IPS Shailendra Mishra

IPS शैलेंद्र मिश्रा की जुबान पर ‘बसता’ है भारत.. भोजपुरी, मराठी, कश्मीरी समेत 10 भाषाओं का ज्ञान

New Delhi: वह महाराष्ट्र से ताल्लुक रखते हैं। बिहार के कामगारों को समझाने के लिए वह भोजपुरी बोल लेते हैं। तो कभी कश्मीरी में बात करके वह आतंकी को आसानी से सरेंडर के लिए मनवा लेते हैं। जी हां, जम्मू-कश्मीर काडर के आईपीएस शैलेंद्र मिश्रा (IPS Shailendra Mishra) को दस भाषाओं का ज्ञान है।

वह इन भाषाओं क इस्तेमाल करके कई मामलों को आसानी से सुलझा भी लेते हैं। कश्मीर में तैनात रहते हुए शैलेंद्र मिश्रा (IPS Shailendra Mishra) कश्मीरी बोलते हैं। मराठी होने के बावजूद वह कश्मीर की जनता में अपनी अलग छवि बना चुके हैं। कश्मीर की आम जनता उन पर भरोसा करती है।

भाषा ज्ञान से बड़े मामलों को आसानी से सुलझा लेते हैं

आईपीएस शैलेंद्र (IPS Shailendra Mishra) ऐसे अफसर हैं, जिनसे जिस भाषा में बात की जाए वह उसी भाषा में जवाब देंगे। शयद वह देश के पहले आईपीएस होंगे, जिसे इतनी भाषाओं का ज्ञान है। इन भाषाओं को वह समझ भी सकते हैं और आसानी से बात भी कर लेते हैं। अपने इस भाषा ज्ञान का इस्तेमाल वह कई बड़े मामलों को सुलझाने में करते रहे हैं।

शोपियां एनकाउंटर से प्रदर्शन तक…कश्मीरी बोलकर संभाले हालात

शोपियां में मुठभेड़ हुई तो तो आतंकी को सरेंडर करने के लिए कश्मीरी में कहा गया। घाटी में तैनाती के दौरान अगर कहीं पर प्रदर्शन या फिर बवाल हुआ तो लोगों को उन्हीं की भाषा में समझाकर मामले को शांत करवाया गया। कश्मीर में अलग-अलग जगहों पर तैनात रहते हुए उन्होंने लोगों का हमदर्द बनकर काम किया। उनसे उन्हीं की भाषा में बात की, जिससे लोगों को एहसास हुआ कि पुलिस उनके साथ है।

जब बिहार के कामगारों को भोजपुरी बोलकर कराया शांत

2009 बैच के आईपीएस शैलेन्द्र मिश्रा इन दिनों कठुआ जिले में बतौर एसएसपी तैनात हैं। महाराष्ट्र के रहने वाले आईपीएस शैलेन्द्र को अंग्रेजी, मराठी, हिंदी, उर्दू, कश्मीरी, भोजपुरी, गुजराती, पंजाबी और डोगरी भाषा आती है। इस साल लॉकडाउन के दौरान कठुआ में चिनाब मिल में एक बड़ा बवाल हो गया था। सैकड़ों की तादाद में कर्मचारी सड़क पर उतर आए थे। गुस्साए लोगों ने तोड़फोड़ की और और हाइवे को बंद करके धरने पर बैठ गए थे। पुलिस इस भीड़ को कंट्रोल नहीं कर पाई थी।

आखिरकार एसएसपी शैलेंद्र मिश्रा मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि कर्मचारी बिहार से थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर उन्हें भोजपुरी में समझाया। देखते ही देखते कर्मचारी मान गए और सड़क खाली कर दी।

केंद्रीय मंत्रियों ने भी आईपीएस की तारीफ की थी

आईपीएस शैलेंद्र की इस पहल की प्रशंसा केंद्रीय मंत्रियों ने भी की थी। उस समय उनके वीडियो भी खूब वायरल हुए थे। इसी तरह से कश्मीर के जिलों में बतौर एसएसपी तैनात रहते हुए वह जनता से उनकी भाषा में बात करते थे। इससे कश्मीर में जनता के बीच पुलिस का विश्वास बढ़ाने में मदद मिली। आईपीएस मिश्रा को इतनी भाषाओं का ज्ञान होने से काफी फायदा भी मिलता है। वह प्रदेश के पहले ऐसे बाहरी अफसर हैं, जिन्हें कश्मीरी समझना और बोलना दोनों आता है।

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