प्रश्नकाल को लेकर विपक्षी कर रहे हैं हंगामा, पिछले 5 सालों में हंगामे की भेंट चढ़ा 60 फीसदी वक्त

New Delhi: कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच पहली बार संसद का मॉनसून सत्र (Monsoon Session) 14 सिंतबर से शुरू होने जा रहा है। इससे पहले विपक्ष ने सरकार पर हम’लावर हो रही है।

दरअसल, इस बार लोकसभा और राज्यसभा से प्रश्नकाल (Parliament Question Hour) को हटा दिया गया है। जिसके बाद कांग्रेसी नेताओं से सरकार पर लोकतंत्र की ह’त्या तक का आरोप लगा दिया।

कांग्रेसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सबसे पहले सवाल उठाया और उसके बाद ही तमाम नेताओं से भाजपा को घेरना शुरू कर दिया लेकिन क्या आपको पता है पिछले पांच सालों में राज्यसभा में होने वाले प्रश्नकाल (Parliament Question Hour) का 60 फीसदी वक्त यूं ही बर्बाद हो गया।

हंगामे की भेंट चढ़ा प्रश्नकाल

संसद की दोनों सदनों से ही प्रश्नकाल (Parliament Question Hour) को हटा दिया गया है, जिस पर विपक्ष हंगामा किए हुए है लेकिन पिछले पांच सालों के दौरान प्रश्नकाल का 60 फीसदी से अधिक वक्त हंगामें, रेकॉर्ड देखने और अन्य कार्यों में गंवा दिया गया। इसके अलावा प्रश्नकाल को इससे पहले छह बार सस्पेंड किया गया। आखिरी बार प्रश्नकाल को 2009 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए-2 के दौरान निलंबित किया गया था।

केवल 133 घंटे हुआ काम

राज्य सभा सचिवालय का अनुसंधान प्रभाग सभापति एम वेंकैया नायडू ने पाया कि 2015-19 के दौरान कुल प्रश्नकाल के समय का लगभग 40% ही सवाल उठाने और सरकार से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए उपयोग किया गया था। पांच साल की अवधि में राज्यसभा ने 332 बैठकें हुई। हर दिन एक घंटा प्रश्नकाल के लिए उपलब्ध होता है। हालांकि केवल 133 घंटे और 17 मिनट का उपयोग प्रश्नों को उठाने और प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया गया।

इससे पहले 6 बार रद्द हुआ प्रश्नकाल

इसके अलावा, रिकॉर्ड से पता चलता है कि प्रश्नकाल 1962, 1975, 1976, 1991, 2004 और 2009 में विभिन्न कारणों से रद्द किया गया था। सूत्रों ने कहा कि प्रश्नकाल को स्थगित करने का निर्णय संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा दोनों सदनों के अधिकारियों को सूचित करने के बाद लिया गया था कि सरकार ने राजनीतिक दलों से परामर्श किया था और व्यापक सहमति थी। केवल टीएमसी इस विचार के खिलाफ थी।

सरकार का जवाब

सरकारी सूत्रों ने विपक्ष के इस आरोप को खारिज कर दिया कि संवैधानिक प्रावधान के अनुसार यह सत्र बहुत कम था। एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, ‘सरकार चाहती है कि सदस्य कम समय के लिए दिल्ली में रहें और एक बार अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद वो अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वापस जा सकते हैं।’

दोनों सदनों में होता है प्रश्न और शून्य काल

भारतीय संसद के दोनों सदनों में प्रश्नकाल के बाद का समय शून्यकाल होता है, इसका समय 12 बजे से लेकर 1 बजे तक होता है। दोपहर 12 बजे आरंभ होने के कारण इसे शून्यकाल कहा जाता है। शून्यकाल का आरंभ 1960 व 61 के दशकों में हुआ जब बिना पूर्व सूचना के अविलम्बनीय लोक महत्व के विषय उठाने की प्रथा विकसित हुई। शून्यकाल के समय उठाने वाले प्रश्नों पर सदस्य तुरंत कार्रवाई चाहते हैं।

क्या होता है प्रश्न काल

प्रश्न काल का समय 11 बजे से 12 बजे तक का तय किया गया है। इसमें संसद सदस्यों द्वारा आम लोगों के किसी मामले पर जानकारी सरकार ने मांगते हैं। ये कई मुद्दों पर आधारित होता है ये उस वक्त पर तय करता है कि उस वक्त या कुछ महीनों पहले किस मुद्दे पर सरकार से सवाल कर सकते हैं। इसमें पूछे गए प्रश्नों के जवाब सरकार के प्रतिनिधि देते हैं। प्रश्नकाल के दौरान कई तरह के सवाल होते हैं। जैसे कि तारांकित प्रश्न, गैर-तारंकित प्रश्न, अल्पसूचना प्रश्न, गैर सरकारी सदस्यों से पूछे जाने वाले प्रश्न।

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