Govardhan Puja 2020: श्रीकृष्ण को चढ़ाए जाते हैं छप्पन भोग, पुराणों में बताया है इसका रहस्य

New Delhi: दिवाली के एक दिन बाद गोवर्धन पूजा (Govardhan puja 2020) 15 नवंबर 2020 को मनाई जा रही है। भगवान गोवर्धन को इस दिन 56 भोग लगाया जाता है। हिन्दू पांचांग के अनुसार गोर्वधन पूजा कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन की जाती है।

ऐसी मान्यता है कि द्वापर में इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत (Govardhan puja 2020) को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाया था। लेकिन एक बात आपके दिमाग में अक्सर आती होगी कि भगवान को छप्पन भोग क्यों चढ़ाए जाते हैं? आखिर इसके पीछे का क्या कारण है? आज हम आपको यही सीक्रेट बताने जा रहे हैं…

क्यों चढ़ाया जाता है छप्पन भोग?

दरअसल, ऐसा माना जाता है कि जब इंद्र देव ने गुस्से में आकर भयंकर बारिश कर दी थी, तब उस समय भगवान कृष्ण ने गांववालों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी ऊंगली पर 7 दिन तक उठाए रखा था। उन 7 दिनों में श्रीकृष्ण ने गांववालों के दिए 8 तरह के भोजन हर दिन खाए थे। यानी कि 7 दिनों तक लगातार 56 तरह के भोजन भगवान ने खाए थे। इस कारण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग चढ़ाया जाता है।

भोग में ये होता है शामिल

भगवान को चढ़ाए जाने वाले छप्पन भोग में 16 तरह के नमकीन, 20 तरह की मिठाईयां और 20 तरह के मेवे चढ़ाए जाते हैं। इनमें मक्खन, खीर, दूध, चावल, बेसन से बने पकवान शामिल रहते हैं। छप्पन भोग चढ़ाने का भी एक नियम होता है। सबसे पहले भगवान पर दूध चढ़ाया जाता है, फिर बेसन से बने पकवान या नमकीन दिए जाते हैं। उसके बाद सबसे आखिरी में मिठाइयां चढ़ाई जाती हैं।

छप्पन भोग के नाम इस प्रकार है

1. भक्त (भात), 2. सूप (दाल), 3. प्रलेह (चटनी), 4. सदिका (कढ़ी), 5. दधिशाकजा (दही शाक की कढ़ी), 6. सिखरिणी (सिखरन), 7. अवलेह (शरबत), 8. बालका (बाटी), 9. इक्षु खेरिणी (मुरब्बा), 10. त्रिकोण (शर्करा युक्त), 11. बटक (बड़ा), 12. मधु शीर्षक (मठरी), 13. फेणिका (फेनी), 14. परिष्टश्च (पूरी), 15. शतपत्र (खजला), 16. सधिद्रक (घेवर), 17. चक्राम (मालपुआ), 18. चिल्डिका (चोला), 19. सुधाकुंडलिका (जलेबी), 20. धृतपूर (मेसू)।

21. वायुपूर (रसगुल्ला), 22. चन्द्रकला (पगी हुई), 23. दधि (महारायता), 24. स्थूली (थूली), 25. कर्पूरनाड़ी (लौंगपूरी), 26. खंड मंडल (खुरमा), 27. गोधूम (दलिया), 28. परिखा, 29. सुफलाढय़ा (सौंफ युक्त), 30. दधिरूप (बिलसारू), 31. मोदक (लड्डू), 32. शाक (साग), 33. सौधान (अधानौ अचार), 34. मंडका (मोठ), 35. पायस (खीर), 36. दधि (दही), 37. गोघृत (गाय का घी), 38. हैयंगपीनम (मक्खन), 39. मंडूरी (मलाई), 40. कूपिका (रबड़ी)।

41. पर्पट (पापड़), 42. शक्तिका (सीरा), 43. लसिका (लस्सी), 44. सुवत, 45. संघाय (मोहन), 46. सुफला (सुपारी), 47. सिता (इलायची), 48. फल, 49. तांबूल, 50. मोहन भोग, 51. लवण, 52. कषाय, 53. मधुर, 54. तिक्त, 55. कटु, 56. अम्ल।

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