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मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर पर आर्टिकल 370 के साथ ही लिए ये बड़े फैसले

नई दिल्ली, 05 अगस्त (वेबवार्ता)। जम्मू कश्मीर को लेकर तमाम अटकलें समाप्त हो गई हैं। जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। गृहमंत्री अमित शाह ने आज राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार का संकल्प पत्र पेश किया जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। शाह ने कहा कि कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 में बड़ा बदलाव किया है। अब सिर्फ आर्टिकल 370 का खंड ए लागू रहेगा। बाकी खंड तुरंत प्रभाव से खत्म कर दिए गए हैं।

Amit-Shah-Police-Memorial

गृहमंत्री ने इसके साथ ही आर्टिकल 35ए भी हटाए जाने का ऐलान किया। शाह ने कश्मीर के पुनर्गठन प्रस्ताव भी पेश किया है। अब जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश होगा, जबकि लद्दाख को भी अलग कर केंद्रीय शासित प्रदेश बनाया गया है। राज्यसभा में अमित शाह के बयान के बाद विपक्ष का जोरदार हंगामा शुरू हो गया है। अमित शाह के कश्मीर पर तीन बड़े ऐलान के बाद विपक्ष की नारेबाजी जारी है। उनका आरोप है कि सरकार ने उन्हें इस तरह के किसी बिल की पहले जानकारी नहीं दी थी।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर में अनिश्चितताओं और तनाव के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर लगभग एक घंटे तक सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक हुई। उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल भी मौजूद थे। सीसीएस बैठक लगभग 40 मिनट चली, और इस बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे।

Narendramodi-Amitshah

सीसीएस बैठक केंद्रीय मंत्रिमंडलीय बैठक से पहले समाप्त हो गई, जिसमें नितिन गडकरी भी मौजूद थे। सूत्रों ने कहा कि समिति ने घाटी में आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक सोमवार तड़के कश्मीर घाटी में सख्त प्रतिबंध लगाए जाने और जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों-उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती तथा जम्मू एवं कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद लोन को नजरबंद करने के बाद हुई है।

आइये जानते है सरकार के जम्मू कश्मीर पर बड़े फैसले-

1-जम्मू कश्मीर को दो भागों में बांटने का प्रस्ताव

सरकार ने जम्मू कश्मीर को दो भागों में विभक्त करने वाला विधेयक जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 को सोमवार को राज्यसभा में पेश किया इससे लद्दाख को अलग कर केन्द्रशासित क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव किया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में इस विधेयक को पेश करते हुये कहा कि जम्मू कश्मीर को दो भागों में बांटा जायेगा। लद्दाख के लोगों की वर्षों से यह मांग थी कि से अलग राज्य का दजार् दिया जाये। इसके मद्देजनर लद्दाख को केन्द्रशासित क्षेत्र का दर्जा दिया जायेगा। लेकिन उसका विधानमंडल नहीं होगा।

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2-जम्मू कश्मीर अब बनेगा केन्द्र शासित प्रदेश

जम्मू कश्मीर को लद्दाख क्षेत्र को अलग कर दिया गया है। इसके साथ ही, लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केन्द्र शासित प्रदेश बनाया गया है। यानि, यहां की पुलिस अब राज्यपाल की अधीन होगी। राज्यसभा में भारी हंगामे और विपक्ष की तरफ से शोर शराबे के बीच कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। जिसके बाद गुस्से में पीडीपी सांसद मीर मोहम्मद फैय्याज ने संविधान की प्रति फाड़ दी।

3-जम्मू कश्मीर को होगा पुनर्गठन

शाह ने राज्यसभा में जम्मू एवं कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 पेश किया । गृह मंत्री अमित शाह ने लद्दाख के लिये केंद्र शासित प्रदेश के गठन की घोषणा की जहां चंडीगढ़ की तरह विधानसभा नहीं होगी। शाह ने राज्यसभा में घोषणा की कि कश्मीर और जम्मू डिविजन विधानसभा के साथ एक अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां दिल्ली और पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी।

शाह ने कहा कि विगत में 1950 और 1960 के दशकों में तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने इसी तरीके से अनुच्छेद 370 में संशोधन किया था। हमने भी यही तरीका अपनाया है।

आखिर धारा 370 के हटाने के क्‍या मायने हैं…

-इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती।

-इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्‍त करने का अधिकार नहीं है।

-जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता (भारत और कश्मीर) होती है।

-भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यन्त सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है।

-जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग है. वहां के नागरिकों द्वारा भारत के राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना अनिवार्य नहीं है।

-इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते।

-भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती।

-जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।

-भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं।

-जम्मू-कश्मीर की कोई महिला अगर भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाएगी. इसके विपरीत अगर वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाएगी।

-धारा 370 की वजह से कश्मीर में आरटीआई और सीएजी जैसे कानून लागू नहीं होते हैं।

-कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू है।

-कश्मीर में पंचायत को अधिकार प्राप्त नहीं है।

-धारा 370 की वजह से ही कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है।

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