LAC पर चीन के खिलाफ खास तैयारी, इजराइली ड्रोन और स्पेशल फाॅर्स की तैनाती

New Delhi: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बनी तनावपूर्ण स्थितियों के बीच चीन की हरकतों की निगरानी के लिए सेना और एयरफोर्स पूरी चौकसी बरत रहे हैं। गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए संघर्ष (Galwan Valley Clash) के बाद इस इलाके में निगरानी के लिए अब उन मानवरहित ड्रोन्स (Israel Drones in India) को लगा दिया गया है, जिन्हें बीते दिनों मोदी सरकार ने इजराइल से खरीदा था।

एलएसी पर सेना के साथ भारत तिब्बत सीमा पुलिस (Ladakh Situations) के जवानों को भी फॉरवर्ड इलाकों में भेजा गया है। इसके अलावा उच्च पर्वतीय क्षेत्र (High Altitude War Area) में लड़ने की ट्रेनिंग लेने वाली घातक टीमों को भी सेना के साथ फॉरवर्ड लोकेशंस पर भेजा जा चुका है।

ITBP को सेना के साथ लेह के इलाकों में भेजने का फैसला डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस ले. जनरल परमजीत सिंह और आईटीबीपी (Indian Army in Ladakh) के डीजी एसएस देसवाल के लेह दौरे के बाद हुआ है।

दोनों उच्च अधिकारियों के साथ सेना की 14वीं कोर के कमांडर ले. जनरल हरिंदर सिंह भी लेह पहुंचे थे, जहां उन्होंने वरिष्ठ अफसरों को यहां की सामरिक तैयारियों पर फीडबैक दिया।

इजराइल से और आर्म्ड ड्रोन खरीदने की तैयारी

नरेंद्र मोदी सरकार ने भारतीय सेना को चीनी सेना की किसी भी नापाक हरकत से अपने तरीकों पर निपटने की पूरी छूट दे दी है। इसके अलावा फोर्सेज को 500 करोड़ रुपये का स्पेशल फंड भी दिया गया है, जिससे कि आपात स्थिति में किसी भी तरह के हथियार खरीदे जा सकें। इसके अलावा चीनी पीएलए की तरह जल्दी ही आर्म्ड ड्रोन्स खरीदने की तैयारी भी की जा रही है। इसके लिए जल्द ही यूएस या इजराइल से एक डिफेंस डील की जा सकती है।

IAF ने LAC पर झड़प के बाद लद्दाख में एयर पैट्रोलिंग बढ़ा दी है। इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, लेह के लोगों की नींद सुबह IAF के लड़ाकू विमानों की गड़गड़ाहट से खुलती है। उनके लिए यह सबकुछ 1999 के मई-जुलाई जैसा है जब करगिल युद्ध के दौरान इतनी सक्रियता देखने को मिली थी। IAF के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्‍टर्स लगातार इन एरियाज में चक्‍कर लगा रहे हैं। जम्‍मू और कश्‍मीर, पंजाब और हरियाणा के ऐडवांस एयर बेसेज पर फाइटर एयरक्राफ्ट तैनात किए गए हैं।

करगिल में मिले अनुभव बनेंगे मददगार

आईटीबीपी के अलावा उन जवानों को भी एलएसी के पास के इलाकों में भेजा जा रहा है, जिन्हें उच्च पर्वतीय इलाकों का अनुभव हो। इसके अलावा करगिल के वक्त में लेह और द्रास के इलाकों में हुए सामरिक अनुभव भी फौज के लिए बड़ी मदद का जरिया बन सकते हैं।

ऊंचे इलाकों में रहने वालों को मिलेगा फायदा

भारतीय सेना के पूर्व अध्यक्ष रहे एक अधिकारी ने कहा कि पहाड़ी इलाकों में लड़ाई के हालात आम जंग से बिल्कुल अलग होते हैं। इस लड़ाई में ऊंचे इलाके में रहे जवानों को एडवाटेंड मिल सकता है। भारत के तमाम इलाके ऐसे हैं, जहां लंबे वक्त से सेना उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में रह चुकी है। ऐसे में भारतीय सेना को चीन की सेना से अनुभव के आधार पर ज्यादा फायदा मिल सकता है।

जवानों को पूरी छूट

लद्दाख के वर्तमान हालात क्या हैं, इसे लेकर अभी सरकार बहुत कुछ पब्लिक डोमेन में लाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि ये जरूर है कि चीन की किसी भी हरकत पर जवानों को एक कदम भी पीछे ना हटने और पूरी तैयारी के साथ जवाब देने के लिए सशक्त किया जा रहा है।

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