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Monday, September 26, 2022

काम हमारा और सारा प्रचार केंद्र का होता था… तो नीतीश कुमार का असली दर्द मोदी थे?

वेबवार्ता: नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने विधानसभा (Bihar Vidhansabha) में खुद इस सवाल का जवाब दे दिया कि भाजपा से रिश्ता तोड़ने की सबसे बड़ी वजह क्या थी? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का नाम नहीं लिया लेकिन दिल्ली वाला, केंद्र कहकर सुनाते रहे। बोले, वह तो केवल प्रचार में माहिर हैं, काम बिहार में हो रहा था लेकिन नाम केंद्र का चल रहा था। इस तरह से नीतीश का दर्द भी विधानसभा में सबके सामने आ गया।

दरअसल, जब से नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने भाजपा से नाता तोड़ सात दलों के समर्थन से बिहार में सरकार बनाई है, उन्हें पलटी मारने वाला कहते हुए कई तरह की बातें कही जा रही हैं। विश्वास मत पर चर्चा के दौरान जब विधानसभा (Bihar Vidhansabha) में बोलने के लिए नीतीश कुमार खड़े हुए तो उन्होंने भाजपा से रिश्ते को लेकर काफी कुछ कहा। पिछली बार मोदी के दो तारीफ वाले ट्वीट ने बिहार में बाजी पलट दी थी और नीतीश कुमार आरजेडी का साथ छोड़ भाजपा के साथ हो लिए थे लेकिन आज नीतीश ने 2005 से भाजपा के रिश्तों की पोथी खोलकर रख दी।

2020 नहीं, 2005 की बात कर लीजिए

2020 के विधानसभा चुनाव नतीजों का जिक्र करते हुए नीतीश ने कहा कि क्या आप केवल 2020 की चर्चा करेंगे, याद कीजिए 2005, जब हम लोग एक साथ लड़े। क्या वोट आया, 88 और 55, उसके बाद सरकार बनी। 2009 में जब लोकसभा का चुनाव हुआ तो हम लोग कितना जीते थे। जेडीयू 20 और भाजपा 12… 2010 में चुनाव हुआ तो क्या हुआ। जेडीयू 115 और आप 91, हम मिलकर लड़े। तभी भाजपा के एक सदस्य बोलने के लिए खड़े हुए तो नीतीश ने तंज कसते हुए कहा, ‘बोलना जरूर, बोलोगे तभी केंद्र वाला कुछ आगे बढ़ाएगा। मेरे खिलाफ नहीं बोलेगे तो कोई आगे नहीं बढ़ाएगा।’

किसको मेरे खिलाफ खड़ा किया गया?

नीतीश ने आगे कहा कि हम तो तैयार नहीं थे, जो हालत हो गई थी इस बार 2020 के चुनाव में… किसको खिलाफ में खड़ा कर दिया गया था। सब चीज के बावजूद हमारे मन में कोई बात नहीं थी। हमने कहा था कि ज्यादा सीट आप जीते हैं, आपका बनना चाहिए सीएम। मेरे ऊपर दबाव दिया गया, नहीं साहब आप ही संभालिए और तब हम तैयार हुए। लेकिन आप जानते हैं जिस आदमी को हमने पार्टी में नीचे से ऊपर लाया, उसे किस तरह से अंदर में करके… एक बार 2020 के दिसंबर में हमने अपनी जगह पर दे दिया, बाद में कोई अपनी मर्जी से कहीं गया और अंदर चला गया। मेरी पार्टी के लोग बोलने लगे कि बहुत गड़बड़ हो रहा है। मेरे मन में कोई बात नहीं थी लेकिन आज जो भी कह रहे हैं कि हम अलग हो गए हैं और बनना चाहते हैं आगे। हम कुछ नहीं बनना चाहते। आज हम काम कर रहे हैं तो आपको दिक्कत हो रहा है कि अलग हो गए।

दिल्ली से खबर आई…

2017 में इनसे (आरजेडी) हम अलग हो गए। इन लोगों के ऊपर जो किया गया, 5 साल बीत गया, अब तो इन लोगों के पास कुछ नहीं है, जो उस समय कहा गया था इन लोगों के बारे में। आप समझ लीजिए वहां से इतना कहा गया, मेरे साथ इतनी बातचीत करके अपने साथ लाए। विधानसभा चुनाव में क्या हो गया, लेकिन धीरे-धीरे जो दिल्ली से खबर आ गई कि हम सबको छोड़कर इन लोगों के साथ है।

