बैठक में नहीं बन रही थी बात, भारतीय सेना को मिली खुली छूट तो बॉर्डर छोड़ने पर मजबूर हुआ चीन

Webvarta Desk: भारत और चीन (India China Standoff) के बीच पूर्वी लद्दाख सेक्टर में एलएसी (LAC- Line Of Actual Control) पर विवाद अपने नतीजे पर पहुंचता नजर आ रहा है। दोनों ही देश के सैनिक मोर्चे से पीछे हटने लगे हैं। बीते 9 महीनों से दोनों पड़ोसी देशों में जबर्दस्त सैन्य तनाव रहा था, जो अब खत्म होने के कगार पर है।

भारतीय सीमा (India China Standoff) में फिंगर-4 तक घुस आए चीनी सैनिकों को आखिरकार वापस जाना पड़ रहा है। हालांकि, इन नतीजों तक पहुंचने में कई ऐसे मौके भी आए जब ऐसा लगा कि अब दोनों परमाणु संपन्न देशों में युद्ध तय है। गतिरोध के दौरान चीनी सैनिकों के खिलाफ किसी भी तरह का ऑपरेशन करने के लिए भारतीय सेना (Indian Army) को खुली छूट दे दी गई थी। इसके बाद ही भारतीय सैनिकों ने एलएसी पर बाजी पलट दी।

ये बातें सेना के नॉर्दर्न कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट वाईके जोशी ने अपने एक इंटरव्यू में बताई है। जोशी ने बताया कि चीन हमारे क्षेत्र में फिंगर-4 तक आ पहुंचा था। गलवान में हिंसक झड़प भी हो चुकी थी। इसके अलावा बातचीत की मेज पर भी चीन का पलड़ा भारी था। ऐसे में बातचीत से जब सफलता मिलती दिखाई नहीं दी तब सेना को ऊपर से खास निर्देश मिले। इन निर्देशों में कुछ ऐसा करने को कहा गया था, जिससे चीन पर दबाव बने।

ऊपर से मिली खुली छूट

जोशी ने बताया कि हमें ऊपर से खुली छूट मिल चुकी थी कि जो ऑपरेशन चलाना है.. चलाइए। इसके बाद 29-30 अगस्त की दरमियानी रात को पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर रेजांग ला और रेचिन ला पर भारतीय सैनिकों ने कब्जा कर लिया और भारतीय फौज दबदबे के पोजिशन पर आ गई। इसके बाद जब अगले दौर की बातचीत हुई तो भारत का पलड़ा भारी था। हालांकि, इस दौरान ऐसा वक्त भी आया जब लगा कि अब दोनों देशों में युद्ध हो सकता है।

युद्ध के कगार पर खड़े थे दोनों देश

जोशी ने बताया कि 30 अगस्त को जब भारतीय सैनिकों ने रेजांग ला और रेचिन ला पर कब्जा कर लिया, तब चीनी सेना कैलाश रेंज में आमने-सामने आना चाहती थी। इसके अलावा भारतीय सैनिकों को भी किसी भी ऑपरेशन के लिए खुली छूट मिल चुकी थी। जोशी ने कहा कि ऐसे हालात में जब दुश्मन आप देश के सैनिकों को अपनी ओर आते देखते हैं तो युद्ध की संभावना प्रबल हो जाती है। उन्होंने कहा कि हम एकदम युद्ध की कगार पर ही खड़े थे। वह वक्त हमारे लिए काफी चुनौतीपूर्ण था।

गौरतलब है कि लंबे तनावपूर्ण माहौल के बाद पूर्वी लद्दाख के विवादित इलाके से चीनी और भारतीय सैनिक वापस लौटने लगे हैं। डिसइंगेजमेंट के लिए राजी होने के बाद चीन ने वहां अपने अस्थायी निर्माण को भी हटाना शुरू कर दिया है। बताया गया कि डिसइंगेजमेंट से एलएसी पर यथास्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा और चीन का भारतीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण नहीं होगा।