Friday, May 20, 2022
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धड़ल्ले से भरे जा रहे बड़े सिलेंडर से छोटे सिलेंडर

नई दिल्ली, 07 मई (वेब वार्ता)। पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाके में एलपीजी गैस (घरेलू गैस) की कालाबाजारी धड़ल्ले से चल रही है। इससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है। दुकानदारों और गैस का गोरखधंधा करने वाले लोगों द्वारा घरेलू गैस सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में गैस डाली जाती है। गैर कानूनी तौर पर डाली जाने वाली गैस किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। ऐसा तब हो रहा जब गैस एजेंसी छोटे सिलेंडर भी उपलब्ध करा रही है। वे सिलेंडर गुणवत्ता के साथ बने हैं। मार्केट में मिलने वाले सिलेंडर सस्ते तो मिलते हैं मगर उन्हें पतली सीट से बनाया जाता जो जल्दी फट जाते हैं।

प्रशासन के नाक के नीचे धड़ल्ले से हो रहे इस बड़े धंधे पर कभी लगाम नहीं लगी। हर गली और चौक-चौराहे पर छोटी-छोटी दुकानों में रीफिलिंग का कारोबार चल रहा है। 350 से 450 रुपये या इससे भी अधिक दाम पर गैस भरी जा रही है। न्यू अशोक नगर इलाके में किराए पर रूम लेकर रहने वाले छात्रों की संख्या अधिक है, जिसकी वजह से अवैध छोटे सिलिंडरों को बेचने और रीफिलिंग का धंधा बड़े पैमाने पर हो रहा है। कई मोहल्लों में तो किराना दुकान, चाय-स्टॉल आदि पर भी यह कारोबार चल रहा है। इन इलाकों में अवैध रीफलिंग करने वालों को गैस सिलिंडर ट्राली मैन ही उपलब्ध कराते हैं तो कुछ ट्राली मैन खुद रीफलिंग करते हैं।

छात्र और किराये के मकान में रहने वाले लोग पांच किलो और ढाई किलो के छोटे गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करते हैं। अवैध रीफिलिंग करने वाले 100 से 200 रुपये अधिक कीमत पर गैस कंपनियों के वेंडरों से सिलिंडर खरीदता है। छोटे गैस सिलिंडर में 95 रुपये से लेकर 110 रुपये प्रति किलो तक के हिसाब से गैस भरी जाती है। इस तरह अवैध गैस रिफलिंग में एक सिलिंडर से दोगुना तक फायदा है।

पिन से निकालते हैं गैस

इस प्रकार से गैस की कालाबाजारी करने वाले लोग एक विशेष प्रकार का उपकरण (पिन) रखते हैं। इस उपकरण के माध्यम से बड़े सिलेंडर से छोटे सिलेंडर में गैस डाली जाती है। इस प्रक्रिया के लिए बड़े सिलेंडर को पूरी तरह से भरा रखना पड़ता है। इसके बाद इस उपकरण के जरिए छोटे सिलेंडर को जोड़ा जाता है। भरे सिलेंडर में प्रेशर होने के कारण गैस छोटे सिलेंडर की तरफ आ जाती है। दुकानदार श्रमिकों से वजन के अनुसार पैसे लेते हैं। गांवों के साथ ही रिहायशी सेक्टर एक में भी इस प्रकार से सिलेंडर से गैस दूसरे सिलेंडर में डाली जाती है।

हो सकता है हादसा

इस प्रकार गैस दूसरे सिलेंडरों में डालने वाले लोगों द्वारा खुलेआम दुकानों के बाहर यह प्रक्रिया की जाती है। ऐसे में काफी मात्रा में गैस हवा में घुल जाती है। इससे किसी भी समय आग लग सकती है। छोटे सिलेंडर में गैस डालने से बड़ा सिलेंडर खाली हो जाता है। ऐसे में बड़ा सिलेंडर आग लगने से फट भी सकता है। रोजाना क्षेत्र में ऐसे ही खुलेआम गैस की कालाबाजारी की जा रही है।

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