लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर PM ने दी बधाई, बताया ‘प्रेरणास्त्रोत, विकास में भूमिका’

New Delhi: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नींव रखने वाले नेताओं में शुमार वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) को उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने बधाई दी है। आडवाणी आज 93 साल के हो गए।

प्रधानमंत्री ने लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) को बधाई देते हुए कहा, ‘भाजपा को जन-जन तक पहुंचाने के साथ देश के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले श्रद्धेय श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। वे पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं के साथ ही देशवासियों के प्रत्यक्ष प्रेरणास्रोत हैं। मैं उनकी लंबी आयु और स्वस्थ जीवन की प्रार्थना करता हूं।’

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उपप्रधानमंत्री रहे लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) देश के गृहमंत्री का पदभार भी संभाल चुके हैं। 1947 के बंटवारे के बाद सिंध से आकर मुंबई बसे आडवााणी को भारत के दूसरे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।

एक परिचय

लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) का जन्म कराची (अब पाकिस्तान) में 1927 में हुआ था। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक के तौर पर अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। भाजपा को फर्स से अर्स तक लाने का श्रेय लाल कृष्ण आडवाणी को जाता है। आडवाणी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। 1997 में मोरारजी देसाई की सरकार में भी सूचना और प्रसारण मंत्री रहे। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में दो बार गृह मंत्री (1998-99, 1999-2004) और उप प्रधानमंत्री (2002 से 2004) रह चुके हैं।

अटल आडवाणी की जोड़ी

राजनीति में अटल – आडवाणी की जोड़ी सबकी चहेती रही है। दोनों के कई किस्से सुनने को मिलते हैं। ऐसा ही एक किस्सा है 1995 का जब वाजपेयी जी ने आडवाणी जी को जन्मदिन पर सरप्राइज दिया। इसी दौरान माहौल ऐसा भी बना कि वाजपेयी जी ने आडवाणी जी के बगल में बैठने भी से इनकार कर दिया और आडवाणी की पत्नी कमला आडवाणी को अपनी कुर्सी दे दी।

7 नंवबर को वर्ष 1995 में पुणे के होटल अरोड़ा टावर में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक निर्धारित थी। अटल सहित तमाम नेता होटल में पहुंच चुके थे। तभी जिक्र हुआ कि कल यानि 8 नवंबर को आडवाणी जी का जन्मदिन है। तुरंत उनके जन्मदिन के आयोजन की तैयारी हुई। होटल के मालिक दत्तात्रेय चितले ने आडवाणी और अटल के पसींदीदा भोजन की व्यवस्था करवाई।

खैर.. अटल जी के आमंत्रण पर आडवाणी जी भी 7 नवंबर की शाम को ही होटल पहुंच गए। योजना के अनुसार, वाजपेयी जी को होटल में 12 बजे ठीक आधी रात को आडवाणी जी को जन्मदिन की बधाई देनी थी। जिसके लिए एक मंच तैयार किया गया। मंच पर दो कुर्सियां रखीं गईं। एक अटल जी के लिए और दूसरी आडवाणी जी के लिए। रात के खाने के बाद, कार्यसमिति के सभी सदस्य मंच के पास एकत्रित हुए और सभी ने आडवाणी जी और वाजपेयी जी से मंच पर दोनों कुर्सियों पर आने का आग्रह किया।

अचानक वाजपेयी जी ने आडवाणी जी के पास बैठने से इनकार कर दिया। सब हैरान रह गए। तुरंत ही वाजपेयी जी ने इस भ्रम को दूर कर दिया और कहा, कुर्सी आज कमला जी (आडवाणी जी की पत्नी) की है। उन्होंने सुनिश्चित किया कि कमला जी ही आडवाणी जी के बगल में बैठें और उसके बाद ही कार्यक्रम शुरू हुआ। इस तरह आडवाणी जी के लिए यह जन्मदिन यादगार बना।

