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Friday, December 1, 2023

कश्मीर गाजा नहीं, 370 हटने के बाद आई शांति… शेहला रशीद ने की पीएम मोदी और शाह की तारीफ

नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष और मुस्लिम एक्टिविस्ट शेहला रशीद ने कश्मीर में धारा-370 को हटाने को लेकर पीएम मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि धारा-370 हटाने का फैसला सही था और इससे कश्मीर में शांति हुई है। कश्मीर को लेकर रशीद ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि कश्मीर गाजा नहीं है। उन्होंने कश्मीर में हुए बदलाव का श्रेय पीएम मोदी और अमित शाह को दिया है।

‘सरकार ने कश्मीर मामले में खोजा समाधान’

पिछले 10 साल में मोदी सरकार के खिलाफ जहर उगलने वाली एक्टिविस्ट शेहला रशीद ने मोदी सरकार की तारीफ न्यूज एजेंसी ANI को दिए गए एक इंटरव्यू में की। उन्होंने कहा कि भारत विविधिताओं से भरा देश है। ये बात सही है कि यहां मॉब लिंचिंग से कुछ मामले सामने आए… मुसलमानों के खिलाफ कुछ गलत बयानबाजी भी हुई, एक मुस्लिम के रूप में इससे तकलीफ हुई। लेकिन इसी सबमें कई साल हो गए। लेकिन कश्मीर के मामले में सरकार ने समाधान खोजा।

‘धारा-370 हटने से अच्छे नतीजे आए’

जब रशीद से सवाल पूछा गया कि 370 हटाए जाने के वक्त पाकिस्तानी नेरेटिव चलाया गया? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जब धारा 370 हटाई गई, तब हम पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट नहीं गए, न ही इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस गए… हम भारत के सुप्रीम कोर्ट गए। जब मैंने अपनी याचिका वापस ली, हम इस बात का अहसास हो गया था कि धारा-370 हटाने के विरोध का कोई मतलब नहीं है। धारा-370 हटने से अच्छे नतीजे आए हैं। उन्होंने कहा कि मैं यही चाहती हूं कि लोगों को अच्छा जीवन मिले, अधिकार मिले। सरकार ने लोगों को उनके अधिकार दिलाए,

‘कश्मीर गाजा नहीं है…’

रशीद ने कहा कि आज जब कश्मीर को देखती हूं को खुशी महसूस होती है। कश्मीर में हिंसा रोकने के लिए बड़े बदलाव की जरूरत थी। पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने ये करके दिखाया वो भी बिना किसी खूनी संघर्ष या हिंसा के। कश्मीर गाजा नहीं है, यहां लोग केवल विरोध प्रदर्शन में ही शामिल थे। रशीद ने कश्मीर को वापस राज्य का दर्जा दिलाने को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस दिन JKNC और बीजेपी में दोस्ती हो जाएगी उस दिन कश्मीर को राज्य का दर्जा मिल जाएगा। ये दोनों आपस में जितनी जल्दी दोस्ती करके सरकार बना लेंगे उतनी ही जल्दी राज्य का दर्जा मिल जाएगा।

पहले भी कर चुकी हैं मोदी सरकार की तारीफ

शेहला रशीद ने एक समय तक मोदी सरकार की घोर आलोचक रही हैं। जेएनयू में छात्र राजनीति के दौरान उन्होंने सरकार की नीतियों को पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने कश्मीर में धारा-370 हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी, जिसे उन्होंने वापस ले लिया था। पिछले कुछ दिनों से रशीद के स्वर बदले हुए नजर आ रहे हैं। इससे पहले 15 अगस्त को भी उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा था कि कश्मीर में मानवाधिकार रेकॉर्ड लगातार सुधर रहे हैं। सरकार ने एक ही कोशिश में कश्मीरियों की पहचान के संकट को खत्म कर दिया। कश्मीर की नई पीढ़ी को अब संघर्ष के माहौल में बड़ा नहीं होना पड़ेगा।

कौन हैं शेहला रशीद ?

