चीन को बड़े घाव देंगे भारत के ‘छोटू टैंक’, लद्दाख बॉर्डर पर होंगे तैनात

New Delhi: Lightweight Tanks: चीन के साथ बॉर्डर पर तनातनी को देखते हुए भारत ने एक खास तीर अपने तरकश में शामिल करने का मन बनाया है। सेना को इमर्जेंसी में लाइटवेट टैंक्‍स खरीदने की परमिशन दे दी गई है।

हल्‍के मगर असरदार इन टैंक्‍स (Lightweight Tanks) को खासतौर से पहाड़ी इलाकों में युद्ध के लिए बनाया जाता है। लद्दाख जैसे इलाकों में इनकी बड़ी अहम भूमिका हो सकती है। द इकनॉमिक टाइम्‍स के मुताबिक, लद्दाख में तनाव के बाद ही सेना को इमजेंसी परचेज के तहत ये टैंक्‍स खरीदने को हरी झंडी दी गई है।

अप्रैल महीने में चीन ने जब लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल के पास नए टाइप 15 लाइट टैंक्‍स तैनात किए, उसके बाद से ही भारत सतर्क है। चीन ने जिनझियांग प्रांत में टैंक्‍स (Lightweight Tanks) के साथ युद्धाभ्‍यास भी किया है।

इतने हल्‍के टैंक कि एयरफोर्स ले जाएगी बॉर्डर पर

सेना ऐसे टैंक (Lightweight Tanks) खरीदना चाहती हैं जो एयर-ट्रांसपोर्टेबल हों। यानी जरूरत पड़ने पर उन्‍हें फारवर्ड लोकेशंस पर लैंड या एयरड्रॉप किया जा सके। चीन के पास बॉर्डर वाले इलाके में अच्‍छा-खासा रोड नेटवर्क है जबकि भारत अभी इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर मजबूत ही कर रहा है।

ऐसे में इन टैंक्‍स (Lightweight Tanks) के होने से चीनी एग्रेशन का फौरन जवाब देने में मदद मिलेगी। भारत ने सीमा से सटे कई रणनीतिक इलाकों में एयरफील्‍ड तैयार की हैं जहां इन टैंक्‍स को आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

पूर्वी लद्दाख से सटे एरियाज में तैनात हैं चीन के T-15

लेफ्टिनेंट जनरल एबी शिवाने (रिटायर्ड) ने अपनी स्‍टडी में कहा है कि चीन ने पूर्वी लद्दाख से सटे इलाकों में T-15/ZTPQ लाइट टैंक्‍स को छिपाकर रखा है। सैटेलाइट इमेजरी से इसका पता चला।

उन्‍होंने सुझाव दिया है कि उत्‍तरी फ्रंट जहां मीडियम कैटेगरी के टैंक्‍स नहीं पहुंचते, वहां तेजी से युद्ध क्षमता बढ़ाई जाए। उन्‍होंने इन टैंक्‍स को भारत में बनाने का सुझाव भी दिया है।

कौन से टैंक खरीद सकता है भारत?

भारत में टैंक बनाना तो भविष्‍य की बात है। इमर्जेंसी के लिए भारत के विकल्‍प सीमित हैं क्‍योंकि बहुत कम देश ऐसे टैंक्‍स बनाते हैं। चीन से तो हम खरीद नहीं सकते, अमेरिका का लाइटवेट टैंक प्रोटोटाइप स्‍टेज में हैं। रूस के पास एयर-ट्रांसपोर्टेबल Sprut SDM1 लाइट टैंक जो बहुत कुछ T72 और T90 से मिलता-जुलता है। T72 और T90 भारत के पास पहले से ही हैं।

मैदानी इलाकों के मुफीद हैं अभी के टैंक

भारत की टैंक क्षमता कई देशों के मुकाबले बेहतर हैं लेकिन वे मुख्‍य रूप से मैदानी इलाकों के लिए है। भारत के पास T72, T90 और अर्जुन टैंक हैं। इन टैंक्‍स को हिमालय से लगी सीमा पर तैनात किया गया है मगर पहाड़ों के बीच उन्‍हें चलाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

पहले भी छोटे टैंक यूज कर चुका है भारत

भारत ने 1947-48 में कश्‍मीर ऑपरेशंस और 1962 में चीन से युद्ध के दौरान लाइट टैंक्‍स का इस्‍तेमाल किया था। वे उस वक्‍त बहुत काम आए थे मगर धीर-धीरे चलन से बाहर हो गए क्‍योंकि दुनिया भारी हथियारों की तरफ बढ़ रही थी।

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