Farmers Protest: किसानों के समर्थन में बोली सोनिया, अहंकार छोड़ कृषि कानूनों को वापस ले सरकार

Webvarta Desk: Kisan Andolan: देश की राजधानी दिल्ली में कड़ाके की ठंड और बारिश के बीच भी कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसानों का आंदोलन (Farmers Protest) जारी है। इस बीच कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने मोदी सरकार (Modi Govt) पर निशाना साधा है। सोनिया ने कहा कि देश की आजादी के बाद से पहली बार ऐसी अहंकारी सरकार सत्ता में आई है, जिसे अन्नदाताओं की पीड़ा दिखाई नहीं दे रही है।

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने नए कृषि कानूनों (Farm  Laws) को बिना शर्त वापस लेने की मांग की है। उन्होंने साथ ही कहा है कि लोकतंत्र में जनभावनाओं की उपेक्षा करने वाली सरकारें और उनके नेता लंबे समय तक शासन नहीं कर सकते हैं।

लोकतंत्र का अर्थ किसान-मजदूरों के हितों की रक्षा

सोनिया (Sonia Gandhi) ने कहा है कि अब भी समय है कि मोदी सरकार सत्ता के अहंकार को छोड़कर, बिना शर्त तीनों काले क़ानून वापस लें। उन्होंने कहा कि ठंड एवं बारिश में दम तोड़ रहे किसानों का आंदोलन समाप्त कराना ही राजधर्म है और दिवंगत किसानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि भी। मोदी सरकार को ये याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र का अर्थ ही जनता एवं किसान-मज़दूरों के हितों की रक्षा करना है।

राहुल ने कही थी चंपारण आंदोलन से तुलना

इससे पहले, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन की तुलना अंग्रेजों के शासन में हुए चंपारण आंदोलन से करते हुए रविवार को कहा कि इसमें भाग ले रहा हर किसान एवं श्रमिक सत्याग्रही है, जो अपना अधिकार लेकर ही रहेगा।

राहुल गांधी ने ट्वीट कर आरोप लगाया है कि देश एक बार फिर चंपारण जैसी त्रासदी झेलने जा रहा है। तब अंग्रेज कम्पनी बहादुर था, अब मोदी-मित्र कम्पनी बहादुर हैं। लेकिन आंदोलन में भाग ले रहा हर एक किसान-मजदूर सत्याग्रही है जो अपना अधिकार लेकर ही रहेगा। महात्मा गांधी ने 1917 में चंपारण सत्याग्रह का नेतृत्व किया था और इसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक आंदोलन माना जाता है। किसानों ने ब्रिटिश शासनकाल में नील की खेती करने संबंधी आदेश और इसके लिए कम भुगतान के विरोध में बिहार के चंपारण में ये आंदोलन किया था।