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‘एशिया में अमेरिकी सेना’ आवैसी ने PM से पूछा- पाक एयरबेस पर खड़े चीनी जेट्स से कैसे निपटेंगे?

New Delhi: अमेरिका ने साढ़े नौ हजार सैनिकों को एशिया में तैनात करने का फैसला किया है। विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ के मुताबिक, चीन ने भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए खतरा पैदा कर दिया है। उन्‍होंने कहा कि अमेरिकी सेना ‘अपने वक्‍त की इन चुनौतियों’ से निपटने के लिए ‘ठीक से तैयार’ है।

पॉम्पिओ के इस बयान पर ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने तंज कसा है। ओवैसी ने एक ट्वीट में कहा कि ‘मुझे उम्‍मीद थी कि ट्रंप अपने दोस्‍त (पीएम नरेंद्र) मोदी की मदद के लिए इंडियन ओशन रीजन में मौजूद चीनी ऑयल टैंकर्स को डराने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स भेजेंगे।’

ओवैसी ने पीएम से पूछा… कैसे निपटेंगे?

AIMIM सांसद (Asaduddin Owaisi) ने पॉम्पिओ का बयान साझा करते हुए प्रधानमंत्री से सवाल किया, “आप राजस्‍थान और गुजरात से सटे पाकिस्‍तानी बेसेज पर जो PLA एयरफोर्स के फाइटर जेट्स जमा होंगे, उनसे कैसे निपटेंगे?”

ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने अपने ट्वीट के आखिर में कहा कि PLA गलवान घाटी में है। अमेरिका ने एशिया में सेना भेजने का फैसला ऐसे वक्‍त में लिया है जब चीन ने भारत के साथ सीमा पर तनाव बढ़ा रखा है। इसके अलावा, दक्षिण चीन सागर में भी चीन की मनमानी हद से ज्‍यादा हो गई है। अमेरिका ने वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया जैसे देशों को भी चीन से खतरा बताया है।

पीएम को लद्दाख संकट के लिए जिम्मेदार ठहरा चुके ओवैसी

ओवैसी ने हफ्ते भर पहले प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी। सर्वदलीय बैठक में न बुलाए जाने के बाद अपने लेटर में ओवैसी ने सीमा पर चीन के साथ पैदा हुए संकट के लिए पीएम मोदी को जिम्मेदार ठहराया था।

उन्‍होंने कहा था, “इस संकट का दोष केवल आपके राजनीतिक, रणनीतिक और सैन्य नेतृत्व पर है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप चीनी इरादों से निपटने में असफल रहे।” ओवैसी ने मांग की थी कि संसद जल्द से जल्द बुलाई जाए, ताकि विपक्षी दल, सत्ता पक्ष से जवाब मांग सकें।

PLA का मुकाबले करने की तैयारी हो: अमेरिका

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ ने जर्मन मार्शल फंड के वर्चुअल ब्रसेल्स फोरम 2020 में सेना को लेकर बयान दिया। उन्‍होंने कहा कि “हम तय करेंगे कि हमारी तैनाती ऐसी हो कि PLA का मुकाबला किया जा सके। हमें लगता है कि यह हमारे समय की यह चुनौती है और हम सुनिश्चित करेंगे कि हमारे पास उससे निपटने के लिए सभी संसाधन उचित जगह पर उपलब्ध हों।”

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर सैनिकों की तैनाती की समीक्षा की जा रही है और इसी योजना के तहत अमेरिका, जर्मनी में अपने सैनिकों की संख्या करीब 52 हजार से घटाकर 25 हजार कर रहा है।

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