पारिवारिक पृष्टभूमि

लालकृष्ण आडवाणी जा जन्म कराची में के सिन्धी परिवार में हुआ था। इनके पिता जी का नाम श्री किशन चन्द और माता का नाम ग्यानी देवी था। उनकी छोटी बहन का नाम शीला है।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा सेंट पैट्रिक हाई स्कूल, कराची से पूरी की, और फिर गवर्नमेंट कॉलेज हैदराबाद, सिंध में दाखिला लिया था। उनका परिवार विभाजन के दौरान भारत में आय था और बंबई में बस गया था। आडवाणी जी ने बॉम्बे विश्वविद्यालय के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून में स्नातक किया था।

लालकृष्ण आडवाणी ने फरवरी 1965 में कमला आडवाणी (1932–2016) से शादी की थी। उनका एक बेटा, जयंत और एक बेटी, प्रतिभा है जो टीवी सीरियल बनाती हैं। आडवाणी जी कि पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया है।

करियर की शुरुआत

लाल कृष्ण आडवाणी के सामाजिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1947 से मानी जाती है जब वे करांची में रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सचिव हुआ करते थे। उसके बाद से उन्हें अल्वर(राजस्थान) के मत्स्य क्षेत्र में भेज दिया गया, वही पर उन्होंने विभाजन के दौरान साम्प्रदायिक उन्माद जैसी परिस्थितियों को देखा यही पर उन्हें रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सन्दर्भ में बहुत सारी जिम्मेदारियां दी गयी थी।

प्रोफ़ेशन
  • वर्ष 1947 में लाल कृष्ण आडवाणी को करांची में रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का सचिव चुना गया।
  • वर्ष 1951 में वे भारतीय जन संघ के के सदस्य बने। उल्लेखनीय है कि भारतीय जन संघ के स्थापना श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी।
  • 1966 से 1967 तक ये भारतीय जन संघ के नेता बने रहे।
  • 1970 से 1976 तक लाल कृष्ण आडवाणी दिल्ली से राज्य सभा के सदस्य रहे।
  • 1973 में उन्हें भारतीय जन संघ का रास्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
  • उसके पश्चात 1976 से 1982 तक लगातार वे गुजरात से राज्य सभा सदस्य बने रहे।
  • वर्ष 1977 में भारतीय जन संघ से हटाये जाने के बाद उन्होंने अटल विहारी वाजपेयी के साथ जनता पार्टी के सदस्यता ग्रहण कर ली।
  • वर्ष 1977 में जनता पार्टी ने लोक सभा में बहुमत हासिल किया और नए प्रधानमंत्री के रूप में मोरारजी देशाई नियुक्त किये गए।
  • जनवरी 1980 से अप्रैल 1980 तक लाल कृष्ण आडवाणी राज्य सभा में विपक्ष के नेता बने रहे।
  • वर्ष 1980 के दौरान इन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया। इस पद वे 1986 तक बने रहे।
  • वर्ष 1982 में वे पुनः तीसरी बार राज्य सभा के लिए नियुक्त हुए।
  • वर्ष 1986 में लाल कृष्ण आडवाणी भारतीय जनता पार्टी के रास्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किये गए और इस पद पर 1991 तक बने रहे।
  • वर्ष 1998 में वे राज्य सभा के लिए चौथी बार सदस्य चुने गए।
  • वर्ष 1989 में लाल कृष्ण आडवाणी 9 वीं लोक सभा में सांसद चुने गये थे।
  • वर्ष 1989 से वर्ष 1991 तक लाल कृष्ण आडवाणी लोक सभा में संसदीय दल के नेता बने रहे।
  • वर्ष 1990 से वार्स 1991 तक लाल कृष्ण आडवाणी भर्ती एवं निर्धारण नियम 1955 के तहत लोक सभा सचिवालय की पुनार्विक्षा समिति के चेयरमैन बनाये गए।
  • वर्ष 1991 में लाल कृष्ण आडवाणी 10वी लोक सभा के आम चुनाव में दूसरी बार सांसद चुने गए।
  • वर्ष 1991 से 1993 तक लाल कृष्ण आडवाणी लोक सभा में विपक्ष के नेता बने रहे।
  • वर्ष 1993 से 1998 तक लाल कृष्ण आडवाणी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
  • वर्ष 1998 में लाल कृष्ण आडवानी 12 वी लोक सभा के आम चुनाव में तीसरी बार चुने गए।
  • वर्ष 1998 से 1999 तक लाल कृष्ण आडवाणी गृह मंत्री बने।
  • वर्ष 1999 में लाल कृष्ण आडवानी 13वी लोक सभा के आम चुनाव में चौथी बार चुने गए।
  • अक्टूबर 1999 से मई 2004 तक लाल कृष्ण आडवाणी भारत के गृह मंत्री बने रहे।
  • 29 जून 2002 से मई 2004 तक लाल कृष्ण आडवाणी उप प्रधान-मंत्री बने रहे।
  • 1 जुलाई 2002 से 25 अगस्त 2002 तक लाल कृष्ण आडवाणी वैयक्तिक,पेंशन और लोक शिकायत निवारण मामलों के संघीय कैबिनेट मंत्री बने रहे।
  • वर्ष 2004 में लाल कृष्ण आडवाणी 14वी लोक सभा चुनाव में 5वी बार चुने गए और लोक सभा में विपक्ष के नेता बने रहे।
  • 5 अगस्त 2006 से मई 2009 तक लाल कृष्ण आडवाणी गृह मामलो की समिति के सदस्य बने रहे।
  • वर्ष 2009 में लाल कृष्ण आडवाणी 15वी लोक सभा छठी बार सांसद के रूप में चुने गए।
  • 29- मई 2009 से दिसम्बर 2009 तक लाल कृष्ण आडवाणी लोक सभा में विपक्ष के नेता बने रहे।
  • 4 अगस्त 2009 को लाल कृष्ण आडवाणी को पार्लियामेन्टरी काम्प्लेक्स में लगाए जाने वाले प्रमुख भारतीय रास्ट्रीय नेताओ की तस्वीरों की समिति का सदस्य बनाया गया।
  • 31 अगस्त 2009 को लाल कृष्ण आडवाणी को गृह मंत्रालयों की समिति का सदस्य बनाया गया।
  • 15 दिसम्बर 2009 को लाल कृष्ण आडवाणी को पार्लियामेन्टरी काम्प्लेक्स के विकास और उसके सभी चीजो की देख-रेख और संरक्षण पर बनी सयुक्त पार्लियामेन्टरी समिति का सदस्य बनाया गया है।

