झूठे निकले सरकारी दावे! सर्वे में हुआ खुलासा- 85% प्रवासियों ने खुद चुकाया घर वापसी का किराया

New Delhi: लॉकडाउन में फंसे प्रवासियों को अपने घर लौटने के लिए काफी तकलीफ उठानी पड़ी। सरकारों की ओर से इंतजाम किए गए। बस और श्रमिक स्पेशल ट्रेनें भी चलाई गईं। अब एक वॉलंटियर ग्रुप स्ट्रेंडेड वर्कर्स ऐक्शन नेटवर्क (SWAN) के सर्वे में सामने आया है कि घर जा रहे 85 पर्सेंट मजदूरों को अपना किराया (Migrant Paid Transportation Cost) खुद देना पड़ा।

यह सर्वे सरकारों के उस दावे की पोल खोलता है, जिसमें कहा गया कि बस और ट्रेन का किराया मजदूरों (Migrant Paid Transportation Cost) से नहीं लिया जा रहा है। तमाम राज्यों सरकारों ने दावा किया था कि उन्होंने प्रवासी मजदूरों का किराया अपने पास से दिया है।

सर्वे के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का 28 मई का वह आदेश काफी देरी से आया, जिसमें सरकारों को कहा गया कि वे प्रवासियों के जाने का खर्च उठाएं। जानकारी के मुताबिक, मई की शुरुआत में ही काफी प्रवासी अपने घरों को जा चुके थे। ऑटोमेटेड फोन सर्वे में 1963 प्रवासियों से बात की गई। इसमें से सिर्फ 33 पर्सेंट लोग ही अपने घर को जा पाए, बाकी के 67 पर्सेंट लोग मजबूरी में शहर में ही रुक गए। जो गए भी, उनमें से 85 पर्सेंट ने घर जाने का किराया (Migrant Paid Transportation Cost) अपने जेब से दिया।

घर जाने के लिए चुकाने पड़े हजारों रुपये

‘टु लीव ऑर नॉट टु लीव: लॉकडाउन, माइग्रैंट वर्कर्स ऐंड दीयर जर्नी होम’ नाम से यह रिपोर्ट शुक्रवार को जारी हुई है। यह सर्वे मई के आखिरी और जून के पहले हफ्ते में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, घर जाने वाले 62 पर्सेंट लोगों ने 1500 रुपये से ज्यादा किराया चुकाया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नौकरी या काम ना होने की वजह से ज्यादातर प्रवासियों ने पलायन शुरू किया। घर लौटने की इच्छा या अकेले होने की वजह से पलायन की वजह बहुत कम ही है। कहा गया है कि अभी भी फंसे हुए लोगों में 75 पर्सेंट काम ना मिलने की समस्या से रूबरू हो रहे हैं। गाहे-बगाहे काम मिल जाने से ये अभी भी रुके हुए हैं।

‘काम ना होने और पैसा खत्म होने के कारण घर को लौटे लोग’

SWAN में रिसर्चर अनिंदिता अधिकारी ने बताया, ‘हमें पता चला कि लोग बीमारी के डर से या परिवार के साथ होने के लिए घर नहीं भाग रहे हैं। शहर में बेरोजगारी, कमाई का साधन ना होने, खाने का सामान खत्म होने और शहर में कोई काम ना मिलने के कारण लोग घरों की और चल पड़े थे।’

सर्वे के मुताबिक, जितने लोग घर को गए उसमें से 44 पर्सेंट लोगों ने बस पकड़ी और 39 पर्सेंट को श्रमिक स्पेशल ट्रेन में जगह मिल गई। लगभग 11 पर्सेंट लोग ट्रक, लॉरी और अन्य साधनों से अपने घर को गए। 6 पर्सेंट लोग ऐसे भी थे, जो पैदल ही अपने गांव को लौट गए। रिपोर्ट के मुताबिक, शहरों में फंसे 55 पर्सेंट लोग किसी भी हाल में अपने घर जाना चाहते हैं।

SWAN रिपोर्ट में 5,911 प्रवासी मजदूरों की बात भी शामिल की गई है, जिन्होंने 15 मई से 1 जून के बीच अपनी समस्या बताई है। इसमें से 80 पर्सेंट लोग ऐसे हैं, जिनको सरकारी राशन या खाने की चीजें नहीं मिल रही हैं। 63 पर्सेंट लोग ऐसे भी थे, जिनके पास मुश्किल से 100 रुपये बचे हैं। 57 पर्सेंट लोगों ने फोन करके यह भी बताया कि उनके पास अब ना तो पैसा है और ना ही खाने की चीजें। कुछ तो ऐसे भी थे, जो अब खाना भी नहीं खा पा रहे हैं।

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