Tarun Gogoi

असम के पूर्व CM तरुण गोगोई का 86 साल की उम्र में निधन, कुछ ऐसा रहा सियासी सफर

New Delhi: असम में पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई (Tarun Gogoi) का 86 वर्ष की आयु में सोमवार शाम निधन हो गया। गौहाटी मेडिकल कॉलेज में शाम करीब 5:34 बजे गोगोई का निधन हुआ। गोगोई के निधन पर पीएम मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने शोक जताया है।

86 साल की उम्र पार कर चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता (Tarun Gogoi) की देखभाल नौ डॉक्टरों की एक टीम कर रही थी। उनकी हालत काफी नाजुक थी और वह वेंटिलेटर पर थे। गोगोई के अंगों ने भी काम करना बंद कर दिया था।

हालांकि उनके दिमाग को कुछ संकेत मिल रहे थे, आंखें चल रही थीं और पेसमेकर लगाए जाने के बाद उनका दिल काम कर रहा थी। इसके अलावा गोगोई (Tarun Gogoi) के सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। गोगोई का रविवार को छह घंटे तक डायलिसिस हुआ था और यह दोबारा विषाक्त चीजों से भर गया था। उनकी ऐसी हालत नहीं थी कि डायलिसिस दोबारा किया जाए।

3 बार असम के CM रहे हैं गोगोई

असम के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके 84 साल के गोगोई (Tarun Gogoi) को दो नवंबर को जीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। शनिवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें शनिवार को वेंटिलेटर पर रखा गया था। गोगोई 25 अगस्त को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे और इसके अगले दिन उन्हें जीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 25 अक्टूबर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।

कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान

सोमवार को हुए तरुण गोगोई (Tarun Gogoi) के निधन से कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक नुकसान हो सकता है। कांग्रेस ने न सिर्फ राज्य में अपना अभिभावक खोया है बल्कि बीजेपी के खिलाफ हो रहे गठबंधन को भी भारी झटका लगा है। असम में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस तरुण गोगोई के जरिए बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन तैयार कर रही थी।

राज्य पीसीसी प्रमुख रिपुन बोरा ने स्वीकार किया कि गोगोई का निधन कांग्रेस के लिए एक झटका था क्योंकि वे खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस पाने के प्रयास में थे। उन्होंने कहा, ‘अब हम एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। तरुण गोगोई के निधन के बाद खाली हुई जगह को फिलहाल कोई नहीं भर सकता है।’

राज्य में अब तक सबसे ज्यादा समय तक किया राज

गोगोई 2001 में असम के मुख्यमंत्री बने थे। तब से लगातार तीन बार वह राज्य के मुख्यमंत्री रहे। गोगोई राज्य में 5,487 दिन तक मुख्यमंत्री रहे जो राज्य में अब तक का रेकॉर्ड है। दिवालिया अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण से लेकर एजीपी तक विरासत में मिले आतंकवादी संगठनों को वार्ता की मेज पर लाने के लिए, उनकी सार्वभौमिक अपील अकसर मदद करती थी।

तरुण गोगोई के बेटे को मिल सकती है कमान

असम में पूर्व सीएम की मौत के बाद कांग्रेस को फिर से संभलने में समय लग सकता है। कहा जा रहा है कि तरुण गोगोई के बेटे और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई अब लाइमलाइट में आ सकते हैं। अब, कांग्रेस अभियान चलाकर लोगों को यह याद दिलाने का प्रयास कर सकती है कि पिछले पांच वर्षों में बीजेपी क्या करने में विफल रही और गोगोई के नेतृत्व में पार्टी ने क्या किया।

पार्टी को जल्द ही दूसरा नेता मिलने की उम्मीद

गोगोई के पूर्व वित्त मंत्री नीलमणि सेन डेका ने कहा, “नेता हमेशा लोगों द्वारा चुने जाते हैं और तरुण गोगोई असम में उन सभी में सबसे ऊंचे थे। उनकी मृत्यु एक बहुत बड़ा झटका है क्योंकि वह राज्य में पार्टी का चेहरा थे। हमारे पास चुनाव में पांच महीने हैं और मुझे यकीन है कि पार्टी को जल्द ही एक नेता मिलेगा।’

नौ डॉक्टरों की टीम कर रही थी इलाज

आपको बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का 86 वर्ष की आयु में सोमवार शाम निधन हो गया। उनका इलाज गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में चल रहा था। सोमवार की शाम करीब 5:34 बजे गोगोई का निधन हुआ। 86 साल की उम्र पार कर चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता की देखभाल नौ डॉक्टरों की एक टीम कर रही थी। उनकी हालत काफी नाजुक थी और वह वेंटिलेटर पर थे।

गोगोई के अंगों ने भी काम करना बंद कर दिया था। गोगोई 25 अगस्त को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे और इसके अगले दिन उन्हें जीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 25 अक्टूबर को उन्हें अस्पताल से छुटी दे दी गई थी लेकिन तबीयत खराब होने के बाद उन्हें एक बार फिर से अस्पताल ले जाया गया था।

