अमेरिका ने भी माना, भारत को दोस्त रूस पर ज्यादा भरोसा.. भारतीय सेना के पास 86 फीसदी रूसी हथियार

New Delhi: Military Equipment India Depends on Russia: लद्दाख में चीन के साथ चरम तनाव के बाद भले ही भारत और अमेरिका के बीच आपसी रिश्ते मजबूत हो रहे हों लेकिन आज भी हथियारों के मामले में भारतीय सेना रूस पर ही निर्भर है।

सेना के पास रूस से मिले हथियारों का जखीरा है और मॉस्को पर यह निर्भरता (Military Equipment India Depends on Russia) आगे भी जारी रहेगी क्योंकि, 2014 से 55 फीसदी से ज्यादा रक्षा उपकरणों का आयात रूस से ही हुआ है।

’86 फीसदी उपकरण रूसी ऑरिजन के’

अमेरिका स्थित स्टिम्सन सेंटर के समीर लालवानी और अन्य की स्टडी के अनुसार, भारतीय सेना में 86 फीसदी उपकरण, हथियार और प्लेटफॉर्म रूस से आयात किए हुए हैं। नेवी में 41 प्रतिशत, वायुसेना में दो तिहाई उपकरण रूस से मंगाए हुए हैं। सेना में यह आंकड़ा 90 फीसदी तक का है।

वायुसेना से लेकर नेवी तक में रूसी हथियार

समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका स्थित स्टिम्सन सेंटर के एशिया और साउथ एशिया के डायरेक्टर और सीनियर फेलो लालवानी ने कहा, ‘भारत की रूसी उपकरणों पर निर्भरता सेना में सबसे अधिक है। यही नहीं, वायुसेना और नेवी में भी यही हालात हैं।

मारक क्षमता वाले प्लेटफॉर्म के मामले में रूस पर निर्भरता ज्यादा है। इन हथियारों और उपकरणों की लाइफस्पैम को देखते हुए कहा जा सकता है कि अभी रूस पर निर्भरता बनी रहेगी। भारत-अमेरिका के बीच बने रिश्ते को अभी कई मोर्चों पर काम करना होगा।’

रूस के ये हैं मारक हथियार

नेवी में शामिल न्यूक्लियर पनडुब्बी INS विक्रमादित्य और चक्र-II भी रूस के हैं। ऐसे ही लद्दाख में तैनात सेना के टी-90 और टी-72 युद्धक टैंक रूसी ऑरिजन के हैं। वायुसेना के सुखोई 30MKI लड़ाकू विमान, जिसका नासिक में HAL में उत्पादन होता है, वह भी रूसी ऑरिजन के हैं। देश का एकलौता न्यूक्लियर क्षमता से लैस सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिलाइल भी रूस के साथ मिलकर तैयार किया गया है।

अमेरिका से भारत कर रहा है आयात

ऐसा नहीं है कि भारत के पास सभी सैन्य उपकरण रूसी ही हो बल्कि कुछ अमेरिका के भी हैं लेकिन रूस की तुलना में उनकी मौजूदगी बेहद कम हैं। अपाचे और चिनूक हेलिकॉप्टर को अमेरिका ने भारत को दिया है और ये अभी लद्दाख में तैनात हैं।

इसके अलावा M777 होवित्जर गन का आयात भी अमेरिका से किया गया है। बोइंग C-17 और C-130J के जरिए वायुसेना भारी सामानों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती है। इसे भी अमेरिका से ही खरीदा गया है। इसके अलावा नेवी को पनडुब्बी के बारे में पता लगाने वाले P81 एयरक्राफ्ट भी अमेरिका से मिले हैं।

‘रूस के हथियार भारत के लिए बेस्ट’

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इन सभी सिस्टम का अपना महत्व है और प्रयोग है। सवाल यह नहीं है कि हथियार रूस के हैं या अमेरिका के बल्कि यह है कि युद्ध के दौरान हम इनका इस्तेमाल कितना बेहतर तरीके से करते हैं।’

अरबों का हथियार भारत को देता है रूस

स्टॉकहोम स्थित SIPRI (Stockholm International Peace Research Institute) के अनुसार, 2014 में बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद भी रूस भारत को रक्षा उपकरणों का निर्यात करने वाला प्रमुख देश बना रहा और उसने 9.3 अरब डॉलर का निर्यात भारत को किया। अमेरिका इस दौरान 2.3 अरब डॉलर के निर्यात के साथ दूसरे नंबर पर रहा।

रूस पर निर्भरता के पीछे कई कारण

रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘इसके पीछे कई कारण हैं। पहला तो लीगेसी का मुद्दा है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा संबंध हैं और दोनों देश एक-दूसरे के सिस्टम से वाकिफ हैं। दूसरा निर्भरता की बात। और यह रूस के पहले के ट्रैक रिकॉर्ड पर आधारित है। तीसरी बात है, जिस तरह के स्पेशल उपकरण रूस हमें देता है, वह कोई और नहीं दे पाता है। सबसे ताजा उदाहरण S-400 ऐंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम का है। हमने रूस से न्यूक्लियर क्षमता से लैस पनडुब्बी भी लीज पर लिया है। यही अंतर पैदा करता है।’

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