भारतीय सेना के पर्वतारोहियों ने फतह की पैंगोंग त्सो की सबसे ऊंची चोटियाँ, भारतीय पर्वतारोहण इतिहास में रचा गया नया अध्याय

नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। भारतीय सेना के पर्वतारोहियों की एक संयुक्त टीम ने लद्दाख के दुर्गम पैंगोंग त्सो क्षेत्र की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ाई कर भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह सफलता तीन प्रमुख पर्वतारोहण संस्थानों—जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (पहलगाम), नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (उत्तरकाशी), और हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान (दार्जिलिंग)—के प्रशिक्षकों के साहस, धैर्य और सामूहिक समर्पण की गवाही देती है।

ऐतिहासिक चढ़ाई: 6,710 मीटर की ऊँचाई पर लहराया तिरंगा

यह पर्वतारोहण अभियान कर्नल हेम चंद्र सिंह के नेतृत्व में 24 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग से आरंभ हुआ था। टीम ने 29 जुलाई को माउंट मेरग-3 (6,480 मीटर) और फिर 2 अगस्त को माउंट कांगजू कांगरी (6,710 मीटर) की सफल चढ़ाई की।

चढ़ाई के दौरान मौसम की विकट परिस्थितियाँ, कम ऑक्सीजन और बर्फीले तूफान जैसी कठिनाइयाँ सामने आईं, लेकिन टीम ने अद्भुत सहनशक्ति और साहस का प्रदर्शन करते हुए इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया।

अभियान में शामिल प्रमुख सदस्य:

  • कर्नल हेम चंद्र सिंह – प्रमुख अभियान नेता

  • मानद लेफ्टिनेंट (सेनि) रफीक अहमद मलिक

  • हवलदार सज्जाद हुसैन

  • नायक भारत सिंह

  • हवलदार एन.ए. योगेश

  • सूबेदार मेजर हजारी लाल

  • नायब सूबेदार भूपिंदर सिंह

  • रोबिन गुरुंगजुबिन राय

प्रशंसा और प्रेरणा का स्रोत

जवाहर पर्वतारोहण संस्थान के अनुसार, यह सफलता भारतीय पर्वतारोहियों की “अदम्य साहसिक भावना, अनुशासन और तकनीकी दक्षता” की परिचायक है। यह उपलब्धि देश के साहसिक खेलों के क्षेत्र में बढ़ती विशेषज्ञता और संभावनाओं को भी उजागर करती है।

पर्वतारोहण विशेषज्ञों और रक्षा प्रतिष्ठानों ने इस उपलब्धि को युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्रोत बताया है, जो आने वाले समय में देश को और ऊंचाइयों पर पहुंचा सकते हैं।

मुख्य संदेश:

“जहाँ हौसला हो बुलंद, वहाँ पहाड़ भी झुक जाते हैं।”

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