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मोदी सरकार से 5 हजार करोड़ की मदद मांगकर घिरे केजरीवाल, BJP नेता बोले- ऐड को पैसे, सैलरी को नहीं

New Delhi: दिल्ली सरकार ने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए केंद्र से पांच हजार करोड़ रुपये की तुरंत (Manish Sisodia Urgent 5000 Crore Help) मदद मांगी है। अब इसपर राजनीति शुरू हो चुकी है।

विपक्ष के नेताओं ने दिल्ली सरकार और सीएम अरविंद केजरीवाल को घेरना शुरू कर दिया है। कहा गया है कि सरकार ने बजट के पैसों को पहले विज्ञापनों में खर्च कर दिया और अब मदद (Manish Sisodia Urgent 5000 Crore Help) मांग रही है। बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी ने दिल्ली सरकार पर यह आरोप लगाए हैं। कभी आप पार्टी का हिस्सा रहे कुमार विश्वास ने भी केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा है।

बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार बाकी देश के लोगों के साथ-साथ दिल्ली के लोगों की भी मदद कर रही है। उन्होंने दावा किया कि लोगों के खातों में 1500, 1500 रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। इसके साथ वृद्धा पेंशन आदि दिल्ली के लोगों को भी मिली। बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली सरकार का बजट अब 65 हजार करोड़ रुपये का है, यह पहले शीला दीक्षित के वक्त में कुल 39 हजार करोड़ का था। पहले ये पैसे विज्ञापन पर खर्च किए गए और अब मदद मांगी जा रही है।

बिधूड़ी ने यह आरोप भी लगाया कि दूसरे राज्यों में भी मॉब लिंचिंग या किसी ऐसी वजह से मौत होती है तो केजरीवाल 1 करोड़ रुपये की सहायता कर देते हैं। बिधूड़ी ने कहा दिल्ली का पैसा ऐसे राजनीति करने के लिए बाहर खर्च किया जाता है।

कुमार विश्वास ने कहा- दिल्ली को बनाया मौत का कुआं

वहीं कभी आम आदमी पार्टी का हिस्सा रहे कवि कुमार विश्वास ने भी विज्ञापनों का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि, ‘लाखों-करोड़ की चुनावी-रेवड़ियां, टैक्सपेयर्स के हजारों करोड़ अखबारों में 4-4 पेज के विज्ञापन व चैनलों पर हर 10 मिनट में चेहरा दिखाने पर खर्च करके, पूरी दिल्ली को मौत का कुआं बनाकर अब स्वराज-शिरोमणि कह रहे हैं कि कोरोना से लड़ रहे डॉक्टरों को सैलरी देने के लिए उनके पास पैसा नहीं हैं।’

आप का दामन छोड़ बीजेपी में आए कपिल मिश्रा ने लिखा कि, तो करोड़ों रुपये विज्ञापनों में क्यों फूंक रहे हो? परसों हर चैनल में 14 मिनट का केजरीवाल का विज्ञापन था। एक दिन में 25 करोड़ रुपये फूंके, हर रोज सिर्फ अखबारों में 2-3 करोड़ के विज्ञापन, टीवी पर रोजाना 4-5 करोड़ रुपये के विज्ञापन, पैसे नहीं हैं तो ये बर्बादी क्यूं?’

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