जून 2013 को लाल कृष्ण आडवाणी ने अपने द्वारा ग्रहण किये गए सारे पदों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपनी बातों को यह कहते हुए रखा कि भारतीय जनता पार्टी वह राष्ट्रीय पार्टी नहीं रह गयी है जिसकी स्थापना नाना जी देशमुख, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी और दीन दयाल उपाध्याय ने की थी।

हालाँकि पार्टी के वरिष्ट नेता राजनाथ सिंह के हस्तक्षेप की वजह से उन्होंने इस बात पर अपना इस्तीफा वापस लिया कि पार्टी अपने प्रत्येक फैसले लेने और समस्याओं को सुलझाने में उनके विचारों का भी ध्यान रखेगी।

किताबे और वृत्तचित्र-
  • माई कंट्री माई लाइफ, एन ऑटो बायोग्राफी बाई लाल कृष्ण आडवाणी, का बिमोचन ए पी जे अब्दुल कलाम ने 19 मार्च 2008 में किया था।
  • लाल कृष्ण आडवाणी: न्यू एप्रोच टू सिक्यूरिटी एंड डेवलपमेंट
  • लाल कृष्ण आडवाणी: ए प्रिस्नर्स स्क्रैप बुक

ऊपर लिखे गये विवरण से यह बात स्पष्ट है कि आडवाणी जी भारतीय जनता पार्टी के आधार स्तम्भ रहे हैं और उन्होंने पार्टी में रहकर देश में बहुत से महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएँ दी हैं। आडवाणी जी को 93 वें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें।

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