राम मंदिर भूमिपूजन में जाएंगे PM मोदी.. और छिड़ गई नेहरू के सोमनाथ मंदिर विवाद पर बहस

New Delhi: PM Modi Ram Mandir Nehru Somnath Mandir: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन के कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इसका न्योता दिया गया था। इस बीच सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ी हुई है।

दरअसल 1951 में सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के लिए डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को न्योता दिया गया था। उस वक्त देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उनसे वहां न जाने के लिए विचार करने को कहा था। आइए जानते हैं क्या है पूरा विवाद…

मई 1951 में केएम मुंशी ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को नवनिर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के लिए बुलावा भेजा था। उस वक्त पंडित जवाहर लाल नेहरू ने एक खत लिखा। इस खत में उन्होंने राजेंद्र प्रसाद से अपने निर्णय पर पुनर्विचार के लिए कहा।

उन्होंने खत में लिखा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और इसके कई निहितार्थ लगाए जा सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकार साकेत गोखले ने ट्वीट में लिखा, ‘इस पर राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि वह राष्ट्रपति हैं और जिस भी आयोजन में उन्हें जाने में खुशी होती है, वहां वह जाएंगे। इस पर नेहरू ने उन्हें याद दिलाया कि वह मंत्रि परिषद की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य हैं।’

गोखले ट्वीट में लिखते हैं कि नेहरू ने एक सेक्युलर देश के राष्ट्रपति के रूप में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के कदम पर नाखुशी जताई। गोखले ने ट्वीट किया, ‘2 मई 1951 को पंडित नेहरू ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को खत लिखा और कहा कि सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन कार्यक्रम सरकारी नहीं है और भारत सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। हमें कोई भी ऐसी चीज नहीं करनी चाहिए जो एक सेक्युलर स्टेट के हमारे रास्ते में आड़े आए। यही हमारे संविधान का आधार है। इसलिए देश के सेक्युलर कैरेक्टर को प्रभावित करने वाली किसी भी चीज से सरकार अपने को दूर करती है।’

गोखले ने लिखा कि इसके बावजूद 11 मई 1951 को राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। तत्कालीन नेहरू सरकार ने इस आयोजन से दूरी बनाकर रखी और कहा कि राष्ट्रपति अपने निजी विचार से हमारी सलाह के बावजूद वहां गए।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार संजय पांडेय कहते हैं, ‘नेहरू का खत पीएम मोदी के संबंध में अप्रासंगिक है। राम मंदिर का मामला कोर्ट में हल हो गया है। हो सकता है कि बीजेपी इसी क्षण का इंतजार कर रही थी। बीजेपी के मेनिफेस्टो में राम मंदिर का मुद्दा रहा है। ऐसे में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री वहां जाते हैं तो कोई हर्ज नहीं है।’

इससे पहले राहुल गांधी ने जब 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान सोमनाथ का दर्शन किया था तो यह विवाद गरमाया था। उस वक्त पीएम नरेंद्र मोदी की वेबसाइट से इसको लेकर सवाल उठाया गया था।

वेबसाइट के हैंडल से ट्वीट में कहा गया, ‘आज कुछ लोग सोमनाथ को याद कर रहे हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि आप इतिहास भूल गए हैं क्या? आपके परिवार के पहले सदस्य (पंडित नेहरू) यहां मंदिर बनाने के पक्ष में ही नहीं थे। जब डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को मंदिर का उद्घाटन करने आना था तो नेहरू ने नाराजगी जताई थी। सरदार पटेल ने नर्मदा का ख्वाब देखा था लेकिन आपके परिवार ने ये सपना पूरा होने नहीं दिया।’