विश्व भारती में PM मोदी ने दिया गुरुदेव का मंत्र, बोले- उनका विजन आत्मनिर्भर भारत का सार

Webvarta Desk: Visva-Bharati University 100 Years: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में शांति निकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय के 100 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने गुरुदेव (Gurudev) के विजन को आत्मनिर्भर भारत का सार बताया। इसके साथ ही उन्होंने गुरुदेव और गुजरात का कनेक्शन भी बताया।

पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने बंगाल की संस्कृति और गुरुदेव से जुड़ी कई बातों का अपने संबोधन में जिक्र किया। बता दें कि पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस मौके पर पश्चिम बंगाल राज्यपाल जगदीप धनखड़ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल भी मौजूद रहे।

छात्रों को सुनाया गुरुदेव का मंत्र

पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा, गुरुदेव का सबसे प्रेरणादायी मंत्र तो याद ही है। जोदि तोर दक शुने केऊ ना ऐसे तबे एकला चलो रे यानी कोई साथ न आए, अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अगर अकेले चलना पड़े तो चलिए। इस दौरान उन्होंने विश्वभारती के छात्र-छात्राओं को एक टास्क भी दिया। पीएम मोदी ने इस बार कोरोना महामारी के चलते पौष मेला नहीं हो पाया। स्टूडेंट्स पौष मेले में आने वाले लोगों से संपर्क करें और कोशिश करें कि उनकी कलाकृतियां ऑनलाइन कैसे बेची जा सकें।

नए लक्ष्य गढ़ने होंगे, मार्गदर्शन गुरुदेव की बातें करेंगी

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, वर्ष 2022 में देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे हो जाएंगे। विश्वभारती की स्थापना के 27 साल बाद देश आजाद हो गया था। 27 साल बाद भारत की आजादी को 100 साल हो जाएंगे। हमें नए लक्ष्य गढ़ने होंगे, नई उर्जा जुटानी होगी। इस लक्ष्य में हमारा मार्गदर्शन गुरुदेव की ही बातें करेंगी। उनके विचार करेंगे।

विश्व भारती के 100 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने कहा, भारत के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए बंगाल की पीढ़ियों ने खुद को खपा दिया था। खुदीराम बोस सिर्फ 18 वर्ष की आयु में फांसी चढ़ गए। प्रफुल्ल चाकी 19 वर्ष की उम्र में शहीद हो गए। बीना दास, जिन्होंने बंगाल की अग्नि कन्या के रूप में जाना जाता है। सिर्फ 21 साल की उम्र में जेल भेज दी गई थीं। ऐसे अनगिनत लोग हैं जिनके नाम इतिहास में भी दर्ज नहीं हो पाए। इन सभी ने देश के आत्मसम्मान के लिए मृत्यु को गले लगा लिया।