शेहला रशीद जेएनयू की छात्रा रही हैं. उन्होंने JNU से ही सोशियोलॉजी में मास्टर्स की डिग्री ली है. इसके साथ ही उन्होंने इंटरनेशल रिलेशन्स में भी मास्टर्स किया है. शेहला तब चर्चा में आई थीं जब साल 2016 जेएनयू में कथित तौर पर कुछ छात्रों ने भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाए गए थे. इस नारेबाजी से टुकड़े-टुकड़े गैंग निकला और इसका राजनीतिक इस्तेमाल होने लगा. छात्रों की ओर से नारेबाजी से इनकार किया गया था. इस दौरान शहला रशीद ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. शेहला ने अभिव्यक्ति की आजादी का झंडा बुलंद करते हुए कई प्लेटफॉर्म पर खुलकर इसके विषय में बोलती-कहती नजर आई थीं.

चोली-दामन सा रहा है शेहला और विवादों का नाता

शेहला रशीद का नाता लगातार विवादों से रहा है. साल 2016 में वह टुकड़े-टुकड़े गैंग की कथित सदस्य के तौर पर सामने आई थीं. जब JNU में भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाए गए थे तो जेएनयूएसयू के अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उमर खालिद की गिरफ्तारी हुई थी. छात्रों की ओर से नारेबाजी से इनकार किया गया था. इस दौरान शहला रशीद ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. शहला रशीद छात्रों के राजनीतिक प्रदर्शन के अधिकार को सख्ती से डिफेंड करती हुई नजर आती थीं. तब शहला कई न्यूज चैनलों और कार्यक्रमों के प्लेटफॉर्म पर आईं और अभिव्यक्ति की आजादी के समर्थन में खड़ी हुईं.

शहला के विवादित ट्वीट और राजद्रोह का मुकदमा 

इसके बाद 5 अगस्त 2019 को जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटा दिया तो शहला ने केंद्र के इस फैसले का तीखा विरोध किया. शहला ने तब लगातार ट्वीट कर सेना और केंद्र पर आरोप लगाए थे. शहला ने ट्वीट कर कहा था कि लोगों को आतंकित और प्रताड़ित किया जा रहा है, जम्मू-कश्मीर पुलिस के पास कोई अधिकार नहीं है. सेना रात के अंधेरे में लोगों के घर घुस में रही है और लोगों को उठा रही है. सेना ने शहला के इन आरोपों को बेबुनियाद बताया था. शेहला के इस ट्वीट पर उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने ”देश में हिंसा भड़काने के इरादे से जानबूझकर फर्जी खबरें फैलाना” का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था. इस मामले में शहला पर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था.

370 हटाने को सु्प्रीम कोर्ट में दी चुनौती, फिर याचिका ली वापस

शहला रशीद ने जम्मू-कश्मीर के आईएएस शाह फैसल के साथ सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के फैसले को चुनौती दी थी. लेकिन इसी साल जुलाई में आईएएस अधिकारी शाह फैसल और एक्टिविस्ट शहला राशिद ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिकाएं वापस ले ली थी.

पिता ने लगाया था देशद्रोह का आरोप

नवंबर 2020 में शेहला रशीद के पिता अब्दुल राशिद ने जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को पत्र लिखकर अपनी बेटी पर गंभीर आरोप लगाए थे. अब्दुल राशिद ने पत्र में दावा करते हुए लिखा है कि उन्हें अपनी बेटी से जान का खतरा है. जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक को लिखे गए पत्र में अपनी बेटी पर आरोप लगाया कि शेहला रशीद देश विरोधी गतिविधियों में शामिल है. शेहला रशीद के पिता अब्दुल रशीद शौरा का कहना है कि उनकी बेटी शेहला रशीद देशद्रोह समेत कई देश विरोधी गतिविधिय़ों में शामिल हैं. इसके साथ उन्होंने पूरे मामले की जांच करने की मांग की है.

बनाया था राजनीतिक संगठन

शेहला रशीद ने जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नाम से राजनीतिक संगठन बनाने में भी योगदान रहा है. शेहला रशीद ने डॉ. शाह फैसल के साथ मिलकर ही वर्ष 2019 में जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नामक राजनीतिक संगठन भी बनाया था. हालांकि राजनीति में उन्हें आशातीत सफलता नहीं मिली थी.

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