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Monday, December 5, 2022

पैरा मेडिकल फोर्सेज के सभी टेस्ट पास किए लेकिन नियुक्ति नहीं मिली,किया पैदल मार्च तो पुलिस प्रशासन ने किया परेशान

दिल्ली के प्रेस क्लब आफ इंडिया में जब बुज़ुर्ग पेंशन धारक अपनी पीड़ा बयान कर रहे थे और पीएम मोदी से अपना आश्वासन पूरा करने की मांग कर रहे थे तभी वहां देश के ऐसे नौजवान भी पहुंचे जिनकी दर्दनाक दास्ताँ सुनकर सभी की आँखे नम हो गयीं। लगभग आधा दर्जन युवक जिनमें एक युवती भी थी प्रेस से रूबरू हो रहे थे।

और फिक्रमंद थे अपने उन साथियों के लिए जो पलवल में थे और उनको दिल्ली तक आने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा परेशान किया जा रहा था। ये वह बेरोज़गार हैं जिन्होंने नियुक्ति के लिए सारे टेस्ट पास कर लिए मगर इनको नियुक्ति नहीं दी गयी। एसएससी जीडी 2018 के तहत पैरा मेडिकल फोर्सेज के लिए लिखितफिजिकल और मेडिकल टेस्ट पास कर चुकी 35 लड़कियों समेत 160 अभ्यर्थी नियुक्ति पत्र की मांग लेकर 63 दिन से पदयात्रा पर हैं। मार्ग की दिक्कतें और प्रशासन की बदसलूकी जैसी तमाम परेशानियां सहते हुए ये बेरोजगार 27 जुलाई को हरियाणा के पलवल तक पहुंचे। जहां पहले तीन दिन तक रोककर पुलिस ने परेशान किया। फिर अगस्त देर रात इन्हें जबरन बस में ठूंसकर अलग-अलग ले जाकर छोड़ दिया।

इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने लड़कियों से बदसलूकी की। अभ्यर्थियों के सिम कार्ड तोड़ दिए। उनके फोन और सोशल मीडिया से जबरन फोटो-वीडियो डिलीट करवाए। नागपुर से दिल्ली पैदल मार्च के कुछ साथी प्रेस क्लब आफ इंडिया पहुंचे और उत्पीड़न की दास्ताँ बयान की। नागपुर के संविधान चौक से जून को लड़कियों समेत 40 बेरोजगार युवाओं ने पैदल मार्च शुरू की थी। धीरे-धीरे इस मार्च में देशभर से लड़के और लड़कियां जुड़ते गए। अभी पैदल मार्च में 35 लड़कियों समेत 160 से अधिक बेरोजगार युवा हैं।

 

 

शंकर मधुकर ने बताया है कि हम सभी 27 जुलाई को पलवल पहुंच गए थे। 62वें दिन पुलिस ने सभी साथियों को गिरफ्तार कर पलवल से दूर तिंवरी रायल पैलेस में रखा। यहां पुलिस अधिकारियों ने हम सबको डराया धमकाया। लड़कियों से बदसलूकी की।  

 

ज्ञात रहे कि वर्ष 2018 में एसएससी जीडी के तहत पैरा मिलिट्री फोर्स में 60,210 पद के लिए भर्ती निकाली गई । जिसके लिए इन लोगों ने लिखितफिजिकल और मेडिकल टेस्ट पास कियालेकिन इन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिला। सरकार ने सिर्फ 55 हजार पद ही भरे। इसको लेकर फरवरी, 2021 से इन बेरोज़गारों ने दिल्ली प्रदर्शन शुरू किया। ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मिलना चाहते थेलेकिन उनसे मिलने का टाइम नहीं मिला। दिल्ली में सभी सांसदों के दफ्तर गए और वहां जाकर मदद की गुहार लगाई। इसी दौरान किसी ने सुझाव दिया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिलेंवे आपकी पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करा सकते हैं। फिर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिलेउन्हें ज्ञापन दिया।

उन्होंने हमें 15 दिन के अंदर नियुक्ति पत्र दिलाने का आश्वासन दिया। 20 दिन बाद भी जब नियुक्ति पत्र नहीं मिले और गडकरी से मुलाकात भी नहीं हो सकी। तब इन्होंने नागपुर के संविधान चौक पर 72 दिन तक अनशन किया। इसके बाद केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने वीडियो कॉन्फ्रेंस पर बात की और जल्द ही नियुक्ति दिए जाने का आश्वासन दिया। जब करीब डेढ़ महीने बीत गए तब कुछ साथी दिल्ली केंद्रीय मंत्री अठावले से मिलने उनके दफ्तर पहुंचे तो वहां उनके साथ अभद्रता हुई। धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया। तभी इन्होने नागपुर से दिल्ली पैदल मार्च निकालने की ठानी।

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर की रहने वाली रुपाली हिमरन ने बताया कि  हम पिछले दो महीने से भूखे-प्यासे चल रहे हैं। इसपर हमें लगातार परेशान किया जाता रहा है। मध्यप्रदेश के सागर के जिलाधिकारी ने हमें वहां खाने और पीने के लिए नहीं रुकने दिया। और गर्मी  में हम लोगों को बिना रुके चलते रहने को कहा गया। आगरा पुलिस ने हम लोगों को पहले गुरुद्वारे में रुकवाया और उसके बाद धौलपुरमुरैनाशिकोहाबाद और इटावा ले जाकर छोड़ दिया। हमारे साथियों के मोबाइल फोन भी छीन लिए और फिर कभी यूपी न आने की चेतावनी देकर छोड़ा गया। जब मथुरा पहुंचे तो वहां की पुलिस ने भी हमारे साथ बदसलूकी की। पूरे दिन धूप में बैठाकर रखा। इस कारण दो लड़कियों की तबीयत बिगड़ गई।

रुपाली का कहना है कि अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते हम मेंटली और फिजिकल दोनों ही तरह से डिस्टर्ब हो चुके हैं। हम देश के लिए कुछ करना चाहते थे लेकिन आज हमें ही देश में उत्पीड़ित किया जा रहा है।

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