राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी ने बाड़मेर में ‘Emergency Landing Field’ का किया उद्घाटन

inaugurate 'Emergency Landing Field' in Barmer

बाड़मेर (राजस्थान), 09 सितंबर (वेब वार्ता)। भारत ने गुरुवार को एक बार फिर अपनी सुरक्षा की क्षमता का प्रदर्शन किया। पाकिस्तान सीमा से 40 किलोमीटर दूर बाड़मेर के हाईवे पर बनी 3 किलोमीटर लंबी ‘Emergency Landing Field’ (ईएलएफ) स्ट्रिप पर सुपर हरक्युलिस ने लैडिंग की। सुपर हरक्युलिस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सवार थे। इसके बाद फाइटर जेट्स सुखोई-30 और जगुआर ने भी इस इमरजेंसी स्ट्रिप पर टच एंड गो लैंडिंग की। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत और एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया भी मौजूद थे।

सड़क पर बैलगाड़ी-ट्रैक्टर चलते देखा होगा, इस पर विमान उतरना ऐतिहासिक- राजनाथ

राजनाथ सिंह ने इस एयर स्ट्रिप को सुरक्षा के लिहाज से अहम बताया। बोले, “आपने सड़क पर ट्रैक्टर, बैलगाड़ी चलते हुए देखे होंगे और अब आप सड़क पर विमान उतरते हुए देख रहे हैं। इंटरनेशनल बॉर्डर से कुछ ही दूर ऐसी स्ट्रिप का तैयार होना ये साबित करता है कि हम अपनी रक्षा के लिए तैयार हैं और सक्षम हैं। हम एक भारत और सशक्त भारत की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं।”

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भारतीय वायु सेना के लिए आपातकालीन स्थिति में विमान उतारने के वास्ते एनएच-925ए के सट्टा-गंधव खंड के तीन किलोमीटर के हिस्से पर ‘ईएलएफ’ का निर्माण किया है। यह सुविधा भारतमाला परियोजना के तहत गगरिया-बखासर और सट्टा-गंधव खंड के नव विकसित ‘टू-लेन पेव्ड शोल्डर’ का हिस्सा है, जिसकी कुल लंबाई 196.97 किलोमीटर है और इसकी लागत 765.52 करोड़ रुपये है।

‘पेव्ड शोल्डर’ उस भाग को कहा जाता है, जो राजमार्ग के उस हिस्से के पास हो जहां से वाहन नियमित रूप से गुजरते हैं। बयान में कहा गया कि यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित बाड़मेर और जालौर जिलों के गांवों के बीच सम्पर्क में सुधार करेगी। इसके पश्चिमी सीमा क्षेत्र में स्थित होने से भारतीय सेना को निगरानी करने में मदद के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में भी सहायता मिलेगी।

ऐसा पहली बार होगा जब भारतीय वायु सेना (आईएएफ) द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग का इस्तेमाल आपात स्थिति में विमान उतारने के लिए किया जाएगा। ईएलएफ का निर्माण 19 महीने के अंदर पूरा किया गया है। इसका निर्माण कार्य जुलाई 2019 में शुरू किया गया था और जनवरी 2021 में यह सम्पन्न हो गया। आईएएफ और एनएचएआई की देखरेख में ‘जीएचवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ ने इसका निर्माण किया है।

33 करोड़ की लागत से बनी इमरजेंसी स्ट्रिप

इस हवाई पट्‌टी को बनाने में 33 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। रक्षा और ट्रांसपोर्ट मंत्रालय के सहयोग से देश में इस तरह के करीब 12 हाईवे तैयार किए जा रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी एयरपोर्ट के अलावा पहली बार किसी हवाई पट्टी पर उतरने वाले प्लेन में मौजूद थे। राजनाथ और गडकरी अब जैसलमेर एयरपोर्ट रवाना हुए हैं।

इमरजेंसी हवाई पट्‌टी पर प्लेन की पार्किंग, सर्विस रोड भी

बाड़मेर-जालोर जिले की सीमा अगड़ावा में बनी इमरजेंसी हवाई पट्टी वायुसेना के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए बनाई गई है। 32.95 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस हवाई पट्टी की लंबाई 3 किमी. और चौड़ाई 33 मीटर है। हवाई पट्टी के दोनों सिरों पर पार्किंग भी बनाई गई हैं, ताकि लैंडिंग के बाद विमानों को पार्क किया जा सके। एयर ट्रैफिक कंट्रोल की इमारत भी है।

इन देशों में भी हैं हाईवे इमरजेंसी हवाई पट्‌टी

  • जर्मनी, स्वीडन, दक्षिण कोरिया, ताइवान, फिनलैंड, स्विटजरलैंड और सिंगापुर सहित कई देशों ने अपने राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर विमानों के उतरने और आपात स्थिति में उड़ान भरने के लिए ऐसी हवाई पट्टी बनाई हैं।
  • भारत में यह पहली इमरजेंसी हवाई पट्टी है, जो बनकर तैयार हो चुकी है। जबकि, आंध्र प्रदेश में ऐसी दो, जबकि पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर एक-एक और हवाई पट्टी बनाई जा रही है।
  • उत्तर प्रदेश में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर हवाई पट्टी ऑपरेशनल है। जिस पर 2017 में वायुसेना ने ट्रायल किया था। भारत में ऐसे राजमार्ग पर करीब 12 जगह हवाई पट्टी बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसमें कई जगह काम चल रहा है और कुछ जगह शुरू होना है।