नई दिल्ली, 24 जुलाई (वेब वार्ता)। देशभर में पेपर लीक प्रकरण को लेकर जारी छात्र आंदोलनों और राजनीतिक घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के साथ-साथ ऐसी घटनाओं की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष त्वरित न्यायालय स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के संदेश पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की भावनाओं को समझने के बजाय उनका अपमान कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सामाजिक माध्यम पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए अत्यंत पीड़ादायक विषय है। उन्होंने बताया कि सरकार ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों को गिरफ्तार किया है और वे वर्तमान में जेल में हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि विद्यार्थियों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि कम समय में लगभग 22 लाख विद्यार्थियों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित कराई गई तथा समय पर परिणाम भी घोषित किए गए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार केवल पुनर्परीक्षा आयोजित कर संतुष्ट नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए स्थायी और कठोर व्यवस्था तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि संबंधित विभागों को विशेष त्वरित न्यायालयों के गठन का प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं और आगामी संसद सत्र में इससे संबंधित विधेयक को शीघ्र पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री के इस संदेश के तुरंत बाद राहुल गांधी ने सामाजिक माध्यम पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश के विद्यार्थी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार वास्तविक जवाबदेही तय करने के बजाय केवल संदेश जारी कर रही है। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री को पद से हटाने, आंदोलन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा विद्यार्थियों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगने की मांग दोहराई।
उधर, राष्ट्रीय राजधानी में पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर छात्र और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार की ओर से लगातार आश्वासन दिए जाने के बावजूद आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारी अपने रुख पर कायम हैं और जवाबदेही तय होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
इसी क्रम में राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष के अनेक सांसद तीस जनवरी मार्ग स्थित गांधी स्मृति पहुंचे, जहां पेपर लीक प्रकरण के बाद जान गंवाने वाले विद्यार्थियों तथा आंदोलन के दौरान घायल हुए छात्रों के लिए प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इस दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी कर रही है और विद्यार्थियों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने पुनः शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।
इस बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल आश्वासन या नई घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना था कि विद्यार्थियों को ठोस जवाबदेही चाहिए और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से कम किसी भी समाधान पर आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
पेपर लीक प्रकरण अब केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है। एक ओर सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने और दोषियों को कठोर दंड दिलाने का भरोसा दे रही है, वहीं विपक्ष और आंदोलनकारी विद्यार्थी जवाबदेही तय करने तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में आगामी संसद सत्र और प्रस्तावित विधायी कदमों पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।




