Kashmir Encounter : कहीं आतंकियों के जाल में तो फंस नहीं गए जवान? पूरी घटना से तो मिल रहा है यही संकेत

Kashmir Encounter : कहीं आतंकियों के जाल में तो फंस नहीं गए जवान? पूरी घटना से तो मिल रहा है यही संकेत

हाइलाइट्स

  • कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान पांच जवानों का बलिदान
  • सेना को पीर पंजाल इलाके में तीन से चार आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली थी
  • खुफिया जानकारी पर सेना की टुकड़ी मौके पर गई और इलाके को घेर लिया
  • हालांकि घात लगाए आतंकियों ने सेना पर भारी गोलीबारी की और पांच जवान शहीद हो गए

नई दिल्ली/श्रीनगर
कश्मीर में सोमवार को देश ने अपने पांच और जांबाजों को खो दिया है। सुरनकोट तहसील के पीर पंजाल में आतंकियों के जुटने की सूचना मिलने के बाद सैनिकों की टुकड़ी मौके पर पहुंची थी। हमारे जांबाज सैनिकों ने आतंकियों को घेर लिया था, लेकिन एक चूक भारी पड़ गई। पाकिस्तान से सीमा में दाखिल हुए इन आतंकियों के पास इतना गोला-बारूद है, इसका अंदाजा वो लगा नहीं सके।

नौशेरा सेक्टर के जिस इलाके में यह मुठभेड़ हुई, वह एलओसी से सटा हुआ है। पाकिस्तान से आ रहे आतंकी घाटी में दाखिल होने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। कश्मीर में मौजूद उनके आका उन्हें घाटी तक सुरक्षित पहुंचाने का पूरा इंतजाम करते हैं। रविवार रात भी ऐसा ही हुआ था। सीमा पार से आतंकी आए और घाटी में बैठे उनके सहयोगियों ने उन्हें ठिकाने पर पहुंचाने में मदद की।

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गुप्तचरों ने सेना को इसकी खबर दी। पता चला कि तीन-चार आतंकवादी इलाके में छिपे हैं। सैनिकों ने इलाके को घेर लिया और आतंकियों को सरेंडर करने का ऑफर दिया। लेकिन, आतंकी भी तैयार थे। अब तक की सामने आई घटना से ऐसा लगता है कि जैसे आतंकियों को इस बात की या तो भनक थी कि उनके बारे में सेना को जानकारी मिल चुकी है या फिर यह भी संभव है कि आतंकियों ने खुद ही अपनी मौजूदगी की सूचना लीक करवाई हो।

अगर ऐसा हुआ तो कहा जा सकता है कि आतंकवादियों ने पूरा जाल बिछाकल सैनिकों को मौके पर बुलाया। शायद सैनिकों को आतंकियों की यह चाल समझ नहीं आई और वो गुप्तचर की सूचना मानकर मौके पर पहुंच गए। उन्हें अगर इसका थोड़ा भी अंदाजा होता कि आतंकियों के जुटने की उन्हें खुफिया जानकारी नहीं मिली है बल्कि आतंकियों ने ही यह जानकारी लीक की और वो घात लगाए बैठे हैं तो हमारे सैनिकों की रणनीति कुछ और होती।

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बहरहाल, आतंकियों ने मुठभेड़ के दौरान भारी गोलीबारी की। हमारे सैनिकों को इस हद तक जवाबी कार्रवाई का अंदाजा नहीं था। वो जब तक माजरे को समझ पाते तब तक पांच सैनिक हमले की चपेट में आकर शहीद हो गए। अब सेना यह पता लगाने में जुट गई है कि क्या उसके गुप्तचर ने आतंकियों से मिलीभगत कर ली थी या फिर गुप्तचर भी आतंकियों को चालबाजी का शिकार हो गया था?

यह भी संभव है कि आतंकियों ने गुप्तचर की पहचान कर ली हो और उसे डरा-धमकाकर अपनी मौजूदगी की सूचना सेना तक पहुंचाने को कहा है। खैर, जो भी हुआ होगा, उसका दूध का दूध और पानी का पानी तो होना ही है। अभी सेना का पूरा ध्यान पीर पंजाल में छिपे आतंकियों को हर हाल में मार गिराने पर है। वहां मुठभेड़ जारी है।