हमने सेंट्रल यूनिवर्सिटी की डिमांड की लेकिन…

नीतीश ने पटना यूनिवर्सिटी का 2017 के वाकये का जिक्र करते हुए कहा कि हमने कहा कि इसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी बना दीजिए, आप नहीं माने। अब तो आप लग जाइए ना, हम इतना दिन से कहे हैं। अब आप कर देंगे दिल्ली वाले, आजकल प्रचार तो केवल दिल्ली का होता है। खाली दिल्ली का प्रचार होता है। सारा सोशल मीडिया से लेकर, सारे प्रेस पर कब्जा है। अब नहीं छपेगा, अब तो कोई कहेगा ही नहीं कि हम लोग डिमांड कर रहे थे कि पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल बना दीजिए। दिल्ली वाले बना देंगे तो यही चर्चा करते रहिएगा कि केंद्र ने पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बना दिया। जो चीज हम शुरू से कहते थे, तो मेरी बात सुनते ही नहीं थे।

हर घर नल तो बिहार में पहले से था, केंद्र का कैसे?

हम कितनी बार जाकर कहते रहे। जब आप लोग 2017 में साथ आ गए थे, तो उसके पहले ही सात निश्चय था हर घर नल का जल के लिए भी। एक दो भाजपा के विधायक बोलना शुरू किए तो नीतीश ने समझाते हुए कहा कि हम आप लोगों से कुछ कह रहे हैं, हम तो दिल्ली से कह रहे हैं। इन लोगों के साथ जो सात निश्चय तय था, उसे आप (भाजपा) भी माने।

उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में एक बार मीटिंग हो रही थी तो हमसे पूछा गया कि आप जो कह रहे हैं हर घर नल तो उसे मेनटेन करिएगा। हमने कहा कि हां बिल्कुल होगा। बाद में आप लोग आ गए थे तो केंद्र ने तय किया और 6 हजार करोड़ रुपया देकर दिल्ली से कहा गया कि दिल्ली वाला मान लीजिए ताकि ये हो जाए कि बिहार में हर घर जल पहुंचाया गया। हमने आपकी पार्टी के लोगों से निवेदन किया कि यहां से पहले से हो रहा है। आप देश में कर रहे हैं लेकिन बिहार में तो पहले से हो रहा है। नीतीश ने कहा कि 2020 के बाद भी आ गया कि पैसा ले लीजिए और कह दीजिए कि दिल्ली ने किया है। हमने फिर कहवा दिया कि सवाल ही नहीं उठता। हम राज्य की तरफ से कर रहे हैं, यह केंद्र का नहीं है।

काम बिहार का, नाम दिल्ली का

नीतीश ने अपना दर्द जाहिर करते हुए कहा कि हम यहां जो भी काम करते हैं वो दिल्ली से कहा जाने लगता है कि वहां से हो रहा है। सीएम ने आगे कहा कि आप लोगों के साथ मिलकर ही हमने सड़क बनाई थी। ये कोई 8 साल से केंद्र सरकार के चलते बिहार में सड़क नहीं है। यहां पर है। ग्रामीण इलाकों में सड़क बनाने का निर्णय किसने लिया, श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने लिया। हम उस सरकार में थे, जब हम अलग हो गए थे जनता दल से…अटल जी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जी बैठकर उस समय की सरकार ने तय किया कि हम पूरे बिहार में गांव में सड़क पहुंचाएंगे। एक-एक चीज शुरू किया गया। ये कोई आज की सरकार का नहीं है कुछ।

ये जो आए हैं, केवल प्रचार के एक्सपर्ट हैं

भाजपा खासतौर से पीएम मोदी का नाम लिए उन पर निशाना साधते हुए नीतीश ने कहा कि जानते हैं हम 2013 में क्यों अलग हुए? हमको कितना मानते थे तीनों लोग, सारे नेता, जो सबसे बड़े नेता थे। मेरी हर बात मानते थे। अटल जी की तबीयत ठीक नहीं थी तो आडवाणी जी होने चाहिए। हम तो उनके लिए साथ थे। जब ये लोग नहीं माने इसीलिए हम अलग हो गए थे। अब जो आ गए, ये कोई काम किए हैं जी, खाली प्रचार-प्रसार के एक्सपर्ट हैं। कोई काम हो रहा है?

आगे नीतीश ने कहा कि हमारी तकलीफ जान लीजिए जो पहले हमारे साथ मिलकर काम करते थे (भाजपा के नेता) उन्हें मौका नहीं दिया गया। भाजपा के विधायक खड़े होकर बोलने लगे तो मुस्कुराते हुए नीतीश बोले कि कुछ बोले, तभी दिल्ली वाला जगह देगा। आपमें से भले लोगों को जगह नहीं मिलेगा, जो अंड-बंड बोलेगा उसे ही जगह मिलेगा। ये बात जान लीजिए। यही है आप लोगों की पार्टी।

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