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-45 डिग्री में भी सरहद में डटे रहते हैं भारतीय जवान.. PLA कर पाएगी भारतीय सेना का मुकाबला ?

New Delhi:भारत और चीन (India-China Relation) के बीच कई लड़ाई बहुत पुरानी है और इसका इतिहास भी बहुत लंबा चौड़ा है। दोनों के बीच लगभग 3500 किलोमीटर की सरहद है जिस पर चीन हमेशा विस्तारवाद की नीति अपनाने की सोचता है।

अब हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि सर्दियों का मौसम आने वाला है लेकिन चीन की सेना Line Of Actual Control से पीछे नहीं हो रही है। अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जानलेवा ठंड में भी दोनों सेनाएं आमने-सामने डंटी रहेंगी।

सर्दियों में भी डटा रहेगा चीन

इंडियन आर्मी (Indian Army In LAC) सूत्रों के मुताबिक चीन की तैयारियां देखकर लगता है कि वह जाड़ों में (India Army In Ladakh) भी डटे रहने की तैयारी के साथ आया है। भारतीय सेना भी इसके लिए पूरी तरह तैयार है।

सेना के एक अधिकारी के मुताबिक नवंबर आखिर से वहां तापमान एकदम घटना शुरू हो जाएगा और फिर तापमान माइनस 40 और माइनस 45 तक पहुंच जाएगा। ऐसे में चीन के सैनिक कितने वक्त तक डटे रहेंगे इसका फिलहाल अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। चीन के सैनिकों ने टेंट जरूर लगाए हैं लेकिन क्या वह माइनस 40 डिग्री के लिए भी तैयार हैं इसका पता बाद में ही चलेगा।

भारतीय सेना के हौसले के आगे चीन पस्त

कड़ाके की ठंड में वहां पर एक सेकंड का समय बिताना भी बहुत मुश्किल होता है। जानकार बताते हैं कि ठंड का आलम ऐसा होता है कि एक सेकंड में पानी बर्फ बन जाता है। फिलहाल क्या ऐसी सिचुएशन कभी और भी पड़ी है या नहीं। भारतीय सेना चीन के साथ हुए विवाद को दोहराना नहीं चाहती इसलिए वो लद्दाख में लंबी सर्दियों की तैयारी में लग गई है।

उच्च सरकारी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि भारतीय सेना ने अमेरिका, रूस और यूरोप के दूतावासों में तैनात अपने रक्षा सहयोगियों को गर्म कपड़ें और स्नो टेंट निर्माताओं की पहचान करने के लिए कहा है ताकि आपातकालीन स्थिति में उन्हें खरीदा जा सके।

1984 में सियाचिन में हुए ऑपरेशन मेघदूत

1984 में सियाचिन में हुए ऑपरेशन मेघदूत के बाद भारतीय सेना पश्चिमी क्षेत्र में ऊंचाइयों पर पहुंचने वाले सैनिकों के लिए इग्लू, अर्ध-गोलार्ध के गुंबदों, डाउन पार्कों, बर्फ के चश्मे, जूते और दस्ताने जैसी ज़रूरतों को स्थानीय निर्माताओं द्वारा ही पूरी करती आई है।

भारतीय सेना ने लद्दाख सेक्टर में चीनी सेना के बराबर ही सैन्य शक्ति और समर्थन तत्वों की नियुक्ति की है लेकिन भारतीय कमांडरों ने हाल ही में 35,000 से अधिक सैनिकों के शामिल होने की रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। हालांकि सैन्य कमांडरों ने साफ कहा है कि अगले साल पीएलए की तरह की आक्रामकता को रोकने के लिए उन्हें एलएसी के विशेष क्षेत्रों में अपने पदों पर रहना होगा।

सामान्य क्षेत्र 15, 16 या 17 पॉइंट्स पर ज़्यादा बर्फ नहीं होगी

कुछ दिनों पहले एक सैन्य कमांडर ने कहा था, ‘पीएलए आक्रामकता के बाद हम चीन पर बिल्कुल भरोसा नहीं करते हैं और हमें लगता है कि 2021 में गर्मियों के आते ही वे पैंगोंग त्सो के उत्तर में फिर से आ जाएंगे।” लद्दाख की ठंड और शुष्क जलावायु देखते हुए लग रहा है कि गश्त लगाने वाले सामान्य क्षेत्र 15, 16 या 17 पॉइंट्स पर ज़्यादा बर्फ नहीं होगी लेकिन 17,000 फीट से ऊपर चांग ला नाम का इलाका बर्फ से ढक जाता है और ये इलाका पैंगोंग त्सो जाने के रास्ते में आता है।

सेना की बड़ी तैयारी

कमांडर ने बताया था, ‘सर्दियों के कपड़ों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हमने न केवल घरेलू निर्माताओं को ऑर्डर दिए हैं बल्कि साल्टोरो रिज और सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात सैनिको को भी बर्फ के कपड़ों को देने के लिए कहा है। उदाहरण के लिए पार्टापुर और थोईस में सैनिकों को भी सियाचिन में तैनात सैनिको की तरह गर्म कपड़ों की ज़रूरत है, दोनों जगहों की ऊंचाई लेह जितनी ही है। लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो सबसे ख़राब स्थिति में हम पार्टापुर और थोईस में तैनात सैनिको से कब्जे वाले अक्साई चिन मोर्चे पर तैनात सैनिकों के लिए केट, पतलून, दस्ताने, जूते और काले चश्मे छोड़ने के लिए कहेंगे।”

भारतीय सेना को अभ्यास

हालांकि भारतीय सेना को तो हमेशा से ही ऐसे मौसम में ऑपरेशन करने का हुनर है लेकिन चीनी सैनिकों के लिए ये पहला मौका होगा जब उसको -45 डिग्री सेल्सियस में भी पोस्ट पर मौजूद होना होगा। ये किसी भी सैनिक के लिए आसान नहीं होता। सेना के सूत्र बताते हैं कि लद्दाख में तैनात जवानों की स्पेशल ट्रेनिंग होती है साथ ही साथ जवानों के लिए तमाम संसाधन भी जुटाए जाते हैं। जिससे वो लोग वहां पर इतनी ठंड में भी सीमा की सुरक्षा में लगे रहते हैं।

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