उग्रवाद से जूझते असम को अवसरों की धरती बनाने वाले तरुण गोगोई

उग्रवाद की समस्या से जूझते असम को अवसरों की धरती में बदलने का जब भी जिक्र होगा, तो पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का नाम सबसे आगे होगा। वह गोगोई ही थे, जिनके कार्यकाल में कॉरपोरेट ने असम की धरती पर कदम रखा। लगातार पंद्रह साल तक मुख्यमंत्री रहे, प्रदेश को पहचान दिलाई। पर अपनी सरकार के नंबर दो के नंबर एक बनने की राह में बाधा बनना उन्हें भारी पड़ा और हेमंत बिस्वा सरमा को गंवाने की कीमत उन्हें अपनी सरकार गंवाकर चुकानी पड़ी।

ऐसा रहा तरुण गोगोई का सियासी सफर

2001 से 2016 तक तीन बार असम के मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई का जन्म 1 अप्रैल 1936 को असम के जोरहाट जिले के रंगाजन टी एस्टेट में में हुआ था। उनके पिता डॉ कमलेश्वर गोगोई रंगाजन टी एस्टेट में डॉक्टर थे। वहीं उनकी माता ऊषा गोगोई कवयित्री थीं। उनके माता-पिता उन्हें प्यार से पुनाकोन कहा करते थे।

तरुण गोगोई की शुरुआती पढ़ाई रंगाजन निम्न बुनियादी विश्व विद्यालय से हुई थी। इसके बाद उन्होंने कक्षा चौथी तक जोरहाट मदरसा स्कूल से की। साल 1949 में वह जोरहाट सरकारी हाई स्कूल चले गए, जहां से उन्होंने 10वीं पास की। उन्होंने जोरहाट जिले के ही जगन्नाथ बरूआ कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और फिर गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल की।

ऐसे बने राजनीति के माहिर खिलाड़ी
  • तरुण गोगोई पहली बार 1968 में जोरहाट के म्युनिसिपल बोर्ड के सदस्य चुने गए।
  • गोगोई 6 बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सांसद रह चुके हैं। साल 1971 से 85 तक वह जोरहाट लोकसभा सीट से जीते। इसके बाद 1991 से 96 और 1998-2002 तक उन्होंने कलियाबोर सीट का प्रतिनिधित्व किया। फिलहाल इस सीट से उनके बेटे गौरव गोगोई सांसद हैं।
  • तरुण गोगोई का कद उस वक्त बढ़ा जब साल 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की अगुआई में वह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के जॉइंट सेक्रेटरी चुने गए। साल 1985 से 1990 तक वह पार्टी के महासचिव भी रहे। तब प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने उनकी कैबिनेट में (1991-96) खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री का कार्यभार संभाला।
  • वह 1986 से 90 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। इसके बाद 1996 में वह दोबारा इस पद के लिए चुने गए।
  • गोगोई चार बार विधायक भी रहे। उन्होंने सबसे पहले मार्गेरिटा विधानसभा क्षेत्र से (1996-98) जीत हासिल की। इसके बाद 2001 से वह तिताबर विधानसभा सीट से चुने जाते रहे।
  • साल 2001 में हुए विधानसभा चुनावों में जब कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की तो तरुण गोगोई को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद रिकॉर्ड तीन बार वह लगातार सीएम चुने गए।
  • लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद उनके नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। असम की 14 लोकसभा सीट से कांग्रेस कुल 3 ही जीत पाई। जबकि बीजेपी ने 7 सीटें जीतीं, जो असम से किसी भी पार्टी द्वारा लोकसभा चुनाव में जीती गईं सबसे ज्यादा सीटें हैं।
  • चुनाव से पहले गोगोई ने ऐलान किया था कि अगर कांग्रेस 14 सीटों में से 7 पर जीत हासिल नहीं कर पाई तो वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। जुलाई 2014 में उन्होंने संकेत दे दिया था कि वह 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व नहीं करेंगे।
चुना था माता-पिता से अलग करियर

तरुण गोगोई के पिता डॉ कमलेश्वर गोगोई रंगजन टी एस्टेट में एक मेडिकल प्रैक्टिशनर थे। वहीं उनकी मां उषा गोगोई कवियत्री थीं। वो प्रसिद्ध कवि गणेश गोगोई की छोटी बहन थीं, इसके अलावा उन्हें अपने कविता संग्रह, हियार सामर (दिल का खजाना) के लिए खास पहचान मिली थी। तरुण गोगोई ने अपने माता-पिता से अलग अपना करियर एक वकील के तौर पर शुरू किया। उन्होंने साल 1963 में असम की गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से एलएलबी की। वो सामाजिक कार्यों और राजनीति में भी गहरी रुचि रखते थे।

30 जुलाई 1972 को, गोगोई ने डॉली गोगोई से विवाह किया। डॉली ने जीव विज्ञान से पढ़ाई की थी। उनके एक बेटे गौरव गोगोई और बेटी चंद्रमा गोगोई हैं।

बागवानी था पसंदीदा काम

असम राज्य में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी निभाने वाले तरुण गोगोई ने अपने बिजी समय में से एक खास वक्त बागवानी और किताबों को दिया। उन्हें पढ़ने का हमेशा शौक रहा। इसके अलावा खेलों के प्रति भी उनकी रुचि रही। वो टेनिस और फुटबॉल जैसे गेम पसंद करते थे।

वह अखिल असम मोइना परिजात, बच्चों के संगठनों और भारत युवक समाज के पूर्व कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। हाल ही में एनआरसी को लेकर भी वो खूब चर्चा में रहे। इसके विरोध में उन्होंने याचिका डाली थी और 36 साल बाद फिर से काला कोट पहनकर कोर्ट पहुंचने को लेकर खूब चर्चा बटोरी थी।

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