डॉ (मनमोहन) सिंह को सोनिया गांधी द्वारा पद की पेशकश की गई थी; कांग्रेस संसदीय दल और यूपीए के अन्य घटक दलों द्वारा उन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुना गया था, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। हालांकि उन्होंने डॉ मनमोहन सिंह के बारे में ये भी लिका कि उनके अंदर दृढ़ संकल्प, स्वामित्व की मजबूत भावना और फौलादी इच्छाशक्ति थी।

मोदी की 2014 में ऐतिहासिक जीत

प्रणब ने लिखा कि मनमोहन सिंह ने एक पीएम के रूप में अच्छा काम किया। दूसरी ओर, मोदी 2014 में ऐतिहासिक जीत के लिए भाजपा का नेतृत्व करने के बाद लोकप्रिय पसंद के माध्यम से पीएम बन गए। वह मूलरूप से एक राजनेता हैं और पार्टी के अभियान मोड में जाते ही उन्हें भाजपा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया था। वह उस समय गुजरात के सीएम थे और उन्होंने एक ऐसी छवि बनाई थी, जो जनता के साथ सामांजस्य बैठाने वाली प्रतीत होती थी। उन्होंने प्रधानमंत्री पद अर्जित और प्राप्त किया है।

उनके विदेश यात्रा जाने से पहले पीएम मोदी द्वारा उनको लिखे गए पत्र के बारे में प्रणब ने लिखा है ‘वह मुझे एक पत्र भेजेंगे जिसमें हमारे द्विपक्षीय संबंधों के मुख्य बिंदुओं का उल्लेख किया गया था। यह पीएम मोदी द्वारा शुरू की गई प्रथा थी’।

जब रूस जाने से पहले पीएम ने लिखा था ‘प्रणब दा’ को पत्र

2015 में रूस की अपनी यात्रा से पहले के समय का वर्णन करते हुए प्रणब मुखर्जी ने खुलासा किया कि पीएम मोदी ने मुझेव्लादिमीर पुतिन के साथ अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करने की सलाह दी थी। जिसमें असैनिक परमाणु सहयोग और अंतरिक्ष से लेकर रक्षा हार्डवेयर देने की प्रक्रिया तक शामिल है, जिसमें सुखोई -30 भी शामिल है और अन्य संवेदनशील उपकरण साथ ही उच्च शिक्षा शामिल थी।

कांग्रेस के दिशाहीन होने पर लिखी ये बात

वहीं अपने संस्मरण में पूर्व दिवंगत राष्ट्रपति ने कांग्रेस के बारे में और उसके दिशाहीन होने को लेकर भी काफी कुछ लिखा है। उन्होंने लिखा है कि 2014 के लोकसभा चुनाव हारने के पीछे पार्टी के वरिष्ठ नेता जिम्मेदार थे। इससे पहले भी उन्होंने लिखा था कि कांग्रेस राजनीतिक दिशा से भटक गयी है और कुछ पार्टी सदस्यों का यह मानना था कि अगर 2004 में वह प्रधानमंत्री बनते तो 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए करारी हार वाली नौबत नहीं आती। इसके अलावा उन्होंने बिना नाम लिए भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बारे में लिखा।