लद्दाख: सर्दी में चीनी सैनिकों के छक्के छुड़ाने को तैयार हैं 3 तरह के ये देसी हेलिकॉप्टर

New Delhi: बर्फीली चोटियों पर यु;द्धक अभियान चलाने और जीतने में महारथ हासिल कर चुकी भारतीय सेना (Indian Army) को लद्दाख में चीन के खिलाफ एक और बड़ी ताकत हासिल (Indian Choppers) होने जा रही है।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के चेयरमैन आर. माधवन ने कहा कि देश में बने तीन तरह के हेलिकॉप्टर (Indian Choppers) लद्दाख में सर्दियों में सैनिकों की तैनाती में मदद के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

बर्फीली चोटियोंपर सैनिकों को रशद पहुंचाएंगे ALH

दो नए तरह के चॉपर्स (Indian Choppers) इस बर्फीले रेगिस्तान की ऊंची चोटियों पर अपनी क्षमता का परिचय अभी से ही दे रहे हैं। इससे पहले, वजन में बेहद हल्के अडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) सियाचिन ग्लेशियर पर सेना को रशद पहुंचाने में अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं।

भारत की थल सेना और वायुसेना इन हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रही हैं। इन्हें बनाने वाली स्वदेशी कंपनी एचएएल पूरी तरह आश्वस्त है कि सर्दी के मौसम में लद्दाख में ये हेलिकॉप्टर्स सैन्य साजो-सामान पहुंचाने में इनका और भी ताकतवर रूप देखने को मिलेगा।

ठंड में बढ़ जाता है ALH का प्रदर्शन

एचएएल चीफ आर. माधवन ने कहा, ‘आर्मी और एयर फोर्स, दोनों ही हाई अल्टिट्यूट कपैबिलिटी से लैस हेलिकॉप्टरों का उपयोग कर रही हैं। ये हेलिकॉप्टर उन जगहों पर पर्याप्त मात्रा में पेलोड पहुंचा सकते हैं जहां दूसरे देशों की सेनाओं की हालत पस्त हो सकती है। 20 से ज्यादा हेलिकॉप्टर उड़ान भर रहे हैं और सपॉर्ट टीमें काम कर रही हैं।’

एचएएल निर्मित एक भी हल्के हेलिकॉप्टर (ALH) परिचालन से परे नहीं हैं। इसका मतलब है कि सभी हेलिकॉप्टर बिना किसी समस्या के उड़ान भर रहे हैं। माधवन ने कहा कि आने वाली सर्दियों में इन हेलिकॉप्टरों की क्षमता और भी बढ़ जाएगी क्योंकि तापमान गिरने से इनका प्रदर्शन और भी बढ़ जाता है।

यु’द्ध में दु;श्म;न के छक्के छुड़ाएंगे LCH

HAL ने हल्के हेलिकॉप्टरों के अलावा दो लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर्स (LCH) भी बनाए हैं जो लद्दाख में आर्म्ड फोर्सेज के इस्तेमाल में आएंगे। एएलएच जहां रशद पहुंचाएंगे तो एलसीएच युद्धक अभियानों में भाग लेंगे। एचएएल दो यु’द्ध अभियानों में भाग लेने को दो हेलिकॉप्टर सेना को दे चुकी है। हालांकि, सेना ने कंपनी को अभी इनका ऑर्डर नहीं दिया है। माधवन का कहना है कि सेना ने इनके प्रदर्शन की तारीफ जरूर की है।

एयरफोर्स ने लद्दाख में भारी अपाचे अटैक हेलिकॉप्टरों को भी तैनात कर रखा है। लेकिन, एलसीएच का विशेष निर्माण ऊंची-ऊंची चोटियों पर युद्ध लड़ने के लिहाज से ही किया गया है।

माधवन ने बताया, ‘कारगिल युद्ध के समय इसका अभाव खटक रहा था। हमने अनुभव के आधार पर एलसीएच पर काम करना शुरू किया और अब ये आर्मी और एयरफोर्स के लिए महत्वपूर्ण ऐसेट हो गए हैं क्योंकि ये ऊंची चोटियों पर काम आते हैं।’

उन्होंने कहा कि चॉपर दुश्मन के रेडार को छलावा देने में बेहद माहिर हैं। इन हल्के युद्धक हेलिकॉप्टरों में पॉड्स लगे हैं जो मिसाइल और रॉकेट्स कैरी कर सकते हैं। हालांकि, युद्ध सामग्रियों के ऑर्डर अब तक नहीं मिले हैं। इसलिए अभी इन हेलिकॉप्टरों में गन पॉड्स ही लगे हैं।

ऑल राउंडर की भूमिका में होंगे LUH

लद्दाख में तीसरे तरह के हेलिकॉप्टर का भी ट्रायल हो चुका है। ये हैं लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर्स (LUH) जिन्हें चीता सीरीज के हेलिकॉप्टरों की जगह लेनी है। ये चॉपर्स रशद पहुंचाने से लेकर घायल सैनिकों को युद्ध स्थल से निकालने तक के विभिन्न अभियानों में काम आएंगे।

एक अधिकारी ने कहा, ‘हमने गर्म जलवायु वाली ऊंची चोटियों पर एलयूएच का ट्रायल किया। यह ट्रायल दो-तीन सप्ताह पहले पूरा हो चुका है। एयरफोर्स के लिए तो यह पिछले साल ही उपयोगी साबित हो चुका था। अब आर्मी ने भी इसे उपयोगी करार दे दिया है।’

दरअसल, सर्दियों में कई सीमाई इलाकों में सड़क मार्ग से सेना को रशद पहुंचाना असंभव हो जाएगा। तब पूर्वी लद्दाख के अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों के लिए ये चॉपर्स लाइफ लाइन साबित होंगे। ये चॉपर्स सैनिकों को लाने-ले जाने के साथ-साथ सैन्य साजो-सामान और रशद भी पहुंचाएंगे। साथ ही, मेडिकल इमर्जेंसी की सूरत में ये अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन करेंगे।

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