Kisan Rail: किसानों को PM मोदी ने दी बड़ी सौगात, शुरू की 100वीं किसान रेल, जानें इसकी खासियत

Webvarta Desk: PM Modi Flag off Kisan Rail: किसानों के लिए एक और बड़ा कदम उठाते हुए आज पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने 100वीं किसान रेल (100th Kisan Rail) को हरी झंडी दिखा दी है। यह ट्रेन महाराष्ट्र के संगोला से पश्चिम बंगाल के शालीमार तक के लिए चलाई जा रही है।

अब तक की 99 किसान रेल (Kisan Rail) 14 राज्यों में चली हैं। बता दें कि कोरोना काल में कृषि उत्पादों की ढुलाई में किसानों को होने वाली परेशानी से किसानों को राहत देने के लिए किसान रेल चलाई थी, जिससे अब कृषि उत्पाद काफी सुगमता से देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंच रही है।

किसान रेल में कोई न्यूनतम सीमा नहीं

पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने इस ट्रेन (Kisan Rail) को हरी झंडी देकर कहा कि यह किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे देश के 80 फीसदी से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी शक्ति मिली है। कोल्ड स्टोरेज चेन के लिए भी यह मजबूती देने वाला कदम साबित होगा। किसी किसान के लिए कोई सीमा तय नहीं है। उत्पाद कम हो या ज्यादा, सब सही समय पर पहुंच सकेगा।

महज 3 किलो अनार का पैकेट भी ट्रेन से भेजे गए। मुर्गी के 17 दर्जन अंडे भी इससे भेजे गए हैं। किसान रेल (Kisan Rail) के जरिए छोटे किसानों को भी बड़ा बाजार दिया जा रहा है। पहले किसान रेल साप्ताहिक थी, लेकिन अब इस ट्रेन को सप्ताह में 3 दिन चलाया जा रहा है। बेहद कम समय में 100वीं किसान रेल चलना ये साफ करता है कि इससे किसानों को फायदा हो रहा है।

अब किसानों की फसल नहीं होगी बर्बाद

टमाटर की कीमत जब बहुत कम हो जाती है तो किसान परेशान हो जाता है। किसान अपनी मेहनत को अपनी आंखों के सामने बर्बाद होते देखता है। किसान रेल (Kisan Rail) की सुविधा के बाद उसे एक विकल्प मिला है और वह अपनी उपज देश के उन हिस्सों तक पहुंचा सकता है, जहां पर टमाटर की मांग ज्यादा है और जहां उसे बेहतर कीमत मिल सकती है। फलों और सब्जियों के ट्रांसपोर्ट का फायदा ले सकता है।

चलता फिरता कोल्ड स्टोरेज है किसान रेल

किसान रेल एक चलता फिरता कोल्ड स्टोरेज है। इसमें फल, दूध, सब्जी, मछली, मांस पूरी सुरक्षा के साथ एक जगह से दूसरी जगह पहुंच रही है। पहले सड़क से ट्रांसपोर्टेशन के चलते किराया अधिक लगता था और समय भी अधिक लगता था। गांव में उगाने वाले और शहर में खाने वाले दोनों को ये महंगा पड़ता था।

100वीं ट्रेन से अनार, संतरे, अंगूर जैसे उत्पाद भेजे जा रहे हैं और ये ट्रेन करीब 40 घंटे में शालीमार पहुंच जाएगी। वहीं ट्रकों से सामान भेजने में कई दिन लग जाते थे। ये ट्रेन कई राज्यों के बड़े स्टेशनों पर भी रुकेगी, जहां किसानों की उपज उतारी भी जा सकती है और वहां से नई उपज भी ले सकती है।

रोड ट्रांसपोर्टेशन के मुकाबले बहुत सस्ती है किसान रेल

इस रूट पर रेल का मालभाड़ा ट्रक के मुकाबले करीब 1700 रुपये कम है। किसान रेल में सरकार 50 फीसदी तक छूट भी दे रही है, जिससे फायदा हो रहा है। किसान रेल से कैश क्रॉप जैसी फसलों को उगाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। आज पश्चिम बंगाल का किसान भी इस सुविधा से जुड़ा है।

अब वहां के किसानों को आलू, कटहल, बैंगन, अनानास, लीची, आम, केला, मछली जैसे उत्पादों को देश के तमाम बाजारों तक पहुंचाने का विकल्प मिला है। किसानों को बेहतर जीवन देने के लिए और गांव में अधिक रोजगार पैदा करने के लिए एक के बाद एक कृषि सुधार किए जा रहे हैं, किसान रेल भी इनमें से एक है।

7 अगस्त को चली थी पहली किसान रेल

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए 7 अगस्त को देश की पहली ‘किसान रेल’ को हरी झंड़ी दी थी। पहली किसान रेल महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित देवलाली से बिहार के दानापुर के लिए चली थी। अब तक 99 किसान रेल चलाई जा चुकी हैं और अब पीएम मोदी ने 100वीं किसान रेल को भी हरी झंडी दे दी है। किसान रेल की वजह से लोगों को फल और सब्जियां पहले के मुकाबले अधिक ताजी और सस्ती दरों पर मिल रही हैं।

क्या है किसान रेल का फायदा?

किसान रेल से सस्ती दरों पर कृषि उत्पादों, खासतौर से जल्दी खराब होने वाली उपज के परिवहन में मदद मिलती है। साथ ही यह पहल किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने में सहायक साबित हो रही है।

किसान रेल की मदद से कम समय में अधिक कृषि उत्पाद देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंच रहा है। बहुत जल्द खराब होने वाली चीजों को किसान रेल के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर से खराब होने से बचाने में मदद मिलती है। इनमें मछली, मांस और दूध जैसी चीजें भी आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाई जा सकती हैं।

वित्त मंत्री ने बजट में की थी इसकी घोषणा

इस साल 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में ही इस ट्रेन की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि रेलवे जल्द खराब होने वाली चीजों की ढुलाई के लिए किसान रेल चलाएगी और 7 अगस्त को पहली किसान रेल चली। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर चलाया जा रहा है।

बता दें कि किसानों को किसान रेल के जरिए सामान ढुलाई में करीब 50 फीसदी तक की सब्सिडी भी मिलती है, जिसने बजट में हुई किसान रेल की इस घोषणा को और अहम बना दिया है।