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Sunday, January 29, 2023

देश में कोरोना की आहट के बीच बर्ड फ्लू का खौफ, केरल में मारे गए 6000 से ज्यादा पक्षी

वेब वार्ता, तिरुवनंतपुरम. केरल के कोट्टायम जिले की तीन अलग-अलग पंचायतों में बर्ड फ्लू (bird flu) फैलने की पुष्टि हुई है। इन क्षेत्रों में 6,000 से अधिक पक्षियों को मार दिया गया है। जिला प्रशासन ने बताया कि कोट्टायम की वेचुर, नीनदूर और अरपुकारा पंचायतों में कुल 6,017 पक्षी मारे गए, जिनमें ज्यादातर बतख शामिल थीं। इधर लक्षद्वीप प्रशासन ने केरल में बर्ड फ्लू के कथित प्रकोप के कारण अब मुख्य भूमि से फ्रोजन चिकन के ट्रांसपोर्टेशन पर प्रतिबंध लगा दिया है।

बर्ड फ्लू फैलने की आशंका के चलते वेचुर में लगभग 133 बतख और 156 मुर्गियों, नींदूर में 2,753 बतख और अर्पुकारा में 2,975 बतख को मार दिया गया। बर्ड फ्लू या एवियन इन्फ्लूएंजा, एक अत्यधिक संक्रामक जूनोटिक (पशु-पक्षियों से फैलने वाला) बीमारी है।

फ्रोजन चिकन के ट्रांसपोर्टेशन पर रोक

इस बीच, लक्षद्वीप प्रशासन ने केरल में बर्ड फ्लू के कथित प्रकोप के कारण राज्य से फ्रोजन चिकन के परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया है। कवारत्ती में पोर्ट, शिपिंग और एविएशन के निदेशक को भेजे गए अपने पत्र में विभाग ने कहा है कि पड़ोसी राज्य केरल में एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू), एक अत्यधिक संक्रामक जूनोटिक बीमारी के फैलने की सूचना मिली है। इसलिए, लक्षद्वीप द्वीप समूह से मुख्य भूमि से फ्रोजन चिकन के परिवहन पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है।

विभाग ने अनुरोध किया कि संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए कि फ्रोजन चिकन को मुख्य भूमि से द्वीपों तक जहाजों या बार्जों पर लोड नहीं किया जाएगा।

लगातार मारे जा रहे पक्षी

जिला पशु चिकित्सकों ने कहा कि कोट्टायम जिले के दो गांवों में पिछले सप्ताह ब्रायलर मुर्गियों के प्रकोप के बाद, अधिकारियों ने सैकड़ों बत्तखों और अन्य घरेलू पक्षियों को मार डाला है। किसानों को उथले तालाबों में बत्तखों को पकड़ते और उन्हें मारने के लिए निर्धारित क्षेत्र में ले जाने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को सौंपते देखा गया।

कोट्टायम के पशु चिकित्सा प्रमुख शाजी पणिकर ने कहा कि हमने संक्रामक तालाबों के आसपास एक किलोमीटर (0.62 मील) के दायरे में विभिन्न घरेलू पक्षियों को मारने का अभियान शुरू किया। वायरस का प्रसार सरकारों और कुक्कुट उद्योग के लिए एक चिंता का विषय है क्योंकि इससे झुंडों को होने वाली तबाही, व्यापार प्रतिबंधों की संभावना और मानव संचरण का जोखिम हो सकता है।

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