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कुछ जगहों से पीछे हटे चीनी सैनिक लेकिन ईस्टर्न लद्दाख के फिंगर-4 पर तनाव बरकरार

New Delhi: ईस्टर्न लद्दाख में लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर गतिरोध (Ladakh standoff) खत्म होने की दिशा में भारत और चीन कुछ कदम आगे बढ़े हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ जगहों पर चीनी सैनिक पीछे हटे हैं और उन्होंने अपने टेंट भी कम किए हैं।

हालांकि फिंगर-4 को लेकर दिक्कत (Ladakh standoff) बरकरार है। सूत्र बातते हैं कि पैंगोंग त्सो के पास फिंगर-4 पर गतिरोध दूर करने में वक्त लग सकता है क्योंकि यहां से चीनी सैनिक पीछे हटने को फिलहाल तैयार नहीं है और वहां माहौल में नरमी अब तक नहीं आई है।

फिंगर-4 है गतिरोध का सबसे बड़ा पॉइंट6 जून को हुई कोर कमांडर स्तर की मीटिंग में दोनों तरफ के सैनिकों के पीछे हटने को लेकर बात हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग में गतिरोध के चार पॉइंट्स की पहचान की गई जो पैंगोग त्सो एरिया में फिंगर-4, गलवान वैली में पेट्रोलिंग पॉइंट-14, पेट्रोलिंग पॉइंट-15 और हॉट स्प्रिंग एरिया है।

सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग में तय किया गया कि गतिरोध के अलग-अलग पॉइंट पर लोकल कमांडर स्तर पर बातचीत की जाएगी। तब उम्मीद जताई गई कि डेलिगेशन लेवल और हाइएस्ट कमांडर लेवल की बातचीत से हल निकल सकता है। हालांकि फिंगर-4 को लेकर गतिरोध पहले की तरह ही बरकरार है।

चीन ने ब्लॉक कर दिया एरिया

एलएसी पर गतिरोध का सबसे बड़ा पॉइंट ही फिंगर-4 ही है। यहां पर चीनी सैनिक बड़ी संख्या में डटे हैं। पहले भारतीय सैनिक फिंगर-8 तक पेट्रोलिंग पर जाते थे, लेकिन चीनी सैनिकों ने फिंगर-4 के पास ही ब्लॉक कर दिया है। भारत का दावा है कि एलएसी फिंगर-8 से गुजरती है।

सूत्रों के मुताबिक, कुछ जगहों से चीनी सैनिकों के पीछे हटने का कदम भरोसा बढ़ाने और बातचीत का माहौल सकारात्मक बना रहे, इसलिए उठाया गया है, लेकिन असली गतिरोध तो फिंगर-4 पर है।

बुधवार को हाइएस्ट कमांडर लेवल मीटिंग

6 जून की मीटिंग में हुई बातचीत के आधार पर बुधवार को फिर से हाइएस्ट कमांडर लेवल की मीटिंग होनी है। साथ ही अगले 8-10 दिनों में अलग-अलग पॉइंट पर लोकल कमांडर लेवल से लेकर डेलिगेशन लेवल की मीटिंग होगी। सूत्रों के मुताबिक, फिंगर-4 का हल इतनी जल्दी निकलने की उम्मीद नहीं दिख रही।

मीटिंग में भी माना गया कि यहां पर गतिरोध लोकल कमांडर या हाइएस्ट लेवल मीटिंग से दूर नहीं हो पाएगा। इसके लिए फिर से कोर कमांडर स्तर की मीटिंग बुलाई जा सकती है। इस बार यह मीटिंग भारत की तरफ होगी। 6 जून की मीटिंग चीन की तरफ मॉलडो में हुई थी और अब जो मीटिंग बुलाई जाएगी वह भारत की तरफ चुशूल में हो सकती है।

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